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दूसरी पत्नी को पेंशन दिलाने के लिए SC ने किया विशेषाधिकार का इस्तेमाल, जानें पूरा मामला

कर्मचारी जयनारायण महाराज के निधन के बाद उनकी दूसरी पत्नी राधा देवी ने पेंशन के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन कागजों में महाराज की पहली पत्नी राम सवारी देवी का नाम था. इसलिए कंपनी ने उन्हें पेंशन देने से इनकार कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट. सुप्रीम कोर्ट.
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक अनूठे मामले में अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसी बुजुर्ग महिला को पेंशन का लाभ दिलवाया जो अपने पति की पहली पत्नी के रहते दूसरी पत्नी बनी थी. यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले कई बार कह चुका है कि पहली शादी के रहते हुए दूसरी शादी करना गैरकानूनी है. 

23 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रही है महिला

यह मामला उस बुजुर्ग महिला का है जिसने पति की मौत के बाद पेंशन का लाभ पाने के लिए 23 साल तक निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी जंग लड़ी. जस्टिस संजीव खन्ना, संजय कुमार और आर. महादेवन की बेंच ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए महिला के पक्ष में अपना फैसला सुनाया. मामला साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के एक कर्मचारी से जुड़ा है. दरअसल, कर्मचारी जयनारायण महाराज के निधन के बाद उनकी दूसरी पत्नी राधा देवी ने पेंशन के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया. लेकिन कागजों में महाराज की पहली पत्नी राम सवारी देवी का नाम था. राम सवारी का 1984 में ही निधन हो गया था.

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जय नारायण 1983 में रिटायर हुए थे और 2001 में उनका निधन हो गया. जयनारायण ने अपनी पहली पत्नी राम सवारी के साथ रहते हुए ही दूसरी शादी राधा से की थी. तीनों एक साथ एक ही घर में रहते थे. दस्तावेजों में चूंकि राम सवारी का नाम पत्नी के तौर पर दर्ज था इसलिए राधा के पेंशन का दावा कोल फिल्ड ने खारिज कर दिया.

महिला ने कोर्ट के चक्कर लगाए

राधा ने कोर्ट की ओर रुख किया. कामयाबी नहीं मिली. हार ना मानते हुए हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. यहां पीठ ने राधा की परेशानी समझी और संविधान में निहित अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया. इस अनुच्छेद के तहत पूर्ण न्याय के लिए कोर्ट को विशेष आदेश पारित करने का अधिकार मिलता है. अयोध्या मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी अधिकार का इस्तेमाल किया था.

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कोर्ट ने दिया पेंशन देने का आदेश

पीठ ने कोल फील्ड को आदेश दिया कि बुजुर्ग महिला अपना बाकी का जीवन गरिमा के साथ गुजार सके इस नजरिए से राधा देवी जयनारायण की पत्नी के रूप में आजीवन पेंशन पाने की हकदार हैं. हालांकि कोर्ट पहले भी ये कह चुका है कि एक विवाह बंधन में रहते हुए कोई भी दूसरी शादी करे तो वो गैर कानूनी और दंडनीय है. कोर्ट ने कहा कि राधा के पत्नी होने पर कोई विवाद नहीं है. क्योंकि पहले भी तीनों साथ रहे हैं. कोर्ट ने माना कि राम सवारी देवी के निधन के बाद राधा ने जयनारायण की आजीवन देखभाल की. 

कोर्ट ने कहा कि अब जयनारायण की पहली पत्नी के निधन के बाद वो पेंशन की हकदार है. लिहाजा उसे ये अधिकार दिया जाए. अदालत ने साउथ ईस्टर्न कोल फिल्ड को निर्देश दिया कि राधा देवी को पहली जनवरी 2010 से बकाया सारी पेंशन का भुगतान किया जाए.

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