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ट्रंप के टैरिफ का क्या होगा असर, बाकी देशों से भारत की स्थिति कैसे बेहतर? पढ़ें हर सवाल का जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले को समझने के लिए कुछ सवाल और उनके जवाब तैयार किए हैं. इससे ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए 26 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ और उससे होने वाले असर के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की जा सकती है. 

ट्रंप ने कई देशों पर फोड़ा टैरिफ बम ट्रंप ने कई देशों पर फोड़ा टैरिफ बम
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 7:39 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दुनिया के कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. अब अमेरिकी बाजारों में जाने वाले भारतीय सामान पर 27 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ या इंपोर्ट ड्यूटी लगाने की घोषणा की गई है. इंडस्ट्री सेक्टर और एक्सपर्ट का मानना है कि ये टैरिफ भारतीय सामानों के लिए चुनौतियां पैदा करेंगे, लेकिन भारत की स्थिति अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में फिर भी बेहतर बनी हुई है.

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इन मुद्दों और ट्रंप के फैसले को समझाने के लिए सवाल और जवाब की एक लिस्ट तैयार की गई है. इससे ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए 26 फीसदी टैरिफ और उससे होने वाले असर के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की जा सकती है. 

सवाल: टैरिफ क्या हैं?
जवाब: ये कस्टम ड्यूटी या इंपोर्ट डयूटी हैं जो सामानों के आयात पर लगाए जाते हैं. आयातक देश की सरकार को यह ड्यूटी चुकानी होता है. आम तौर पर कंपनियां इस टैक्स का बोझ आखिरी उपभोगकर्ता पर डालती हैं.

सवाल: रेसिप्रोकल टैरिफ क्या हैं?
जवाब: ये टैक्स किसी देश की ओर से अपने व्यापारिक साझेदारों पर ड्यूटी बढ़ाने या हाई टैरिफ का मुकाबला करने के लिए लगाए जाते हैं. एक तरह से टिट फॉर टैट टैक्स, मतलब जैसे को तैसा.

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सवाल: अमेरिका ने भारत पर कितना टैरिफ लगाया है?
जवाब: भारत से आने वाले सामान जैसे स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पर पहले से 25 फीसदी टैरिफ लगाया जा रहा है. बाकी प्रोडक्ट के लिए, भारत पर 5 से 8 अप्रैल के बीच 10 फीसदी के बेस लाइन टैरिफ लागू हैं. इसके बाद 9 अप्रैल से यह टैरिफ बढ़कर भारत के लिए 27 फीसदी हो जाएगा. अमेरिका के इस फैसले का असर 60 से ज्यादा देशों पर हुआ है.

सवाल: अमेरिका ने इन टैरिफों की घोषणा क्यों की है?
जवाब: अमेरिका के मुताबिक इन टैक्स के जरिए देश में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार घाटे में कमी आएगी. अमेरिका को फिलहाल कई देशों के साथ, खासकर चीन के साथ भारी व्यापार असंतुलन का सामना करना पड़ रहा है. 2023-24 में भारत के साथ वस्तुओं के मामले में अमेरिका को 35.31 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा हुआ है.

सवाल: कौन से सेक्टर इन टैरिफ से बाहर हैं?
जवाब: थिंक टैंक GTRI के विश्लेषण के मुताबिक इनमें फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर, कॉपर जैसे जरूरी और रणनीतिक सामान के अलावा तेल, गैस, कोयला और एलएनजी जैसे ऊर्जा उत्पाद शामिल हैं.

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सवाल: इन टैरिफ का भारत पर क्या असर होगा?
जवाब: एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका की ओर से लगाए गए 27 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के असर का विश्लेषण कर रहा है. हालांकि यह भारत के लिए कोई झटका नहीं है. FIEO ने कहा कि भारतीय कंपनियों के लिए ये टैरिफ चुनौतियां पेश करते हैं लेकिन भारत की स्थिति अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर बनी हुई है. निर्यातक संगठन के मुताबिक भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता घरेलू उद्योग को इन टैरिफ के असर से उबरने में मदद करेगा.

GTRI ने कहा कि कुल मिलाकर अमेरिका की टैरिफ व्यवस्था भारत के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन का फायदा उठाने में मददगार साबित हो सकती है. हालांकि, इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को व्यापार करने में आसानी बढ़ानी होगी, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे में निवेश करना होगा और नीतियों के स्तर पर स्थिरता बनाए रखनी होगी.

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सवाल: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता क्या है?
जवाब: फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के मकसद से इस समझौते पर बातचीत की घोषणा की थी. उनका लक्ष्य इस साल के सितंबर-अक्टूबर तक इस समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देना है.

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सवाल: व्यापार समझौता क्या होता है?
जवाब: ऐसे समझौते में दो व्यापारिक साझेदार या तो कस्टम ड्यूटी को काफी हद तक कम कर देते हैं या उनके बीच व्यापार की अधिकतम संख्या पर उसे खत्म कर देते हैं. वे सेवाओं और निवेश में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नियमों को भी आसान बनाते हैं.

सवाल: अमेरिका ने भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पर कितना टैरिफ लगाया है?
जवाब: चीन पर 54 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत और थाईलैंड पर 36 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है.

सवाल: क्या ये रेसिप्रोकल टैरिफ WTO के मुताबिक हैं?
जवाब: इंटरनेशन ट्रेड एक्सपर्ट अभिजीत दास के अनुसार, ये टैरिफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का साफ तौर पर उल्लंघन करते हैं. उन्होंने कहा कि यह MFN (सबसे पसंदीदा राष्ट्र) दायित्वों और तय दरों का भी उल्लंघन है और WTO के सदस्य देश को संस्था के पास शिकायत लेकर जाने का पूरा अधिकार है.

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सवाल: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार कितना है?
जवाब: 2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था. भारत के कुल माल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है. अमेरिका के साथ भारत का 2023-24 में गुड्स के मामले में ट्रेड सरप्लस (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) 35.32 बिलियन अमेरिकी डॉलर था. यह 2022-23 में 27.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर, 2021-22 में 32.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर, 2020-21 में 22.73 बिलियन अमेरिकी डॉलर और 2019-20 में 17.26 बिलियन अमेरिकी डॉलर था.

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साल 2024 में भारत की ओर से अमेरिका को किए जाने वाले प्रमुख एक्सपोर्ट में ड्रग फॉर्म्युलेशन और बायोलॉजिकल (8.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर), टेलीकॉप उपकरण (6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर), कीमती पत्थर (5.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर), सोना और अन्य कीमती धातु के आभूषण (3.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर), सूती तैयार वस्त्र (2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) लोहा और इस्पात के उत्पाद (2.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर) शामिल हैं.

आयात में कच्चा तेल (4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर), कोयला, कोक (3.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर), कटे और पॉलिश किए गए हीरे (2.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर), इलेक्ट्रिक मशीनरी (1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर), विमान, अंतरिक्ष यान और पुर्जे (1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर) और सोना (1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर) शामिल है.

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