
राज्यसभा में टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन के बयान ने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A.के सभी सहयोगियों की टेंशन बढ़ा दी है. सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा में 11.13 बजे डेरेक ने बिना किसी को बताए अपनी मर्ज़ी से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कर दी, जबकि विपक्ष लगातार नियम 267 के तहत चर्चा करने के लिए अड़ा हुआ है. इसके बाद चेयरमैन ने भी चर्चा के लिए ज़्यादा वक़्त देने की बात कही और पीयूष गोयल ने डेरेक का धन्यवाद भी कर दिया. हालांकि डेरेक की बात सुनकर सहयोगी मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई विपक्षी नेता हैरत में पड़ गए.
मणिपुर हिंसा पर बहस को लेकर राज्यसभा की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है, क्योंकि विपक्षी दल इस बात पर जोर दे रहे हैं कि नियम 267 के तहत मणिपुर पर चर्चा की जानी चाहिए. जबकि सरकार अपनी ओर से राज्यसभा के नियम 176 के तहत अल्पकालिक चर्चा करना चाहती है. सदन में सूचीबद्ध कागजात पेश किए जाने के बाद सभापति ने कहा कि उन्हें मणिपुर मुद्दे पर नियम 267 के तहत 37 नोटिस मिले हैं, लेकिन उन्होंने किसी को भी स्वीकार नहीं किया है.
मणिपुर मुद्दे पर 6 से 8 घंटे तक चर्चा की जाए
वरिष्ठ टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि लोग मणिपुर मुद्दे पर सुनना चाहते हैं और विपक्षी दल इस पर चर्चा करना चाहते हैं. उन्होंने गतिरोध खत्म करने के लिए समाधान खोजने का मजबूत पक्ष रखा. टीएमसी नेता ने यह भी सुझाव दिया कि मणिपुर मुद्दे पर 6 से 8 घंटे की चर्चा की जाए. सभापति ने टीएमसी नेता के सुझाव पर सदन के नेता पीयूष गोयल की राय मांगी.
पीयूष गोयल बोले- सरकार बहस के लिए तैयार
पीयूष गोयल ने कहा कि वह बहस के लिए तत्परता दिखाने के लिए टीएमसी नेता के आभारी हैं. उन्होंने कहा कि मणिपुर हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है और इस बात पर जोर दिया कि राज्य में सुधार लाने के लिए सभी को सामूहिक रूप से काम करना होगा. गोयल ने सुझाव दिया कि नेता चाय पर मिल सकते हैं और सदन के सुचारू कामकाज के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार मणिपुर पर बहस की इच्छुक है.
धनखड़ ने नेताओं से मांगे सुझाव
सभापति धनखड़ ने जब आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए सदन के नेताओं को आमंत्रित कर इस मुद्दे पर उनके विचार मांगे, तो विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नियम 267 को किसी भी अन्य नियम की तुलना में प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन आश्चर्य है कि सरकार ने नियम 267 के तहत चर्चा के लिए सहमत न होकर इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा क्यों बना दिया है. खड़गे ने कहा कि आप एक छोटा सा सुझाव भी नहीं मान रहे हैं. आप प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग भी नहीं मान रहे हैं. आप प्रधानमंत्री का इतना बचाव क्यों कर रहे हैं? मैं समझ नहीं पा रहा हूं. धनखड़ ने खड़गे की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि वह किसी का बचाव नहीं कर रहे. मुझे दक्षिणपंथ का बचाव करने की आवश्यकता नहीं है, मुझे वामपंथ का बचाव करने की भी जरूरत नहीं है. मुझे संविधान की रक्षा करना है.