
लद्दाख से लेकर तवांग (Tawang) तक... चीन हर बार सीमा पर विवाद करता है. चीनी सैनिक हमारे सैनिकों से संघर्ष करते हैं. पिछले दो वर्षों में कई बार चीन इस तरह की नापाक हरकत कर चुका है. कभी गलवान (Galwan) तो कभी तवांग. कभी सिक्किम तो कभी कहीं. कोविड में जब दुनिया संक्रमण से जूझ रही थी. तब भी चीन वायरस की तरह सीमा पर उलटी हरकतें कर रहा था.
साल 2020 में 5 मई को चीन के सैनिकों ने लद्दाख के पैंगॉन्ग लेक पर इंडियन आर्मी के जवानों से झड़प की. तब से यह सिलसिला चलता आ रहा है. आइए जानते हैं कि कब-कब चीन की चाल को फेलकर करके भारतीय सेना के बहादुर जवानों ने उन्हें धूल चटाई है. सबसे पहले आज की घटना. अरुणाचल के तवांग में सीमा पर चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों के साथ झड़प की. भारी मात्रा में आए चीनी सैनिकों को इंडियन आर्मी ने करारा जवाब दिया. हालांकि, इसमें दोनों तरफ से सैनिक घायल हुए हैं.
अरुणाचल प्रदेश के यांगत्से के करीब तवांग सेक्टर में अक्टूबर 2021 में भारतीय सैनिकों ने चीन के 200 सैनिकों को रोका था. चीनी सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सीमा में आए थे. असल में भारत-चीन सीमा का औपचारिक सीमांकन नहीं हुआ है. सीमा रेखा परसेप्शन पर आधारित है. इसमें अंतर भी है.
इसके पहले 30 अगस्त 2021 को चीन के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 100 सैनिक उत्तराखंड के बारहोती में एलएसी पार कर भारतीय सीमा में घुस आए थे. खबरें आईं कि ये सैनिक 4-5 KM अंदर आ गए थे. यहां तीन घंटे तक रहे. हालांकि इस बारे में भारत की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया.
पैंगॉन्ग लेक पर स्थित चुशुल सेक्टर पर चीनी हरकतें देखी गई थी. घटना 29-30 अगस्त 2020 की है. इससे पहले की चीन के सैनिक कोई मजबूती दिखाते, भारतीय सैनिकों ने ऊंचाई वाले हिस्सों से मोर्चा संभाल लिया था. भारतीय जवानों ने इन ऊंचाई वाले स्थानों पर कई दिनों तक मजबूती बनाए रखी. इसलिए चीनी सैनिक घुसपैठ नहीं कर पाए. हालांकि चीन ने ऐसी किसी घुसपैठ से मना कर दिया था. 3 सिंतबर 2020 को भी मीडिया में खबरें आईं कि भारतीय सैनिकों ने रेजांग ला, रेकिन ला, ब्लैक टॉप, हनान, हेलमेट, गुरुंग हिल, गोरखा हिल और मगर हिल पर कब्जा बना रखा है. ताकि चीनी कैंप पर सीधे नजर रखी हुई थी.
इससे पहले 15 जून 2020 को गलवान घाटी में संघर्ष हुआ था. पेट्रोल प्वाइंट 14 पर चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों के साथ छह घंटे तक झड़प की. कर्नल संतोष बाबू शहीद हुए लेकिन उन्होंने और उनके जवानों ने चीनी सैनिकों के टेंट उड़ा दिए. चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर कंटीलें तारों से लिपटे बल्ले से हमला किया. हाथापाई हुई. इस झड़प में करीब 600 लोग शामिल थे. चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर लोहे के रॉड आदि से हमला किया था. इस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हुए. खबर आई कि चीन के 43 सैनिक इस झड़प में मारे गए. लेकिन चीन की तरफ से इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई.
इससे करीब तीन हफ्ते पहले 21 मई 2020 को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की. उन्होंने भारतीय इलाके में बन रही सड़क का विरोध किया. यह सड़क डारबुक-श्योक डीबीओ रोड के नाम से जानी जाती है. फिर चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी के पास 70-80 टेंट लगा दिए. भारी वाहन तैनात कर दिए. इससे पहले रिपोर्ट आई थी कि चीनी सैनिकों ने हॉट स्प्रिंग्स, पेट्रोल प्वाइंट 14 और 15 पर एलएसी पार करके 2-3 किमी अंदर अपना कब्जा जमा लिया. इसके बाद भारतीय सैनिकों ने इन चीनी सैनिकों से 300 से 500 मीटर दूरी पर अपनी मौजूदगी बढ़ा दी.
इससे पहले 10 मई 2020 को सिक्किम के मुगुथांग और नाकू ला पर चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच छोटी झड़प हुई. दोनों तरफ से पत्थरबाजी की खबरें आईं. जिसमें दोनों तरफ के सैनिक घायल भी हुए. फिर भारतीय सेना के पूर्वी कमांड की तरफ से कहा गया कि स्थानीय स्तर पर बातचीत कर मामले को सुलझा लिया गया है.
इससे पांच दिन पहले 5 मई 2020 को लद्दाख के पैंगॉन्ग लेक पर चीनी सैनिकों और भारतीय जवानों के बीच संघर्ष हुआ. वीडियो सामने आया जिसमें झड़प होते दिख रहा था. 10 और 11 मई को फिर एक झड़प हुई. खबरें आईं कि इन दोनों घटनाओं में करीब 72 भारतीय सैनिक जख्मी हुए. मई और जून के महीने में चीन ने इस झील के आसपास 60 वर्ग किमी का भारतीय इलाका कैप्चर कर लिया. इसके बाद खबरें आईं कि 27 जून तक चीन ने पैंगॉन्ग लेक के उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर फिंगर-4 और 5 के पास अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा दी है. लेकिन कई राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य बातचीत के बाद चीनी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा.