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'बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे ना हों, ट्रैक्टर-ट्रॉली हाइवे पर ना आएं,' किसान आंदोलन पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि कहीं भी लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा न हों. कोर्ट ने कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन यह उचित प्रतिबंधों के अधीन है.

किसान आंदोलन (क्रेडिट: पीटीआई, फाइल फोटो) किसान आंदोलन (क्रेडिट: पीटीआई, फाइल फोटो)
नलिनी शर्मा/संजय कुमार
  • चंडीगढ़ ,
  • 20 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) का हवाला देते हुए किसानों से कहा है कि आप हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर नहीं जा सकते हैं. किसानों द्वारा बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर दिल्ली कूच करने पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आप ट्रॉलियों पर अमृतसर से दिल्ली तक यात्रा करना चाह रहे हैं. हर नागरिक अपने मौलिक अधिकारों को जानता है, लेकिन कुछ संवैधानिक कर्तव्य भी हैं जिनका पालन करना आवश्यक है. 

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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा है कि यह सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि लोग कहीं भी बड़ी संख्या में इकट्ठा न हों. कोर्ट ने कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन यह उचित प्रतिबंधों के अधीन है. कोर्ट ने सुनवाई को फिलहाल अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया है. 

केंद्र ने कोर्ट को क्या बताया?

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि किसानों के साथ बैठकें हो चुकी हैं. इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार और किसानों के बीच हुई बैठक में क्या हुआ, इसका विवरण कोर्ट को देने को कहा. कोर्ट ने केंद्र ने इस मामले में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है. हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जीएस संधवालिया और जस्टिस लपीता बनर्जी की पीठ ने केंद्र से किसानों के साथ हुई बैठकों में क्या हुआ, इसका विवरण देते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करने को कहा है.  अब मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी. 

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दिल्ली कूच को अड़े किसान

आपको बता दें कि किसान बड़ी संख्या में  ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर दिल्ली कूच करने पर अड़े हैं और इसे लेकर पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस और किसानों के बीच लगातार झड़प की खबरें भी आती रही है. हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन के लिए उचित स्थानों की पहचान की गई है. इसके अलावा बैठकों की भी व्यवस्था की गई है. केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि किसानों के साथ कई बैठकें हो चुकीं हैं लेकिन इनकी कई मांगें अव्यावहारिक हैं. सरकार ने कहा कि अगर कोर्ट चाहे तो तो वो इसके बारे में भी जानकारी देने को राजी हैं.  

खारिज किया एमएसपी पर सरकार का प्रस्ताव 

इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार के एमएसपी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. केंद्र सरकार की तरफ से कथित रूप से एमएसपी पर पांच साल के कॉन्ट्रेक्ट का प्रस्ताव दिया गया था. किसानों का कहना था कि मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर उन्हें पता चला है कि केंद्र सरकार A2+FL+50% के आधार पर एमएसपी पर अध्यादेश लाने की योजना बना रही है. जिसके बाद किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा था कि उन्हें C2+50% से नीचे कुछ भी स्वीकार नहीं है. किसान मोर्चा ने एक बयान में कहा कि बीजेपी ने खुद 2014 के चुनाव में अपने घोषणापत्र में इसका वादा किया था. 

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किसानों की केंद्र सरकार से मांगें

एसकेएम ने केंद्रीय मंत्रियों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि मोदी सरकार ऋण माफी, बिजली का निजीकरण नहीं करने, सार्वजनिक क्षेत्र की फसल बीमा योजना, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को 10000 रुपये मासिक पेंशन, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की भी मांग की है.

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