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तलाक-ए हसन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची मुस्लिम महिला, कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार

What is Talaq-e Hasan: पीड़िता महिला की तरफ से एडवोकेट पिंकी आनंद ने कोर्ट को बताया कि तलाक-ए हसन के दो नोटिस मिल चुके हैं, अगर जल्द ही कोर्ट की तरफ से दखल नहीं दिया गया तो ये तलाक हो जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए हसन का मामला सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए हसन का मामला
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2022,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST
  • तीन तलाक की एक श्रेणी है तलाक-ए हसन
  • तीन महीने तक तीन बार बोलना होता है तलाक
  • पीड़ित महिला को मिल चुके हैं दो नोटिस

मुस्लिम महिलाओं के तलाक का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के दर पर पहुंच गया है. ताजा मामला तलाक-ए हसन से जुड़ा है, जिसे खत्म करने की याचिका कोर्ट में दायर की गई है. हालांकि, कोर्ट ने इस याचिका पर जल्द सुनवाई से फिलहाल इनकार कर दिया है. कोर्ट ने इस याचिका को अगले हफ्ते मेंशन करने के लिए कहा है. 

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याचिकाकर्ता मुस्लिम महिला बेनजरी की ओर से सीनियर एडवोकेट पिंकी आनंद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इसी साल 19 अप्रैल को पीड़िता के पति ने तलाक-ए हसन के तहत उसे पहला नोटिस जारी किया था. इसके बाद पति द्वारा महिला को 20 मई को दूसरा नोटिस भेजा गया. पिंकी आनंद ने कहा कि अगर अदालत ने दखल नहीं दिया तो इस्लामी उसूलों के मुताबिक 20 जून तक इस महिला का तलाक मान लिया जाएगा. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट इस पर जल्द सुनवाई करे. 

पीठ की अगुआई कर रहे जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने कहा कि 19 अप्रैल को पहला नोटिस जारी किया गया था, लेकिन आपने दूसरे नोटिस तक इंतजार किया, हम मामले पर कोर्ट खुलने के बाद सुनवाई करेंगे. कोर्ट ने कहा कि तलाक-ए हसन को चुनौती देने वाली महिला की याचिका पर जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है. 

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जस्टिस चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ता से ये भी पूछा कि जब ये निजी अधिकार का मामला है तो इस मामले में जनहित याचिका क्यों दायर की गई? इस पर एडवोकेट पिंकी आनंद ने कहा कि ऐसी अनेक पीड़ित मुस्लिम महिलाएं हैं जिनके पति तलाक-ए हसन की मनमानी से ये जुल्म करते हैं. 

याचिकाकर्ता की बारंबार गुहार पर पीठ ने कहा कि वो अगले हफ्ते इसे शीघ्र सुनवाई के लिए मेंशन करें. 

क्या होता है तलाक-ए हसन

तलाक-ए हसन में पति अपनी पत्नी को पहली बार तलाक बोलने के बाद एक महीने तक इंतजार करता है, फिर महीना पूरा होने पर वो दूसरी बार तलाक बोलता है. एक और महीना गुजर जाने के बाद वो फिर तीसरी बार अपनी पत्नी को तलाक बोलता है. तीन बार तलाक बोलने के दरमियान अगर पति-पत्नी में सुलह नहीं होती है तो तलाक मान लिया जाता है. पहली बार तलाक बोलने से लेकर तीसरी बार तलाक बोलने तक की अवधि में पति-पत्नी दोनों साथ ही रहते हैं.

जो मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया गया है, उसमें महिला को दो नोटिस मिल चुके हैं यानी दो बार उसे तलाक बोला जा चुका है. इसीलिए याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई है ताकि तीसरे नोटिस से पहले इस मसले का कोई हल निकल सके. लेकिन कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के लिए फिलहाल मना कर दिया है और अगले हफ्ते मेंशनिंग के लिए कहा है. 

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