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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे की बहाली की मांग वाली याचिकाओं पर आज यानी की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान बेंच फैसला सुनाएगी. इस मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की दलील थी कि इसे अल्पसंख्यक खांचे में रखना सही नहीं है. इस मामले पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, नामित चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के फैसले से यह तय होगा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान के रूप मे दर्जा दिया जाए या नहीं.
वहीं, सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले मे तय करेगा कि संविधान के अनुच्छेद-30 के तहत किसी शैक्षणिक संस्थान को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने के मानदंड क्या हैं?
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ये भी तय करेगा कि क्या संसदीय कानून द्वारा निर्मित कोई शैक्षणिक संस्थान संविधान के अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त कर सकता है?
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फरवरी में फैसला सुरक्षित रखा
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने आठ दिनों की लंबी सुनवाई के बाद फरवरी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए अल्पसंख्यक दर्जे की मांग वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.
दरअसल, पीठ अपने फैसले में तय करेगी कि एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना संविधान और विधिसम्मत है या नहीं. इस मामले में 11 याचिकाएं दाखिल की गई थी. अलीगढ़ विश्वविद्यालय ने रजिस्ट्रार के जरिए मूल याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, राजीव धवन, एमआर शमशाद ने दलीलें रखीं. दूसरी ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, नीरज किशन कौल, राकेश द्विवेदी ने दलीलें दी थी.