
कई मुस्लिम संगठनों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक के विरोध के बीच, एनडीए की प्रमुख सहयोगी टीडीपी के वरिष्ठ नेता नवाब जान ने रविवार को कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी विधेयक को लागू नहीं होने देंगे. दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा आयोजित 'संविधान बचाओ सम्मेलन' को संबोधित करते हुए नवाब जान ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को संसद में पारित होने से रोकने के लिए सभी से एक साथ आने का आग्रह किया. जान ने कहा, 'चंद्रबाबू नायडू ने हमेशा कहा है कि उनकी दो आंखें हैं- एक हिंदू और एक मुस्लिम.'
नवाब जान ने कहा, 'वह (नायडू) कहते हैं कि अगर एक आंख को कोई नुकसान पहुंचता है तो इससे पूरा शरीर प्रभावित होता है और हमें विकास के पथ पर आगे बढ़ते समय इसे ध्यान में रखना चाहिए.' तेलुगु देशम पार्टी के वरिष्ठ मुस्लिम नेता ने कहा, 'चंद्रबाबू नायडू के शासन में मुसलमानों को जो लाभ मिला वह देश की आजादी के बाद से अभूतपूर्व है. चंद्रबाबू एक धर्मनिरपेक्ष मानसिकता के व्यक्ति हैं. हमारे मुख्यमंत्री मुसलमानों को नुकसान पहुंचाने वाले विधेयक को लागू नहीं होने देंगे.'
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चंद्रबाबू के कारण ही वक्फ बिल जेपीसी में पहुंचा: TDP नेता
टीडीपी नेता ने दावा किया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजना केवल नायडू के कारण ही संभव हो सका. नवाब जान ने यह भी दावा किया कि नायडू ने कुछ दिन पहले कहा था कि चाहे वह मुस्लिम संस्था हो या हिंदू संस्था या ईसाई संस्था, उसमें उसी धर्म के लोग होने चाहिए. नवाब जान ने कहा, 'हम सब कुछ बर्दाश्त करेंगे, लेकिन देश की एकता को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे.'
मुसलमानों की भावनाओं पर ध्यान दें नायडू-नीतीश: जमीयत
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास लोकसभा में बहुमत नहीं है और केंद्र में उसकी सरकार टीडीपी और जनता दल (यू) जैसी अन्य पार्टियों के समर्थन पर निर्भर है. वक्फ (संशोधन) विधेयक के खिलाफ अपना अभियान तेज करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने रविवार को चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार से इस मामले पर मुसलमानों की भावनाओं पर ध्यान देने का आग्रह किया. जमीयत ने कहा कि एनडीए के भीतर धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करने वाली पार्टियों को इस खतरनाक कानून का समर्थन करने से खुद को दूर रखना चाहिए.
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अगस्त 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था वक्फ विधेयक
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर फिलहाल संसद की संयुक्त समिति में है और सभी हितधारकों से उनकी राय ली जा रही है. इस विधेयक को अगस्त, 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था और तीखी बहस के बाद संयुक्त संसदीय पैनल को भेजा गया था. सरकार ने प्रस्तावित कानून पर जोर देते हुए कहा था कि इसका इरादा मस्जिदों के कामकाज में हस्तक्षेप करने का नहीं है. वहीं विपक्ष ने केंद्र पर आरोप लगाया था कि वह वक्फ (संशोधन) कानून लाकर मुसलमानों को निशाना बनानी चाहती है और इस विधेयक को संविधान पर हमला बताया था.
जेपीसी की बैठक में वक्फ बिल पर पक्ष-विपक्ष के बीच घमासान
वक्फ (संशोधन) विधेयक पर गठित जेपीसी की बैठक के दौरान हाल फिलहाल में, अक्सर विपक्षी सदस्यों का गुस्सा बढ़ता देखा गया है. विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ऐसे संगठनों को चर्चा के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, जो हिंदू हितों के लिए काम करते हैं और उनका वक्फ मुद्दों से कोई लेना देना नहीं है. वहीं भाजपा सदस्य अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर जानबूझकर जेपीसी की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाते हैं.