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तिरुपति लड्डू विवाद: आंध्र प्रदेश ने रोकी SIT जांच, ये बताई वजह

आंध्र प्रदेश सरकार ने तिरुपति लड्डू विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के मद्देनजर विशेष जांच दल (SIT) जांच पर रोक लगा दी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 3 अक्टूबर को होगी. आंध्र के शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के मद्देनजर हमने फिलहाल जांच रोक दी है. हमारी टीम ने कई जगहों का निरीक्षण किया है, कुछ लोगों के बयान दर्ज किए हैं और मामले की शुरुआती  जांच की है.

आंध्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तक SIT जांच पर लगगाई रोक. आंध्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तक SIT जांच पर लगगाई रोक.
अपूर्वा जयचंद्रन
  • विजयवाड़ा,
  • 01 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 3:51 PM IST

आंध्र प्रदेश सरकार ने 3 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई तक तिरुपति के लड्डू बनाने में इस्तेमाल किए गए घी में कथित मिलावट की विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच रोक दी है.

आंध्र के शीर्ष पुलिस अधिकारी द्वारका तिरुमाला राव ने कहा कि जांच की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला "एहतियाती उपाय" के रूप में लिया गया था.

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उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के मद्देनजर हमने फिलहाल जांच रोक दी है. हमारी टीम ने कई जगहों का निरीक्षण किया है, कुछ लोगों के बयान दर्ज किए हैं और मामले की शुरुआती  जांच की है."

SIT ने आटा मिल का किया निरीक्षण

सोमवार को एसआईटी ने तिरुमाला में आटा मिल का निरीक्षण किया, जहां घी को लड्डू बनाने में इस्तेमाल करने से पहले संग्रहित किया जाता है, जिसे हर साल पहाड़ी मंदिर में आने वाले लाखों भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है.

सुप्रीम कोर्ट ने की अहम टिप्पणी

वहीं, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी, राज्यसभा सांसद और टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी और इतिहासकार विक्रम संपत और आध्यात्मिक प्रवचन वक्ता दुष्यंत श्रीधर द्वारा दायर की गई तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि कम से कम भगवान को राजनीति से दूर रखें. जस्टिस भूषण आर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच के समक्ष सुब्रमण्यन स्वामी के वकील ने कहा कि निर्माण सामग्री बिना जांच के रसोई घर में जा रही थी. जांच से खुलासा हुआ. इसके सुपरविजन के लिए सिस्टम को जिम्मेदार होना चाहिए क्योंकि ये देवता का प्रसाद होता हैस जनता और श्रद्धालुओं के लिए वो परम पवित्र है.

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जस्टिस बीआर गवई ने आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी के सवाल का जवाब देते हुए कहा, "जब आप संवैधानिक पद पर होते हैं तो आपसे यह उम्मीद की जाती है कि देवताओं को राजनीति से दूर रखा जाएगा."

कोर्ट ने रोहतगी से यह भी पूछा, "आपने एसआईटी के लिए आदेश दिया, नतीजा आने तक प्रेस में जाने की क्या जरूरत है? आप हमेशा से ही ऐसे मामलों में पेश होते रहे हैं, यह दूसरी बार है."

सीएम के बयान पर कोर्ट ने जताया एतराज

बता दें कि चंद्रबाबू नायडू ने एक लैब जांच रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाया है कि तिरुमला तिरुपति वेंकटेश्वर स्वामी बालाजी मंदिर के प्रसाद में प्रयुक्त कथित शुद्ध देसी घी में पशुओं के मांस और अन्य सड़े हुए पदार्थों की मिलावट की गई है. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने एतराज जताया है. कोर्ट ने कहा कि जब घी में जानवर की चर्बी मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी और मामले की जांच चल रही थी तो इसे मीडिया में ले जाने की क्या जरूरत थी. कोर्ट ने कहा कि जब तक आप खुद इस मामले में कंफर्म नहीं थे तो फिर इसपर सार्वजनिक बयान क्यों दिया.

क्या है मामला

बीते दिनों आंध्र के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि जगन मोहन रेड्डी की पिछली सरकार के दौरान तिरुपति मंदिर में प्रसाद के रूप में परोसे जाने वाले लड्डू में एनिमल फैट सहित घटिया सामग्री पाई गई थी.

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गुजरात की एक निजी लैब की रिपोर्ट का हवाला देते हुए नायडू ने घी में 'बीफ टैलो', 'लार्ड' (सूअर की चर्बी से संबंधित) और मछली के तेल की मौजूदगी का आरोप लगाया. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि उनके शासन में कोई उल्लंघन नहीं हुआ. रेड्डी ने नायडू पर 'भगवान के नाम पर राजनीति' करने का भी आरोप लगाया और मुख्यमंत्री को 'एक रोगग्रस्त और आदतन झूठा' कहा.

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