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तेलंगाना: राज्यपाल द्वारा कई बिलों को लंबित रखे जाने का मामला, SC 10 अप्रैल को करेगा सुनवाई

राज्य विधान सभा से पारित कई बिलों को लंबित रखे जाने के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई टल गई. शीर्ष कोर्ट अब 10 अप्रैल को सुनवाई करेगा. तेलंगाना सरकार के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि विधानसभा द्वारा पारित 10 प्रमुख विधेयकों पर राज्यपाल अपनी सहमति नहीं दे रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट में 10 अप्रैल को होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 10 अप्रैल को होगी सुनवाई
संजय शर्मा/अनीषा माथुर
  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 8:10 PM IST

तेलंगाना में सरकार बनाम राज्यपाल के बीच टकराव इस कदर बढ़ा कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन द्वारा राज्य विधान सभा से पारित कई बिलों को लंबित रखे जाने के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई टल गई. शीर्ष कोर्ट अब 10 अप्रैल को सुनवाई करेगा.

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तेलंगाना सरकार के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि विधानसभा द्वारा पारित 10 प्रमुख विधेयकों पर राज्यपाल अपनी सहमति नहीं दे रही हैं. ये विधेयक उनकी सहमति के लिए भेजे जा चुके हैं. उनके पास ये विधेयक अरसे से लंबित है. उनको निर्देश दिया जाए कि इन पर फैसला लें. क्योंकि सहमति न मिलने की वजह से कई बिल अटके हुए हैं.

क्या है मामला
सरकार द्वारा विधानसभा में पारित 10 विधेयकों पर राज्यपाल अपनी सहमति के दस्तखत नहीं कर रही हैं. इसके खिलाफ तेलंगाना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है. इस मामले में राज्य सरकार का कहना है कि ये बिल पारित होने के बाद सितंबर 2022 से लंबित हैं. राज्यपाल अपने संवैधनिक दायित्व को दरकिनार कर इन बिल को अपने पास रखे हुए हैं. याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल को निर्देश दे कि वो तत्काल प्रभाव से इन बिलों को मंजूरी दें, ताकि जनहित में उनका इस्तेमाल हो सके. 

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राज्य सरकार ने 10 लंबित विधेयकों पर तत्काल सहमति देने का निर्देश देने की मांग की है. इनमें से सात विधेयक पिछले साल 14 सितंबर से राज्यपाल के कार्यालय में लंबित हैं. जबकि तीन विधेयकों को विधानसभा का बजट सत्र समाप्त होने के बाद 13 फरवरी को उनके पास भेजा गया था.

याचिका में ये भी कहा गया है कि अगर राज्यपाल को विधेयकों पर कोई संदेह है, तो वह स्पष्टीकरण मांग सकती हैं, लेकिन वह उन्हें लंबित नहीं कर सकतीं. अगर वह कोई मुद्दा उठाती हैं तो हम उन्हें स्पष्ट करेंगे.

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