
संसद के भीतर से हंगामा, शोरगुल, नारेबाजी, मिर्ची पाउडर का स्प्रे, मेज पर चढ़ना, कागज फाड़कर उड़ाना जैसी संसदीय लोकतंत्र को शर्मसार करती सियासी तस्वीरें तभी आती रही हैं, जब संसद का कोई सत्र चल रहा हो. लेकिन अबकी बार बिना सत्र चले ही दो सांसदों के बीच ऐसी तू-तू-मैं-मैं और जुबानी झड़प हुई कि हाथ से खून तक बहने लगा. दिसंबर 2023 में संसद से सस्पेंड हुए सांसदों के समर्थन में उपराष्ट्रपति की अपमानजनक मिमिक्री करते टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी दिखे थे.
विवादों से नाता लंबा रखने वाले कल्याण बनर्जी संसद सत्र चलने के दौरान भी सुर्खियों में रहे. ममता बनर्जी के वफादार और चार बार के सांसद कल्याण बनर्जी जब संसद में बोलते हैं तो वायरल हो जाते हैं. लेकिन अबकी बार बयानों से चुभते हुए वार करने वाले कल्याण बनर्जी ने ऐसा कुछ कर दिया, जहां घाव टीएमसी सांसद के हाथ में ही हो गया. जिनका हाथ संभाले ओवैसी चलते और संजय सिंह दिलासा देते दिखे.
दरअसल, मंगलवार को वक्फ बिल के लिए बनी जेपीसी की बैठक के दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय में बड़ी झड़प हुई. दावा ये है कि बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली जेपीसी में रिटायर्ड जज और वकीलों की राय सुनी जा रही थी. तभी बीच में टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी, जो पहले ही कई बार बोल चुके थे, फिर से टोकते हुए बीच में बोलने लगे. सूत्र कहते हैं कि कल्याण बनर्जी की तरफ से बीच में टोकाटाकी का विरोध पश्चिम बंगाल से ही आने वाले बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय ने किया. दावा है कि इसी के बाद दोनों सांसदों के बीच जमकर असंसदीय भाषा में तू-तू-मैं-मैं होने लगी.
कल्याण बनर्जी जेपीसी की बैठक से सस्पेंड
दावा है कि अपने सामने रखी कांच की बोतल को सांसद कल्याण बनर्जी ने पटक दिया. जिसमें उनके ही हाथ में चोट लगी. जेपीसी चेयरमैन जगदंबिका पाल का तो दावा है कि कल्याण बनर्जी ने इसके बाद टूटी हुई बोतल उनकी कुर्सी की तरफ भी फेंकी. हंगामे के बाद जेपीसी की बैठक में कल्याण बनर्जी पर कार्रवाई करते हुए उन्हें अगली बैठक से सस्पेंड करने पर सहमति बनी. यानी वह अगली जेपीसी की बैठक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे.
देश में वक्फ बोर्ड के पास 9 लाख एकड़ से अधिक जमीन
वक्फ बिल पर ये हाल तब है जब अभी सिर्फ जेपीसी के तय सांसदों के बीच बैठक हो रही है. सोचिए क्या ये हंगामा और ज्यादा होगा जब वापस संसद में ये बिल सदन में आएगा. आखिर वक्फ संशोधन बिल में क्या है, ये समझें उससे पहले वक्फ की संपत्ति का हिसाब देखना जरूरी है. दरअसल, दिल्ली कुल 3.6 लाख एकड़ इलाके में फैली हुई है. और देश में वक्फ बोर्ड के पास नौ लाख एकड़ से ज्यादा जमीन बताई जाती है. यानी अकेले वक्फ बोर्ड के पास ही तीन दिल्ली जितनी जमीन है. वहीं गोवा जैसा राज्य 9.14 लाख एकड़ में फैला है. यानी देश में वक्फ के पास गोवा जितनी जमीन है.
भारत में जमीन के हिसाब से ही अगर वक्फ की जमीन को और बांटकर देखें तो दिल्ली, दादर नगर हवेली, पुटुचेरी, चंडीगढ़, लक्षद्वीप इन सबके पास कुल जितनी जमीन है, उतनी अकेले देश में वक्फ बोर्ड के पास है. देश में रेलवे और सेना के बाद वक्फ बोर्ड के पास ही सबसे ज्यादा जमीन है. कहने को तो इस जमीन और वक्फ की अरबों की संपत्ति और इस प्रॉपर्टी से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल शैक्षणिक संस्थाओं, कब्रिस्तानों, मस्जिदों में धर्मार्थ और अनाथालयों में खर्च किया जाता है और होना चाहिए. लेकिन आरोप लगते आए हैं कि वक्फ की संपत्ति के नाम पर भूमाफिया, सियासतदां और प्रॉपर्टी बिल्डर बड़े खेल करते हैं.
वक्फ बिल में हुए ये बदलाव
इससे आम मुस्लिम, गरीब मुस्लिम का कोई फायदा नहीं होता. क्योंकि वक्फ बोर्ड के पास इतने असीमित अधिकार पहले से सियासी तुष्टिकरण की आ़ड़ में दिए गए जितने दूसरे मुस्लिम देशों में भी नहीं होते. इसीलिए सरकार कहती है कि जनता के हित में वक्फ एक्ट में संशोधन वाला बिल आया, जिस पर जेपीसी में चर्चा चल रही है. अब तक के कानून और नए बिल के प्रावधान की तुलना करें तो पहले जहां वक्फ बोर्ड अगर किसी जमीन पर दावा कर दें तो जमीन वाला सिर्फ वक्फ के ट्रिब्यूनल में ही न्याय के लिए जा सकता था. वहीं नए बिल के अनुसार उसे ट्रिब्यूनल के अलावा रेवेन्यू कोर्ट, सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट में अपील का अधिकार होगा.
अब तक जहां वक्फ बोर्ड और दूसरे के बीच विवाद में वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को ही आखिरी फैसला माना जाता रहा. वहां नए बिल में ट्रिब्यूनल के पैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जाने का अधिकार होगा. तीसरी बात अब तक जहां पुरानी मस्जिद हो या जमीन/प्रॉपर्टी का इस्तेमाल इस्लामिक मकसद से होता आया हो तो अपने आप वो जमीन प्रॉपर्टी वक्फ की मान ली जाती थी. लेकिन नए बिल में कहा गया कि भाई जब कोई अपनी जमीन प्रॉपर्टी दान करेगा तभी उसे वक्फ का माना जाएगा, भले उस पर मस्जिद ही क्यों ना हो. चौथी अहम बात अब तक जहां वक्फ बोर्ड में महिला और दूसरे धर्म के लोगों की एंट्री पर पाबंदी रही.
वहीं अब नए बिल में कहा गया कि वक्फ बोर्ड में दो महिला और अन्य धर्म के दो लोगों भी होंगे. इसी के बाद लोकसभा में पहले अगस्त के महीने में हंगामे के बीच बिल पेश हुआ और अब अक्टूबर में इसी बिल पर गठित जेपीसी की चर्चा में जुबानी नोंकझोंक बीजेपी और टीएमसी के सांसद में हो गई.