
बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अर्जी को मूल याचिका मानकर सुनवाई करने जा रहा है. अदालत का कहना है कि बानो की याचिका ही पहली अर्जी मानी जाएगी. कोर्ट का कहना है कि मामले की मेरिट पर सभी याचिकाकर्ताओं को सुनेगा. संभावना जताई जा रही है कि कोई नई पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. दरअसल जस्टिस बेला त्रिवेदी ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था.
बिलकिस बानो के गुनहगारों की रिहाई के खिलाफ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करने की दोषियों की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी है. कोर्ट ने कहा कि वह बिलकिस की याचिका को मुख्य याचिका मानकर सभी पांच याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. ये सुनवाई मेरिट पर होगी.
दरअसल दोषियों के वकीलों ने कहा था कि सुभाषिनी अली और महुआ मोइत्रा समेत पांचों याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं. ये तीसरे पक्ष की याचिकाएं हैं और उनका केस में कोई लोकस नहीं है.
इस पर पीठ प्रमुख जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा कि खुद पीड़िता बिलकीस भी यहां आई हैं. हम बिलकीस की याचिका को मुख्य मानकर इन याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे. चूंकि जब इस मामले में पीड़िता खुद यहां आ गई है तो लोकस का मुद्दा खत्म हो जाता है. लिहाजा हम फरवरी के मध्य में सुनवाई करेंगे. पहले बिल्किस को सुनेंगे फिर अन्य याचिकाकर्ताओं की दलीलें भी सुनी जाएगी.
फरवरी के मध्य में होगी सुनवाई
जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा कि फरवरी मध्य में होने वाली सुनवाई के समय याचिकाकर्ता के वकील अंतिम सुनवाई के लिए तैयार होकर आएं. साथ ही उस समय सुनवाई के दौरान इस मामले से जुड़े कानूनी मुद्दे और बिंदुओं पर ही बहस करें. सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कानून और न्याय हमारे साथ है. लेकिन बरी किए गए सजायाफ्ता लोगों के वकील ने कहा कि मुख्य याचिकाकर्ता की कोई कानूनी भूमिका यानी लोकस नहीं है. इसके बाद जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने इस मामले में भी खुद को सुनवाई से अलग कर लेने का ऐलान कर दिया.
जस्टिस बेला त्रिवेदी दोबारा केस से हटीं
बता दें कि जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने बिलकीस बानो की याचिका पर भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. वह इससे पहले दिसंबर के शुरुआत में भी खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर चुकी हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने बिलकीस की वकील शोभा गुप्ता को कहा है कि वो एक अर्जी लगाकर रजिस्ट्री से अपने केस को लिस्ट कराएं.
11 दोषियों को गुजरात सरकार ने दी थी माफी
बता दें कि इसी 15 अगस्त को गुजरात सरकार ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सभी ग्यारह दोषियों को माफी देते हुए रिहा कर दिया था. इस मामले पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल और सिविल सोसायटी के संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और गुजरात सरकार की जोरदार निंदा की थी.