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वो पांच बड़े मुकदमे जिनपर इस हफ्ते फैसला सुनाएगा SC, CJI चंद्रचूड़ ने की है सुनवाई

एक बड़ा मामला लाइट मोटर व्हीकल यानी एलएमवी लाइसेंस धारकों से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारक चालक 7,500 किलोग्राम तक के वजन वाले परिवहन वाहन चलाने का अधिकार है या नहीं है. इस मुद्दे पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने 21 अगस्त को सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

सुप्रीम कोर्ट इस हफ्ते पांच बड़े मुकदमों पर अपना फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट इस हफ्ते पांच बड़े मुकदमों पर अपना फैसला सुनाएगा
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष सुने गए पांच बड़े मुकदमों के निर्णय आने वाले हैं. इन सभी मुकदमों में संविधान पीठ की अगुआई खुद चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने की है. जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं. लिहाजा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे और राष्ट्रीय चरित्र की दलीलों पर भी निर्णय आना है. इसके अलावा अन्य बड़े मुकदमों में मदरसा कानून, सरकारी सेवाओं ने भर्ती के बाद नियमों में होने वाले बदलाव का असर, मोटर व्हीकल लाइसेंस को लेकर उठे सवाल, संपत्ति में बंटवारे के नियमों में बदलाव की गुहार वाले मामले भी सम्मिलित हैं.

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भर्ती के बाद नियमों में बदलाव का मामला

सरकारी सेवाओं में भर्ती हो जाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया के नियमों में बदलाव के असर पर सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों और शर्तों में बदलाव हो सकता है? अगर होता है तो उसका असर कब, कैसे और कहां-कहां होगा? इस मामले में संविधान पीठ ने 23 जुलाई को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह कानूनी सवाल राजस्थान हाईकोर्ट में अनुवादकों की नियुक्ति से उठा था.

एलएमवी लाइसेंस धारकों से जुड़ा केस

एक और बड़ा मामला लाइट मोटर व्हीकल यानी एलएमवी लाइसेंस धारकों से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारक चालक 7,500 किलोग्राम तक के वजन वाले परिवहन वाहन चलाने का अधिकार है या नहीं है. इस मुद्दे पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने 21 अगस्त को सुनवाई पूरी करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

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संपत्ति वितरण पर संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मामले पर आएगा फैसला

नौ जजों की संविधान पीठ को संपत्ति के वितरण पर उठे संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मामले में अपना निर्णय सुनाना है. मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 9 जजों की संविधान पीठ इस संवैधानिक सवाल पर फैसला सुनाएगी कि क्या सरकार को निजी संपत्ति अधिग्रहित कर उनका पुनर्वितरण करने का अधिकार है या नहीं. संविधान पीठ अनुच्छेद 39(बी) के प्रावधानों को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस अनुच्छेद में जनहित के लिए संपत्ति के पुनर्वितरण से संबंधित है.

मदरसा कानून की वैधता पर फैसला सुरक्षित

इन संवैधानिक मामलों के अलावा उत्तर प्रदेश में मदरसा कानून की वैधता पर उठे सवालों के मामले में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने अभी हाल ही में पिछले महीने उत्तर प्रदेश मदरसा अधिनियम की वैधता से जुड़े मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिसके तहत यूपी मदरसा अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया गया था. बच्चों को सरकारी स्कूलों में समायोजित करने का आदेश दिया था.

क्या एएमयू को मिलेगा अल्पसंख्यक का दर्जा?
 
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट इसी हफ्ते फैसला सुना सकता है. क्योंकि मामले की सुनवाई करने वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ के अगुआ चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं. इस मामले में सात जजों की पीठ ने आठ दिन सुनवाई कर एक फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था यानी नौ महीने बाद निर्णय आएगा.

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जे में रखे जाने पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने का कोई अर्थ नहीं है. गौरतलब है कि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी किसी भी शिक्षण संस्थान को अल्पसंख्यक दायरे में सीमित रखने की बजाय सबके लिए खुला रखने की बात कही थी.

सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलीलें दाखिल करते हुए मौजूदा एनडीए सरकार ने दस साल पहले की UPA सरकार के विपरीत रुख दिखाया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए दाखिल की गई अपनी दलील में केंद्र सरकार ने कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक का टैग न दिया जाए. ऐसा इसलिए क्योंकि AMU  का राष्ट्रीय चरित्र है. AMU किसी विशेष धर्म का विश्वविद्यालय नहीं हो सकता. क्योंकि यह हमेशा से राष्ट्रीय महत्व का विश्वविद्यालय रहा है.

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