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'हम नोट्स शेयर करते थे, साथ में रील्स बनाते थे...', क्या बोलीं उडुपी वॉशरूम केस की तीनों आरोपी छात्राएं

उडुपी वॉशरूम केस की आरोपी छात्राओं ने मीडिया बातचीत में पूरे मामले को झूठा करार दिया है. छात्राओं की ओर से कहा गया कि उन्होंने ऐसा कोई वीडियो नहीं शूट किया है जो किसी भी लड़की की निजता को नुकसान पहुंचाता हो. उन्होंने कहा कि यह सबकुछ झूठ है और हमारे ऊपर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं.

वॉशरूम कांड के विरोध में बेंगलुरु में भाजपा महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं ने किया था प्रदर्शन (फाइल फोटो) वॉशरूम कांड के विरोध में बेंगलुरु में भाजपा महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं ने किया था प्रदर्शन (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 6:57 AM IST

उडुपी के एक कॉलेज में हुए वॉशरूम कांड के मामले पर चर्चाओं का बाजार गर्म है. राज्य सरकार ने इस केस की जांच अभी हाल ही में CID को सौंपी है. इस मामले में तीनों आरोपियों लड़कियों से इंडिया टुडे की टीम ने बात की, जिसमें उन्होंने पूरे मामले को झूठा करार दिया है. बातचीत में अपना पक्ष रखते हुए आरोपी लड़कियों ने कहा कि, उन्होंने कोई आपत्तिजनक वीडियो शूट नहीं किया था, न ही किसी तक पहुंचाया था. उन्होंने कहा, शिक्षा हमारे लिए सबसे जरूरी है, और हम ऐसी किसी भी अनैतिकता में नहीं शामिल थे.

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'ऐसा कोई वीडियो शूट नहीं हुआ'
उडुपी वॉशरूम केस में अपना पक्ष रखते हुए आरोपी लड़कियों से पूछा गया कि इस घटना में आप पर कई आरोप लगे हैं, उनका सच क्या है, हमें कहानी का अपना पक्ष बताएं. इस पर छात्राओं की ओर से कहा गया कि उन्होंने ऐसा कोई वीडियो नहीं शूट किया है जो किसी भी लड़की की निजता को नुकसान पहुंचाता हो. उन्होंने कहा कि यह सबकुछ झूठ है और हमारे ऊपर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं. कथित तौर पर जिस पीड़िता लड़की की वीडियो बनाए जाने की बात सामने आई है, उसके साथ कैसे संबंध थे, क्या वह भी दोस्त है? इसके जवाब में आरोपी छात्राओं ने कहा कि, हम सभी बहुत करीबी थे और हम साथ में रील बनाते थे, डांस करते थे. हम अच्छे दोस्त थे.

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हमारे बीच अच्छी दोस्ती थी, 
उन्होंने कहा कि 'हमारा ऐसा कोई भी गलत इरादा नहीं था, दोस्ती में कोई धर्म नहीं होता. हम अच्छे से घुलमिल जाते थे. हम नोट्स शेयर करते थे,  लंच टाइम में जोक्स सुनते-सुनाते थे. हम साथ मिलकर रील्स भी बनाया करते थे. उन्होंने दोहराया कि हमारे बीच अच्छी दोस्ती थी. हम बहुत करीब थे. 

'पहले ही क्यों नहीं कार्रवाई'
उनसे पूछा गया कि ऐसी भी बातें सामने आई हैं कि लंच टाइम के दौरान कोई शख्स बाहर से आता था और फोन ले जाता था. उन्होंने कहा कि 'ऐसा कुछ भी नहीं. हमारा बाहर के लड़कों से कोई संपर्क नहीं था. कोई भी कॉलेज आकर फोन नहीं लेता था. उन्होंने कहा कि, एक तो कॉलेज में किसी को भी आने की इजाजत नहीं है. हमने सोशल मीडिया पर वायरल हुआ कोई वीडियो शूट नहीं किया है. छात्राओं ने सवाल भी उठाया कि कुछ लोग कह रहे हैं कि हम पिछले एक साल से ऐसा करते थे. फिर उन्होंने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की? 6 महीने पहले ही कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? अगर हमने सच में वॉशरूम में लड़कियों के वीडियो शूट किए होते तो उन्हें पहले ही हम पर कार्रवाई करनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि, बिना सबूत के, वे कैसे कह सकते हैं कि हम वीडियो लाइव कर रहे हैं?

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जब छात्राओं से पूछा गया कि इस तरह की छवि बनाए जाने और मानसिक तनाव से गुजरने के बाद क्या सोचती हैं, आगे क्या सोचा है. आप तीनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है? छात्राओं ने कहा कि  शिक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने इस वाकये को मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास बताया है. छात्राओं ने कहा कि, दोस्ती में कोई धर्म नहीं होता है. 

18 जुलाई को हुई थी घटना
बता दें कि ये घटना बीते महीने 18 जुलाई को हुई और मामले में 25 जुलाई को FIR दर्ज की गई थी. पुलिस सूत्रों ने बताया था कि उडुपी में एक पैरामेडिकल कॉलेज की तीन छात्राओं के खिलाफ कॉलेज के वॉशरूम में अपनी साथी छात्रा के वीडियो की कथित रिकॉर्डिंग को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. एफआईआर उडुपी के मालपे पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी. FIR में तीन छात्राओं शबनाज, अल्फिया और अलीमा का नाम शामिल है. एफआईआर में कॉलेज प्रशासन का भी नाम था. मामले को आईटी अधिनियम की धारा 509, 204, 175, 34 और 66 (ई) के तहत दर्ज किया गया था.

उडुपी कॉलेज मामले अब तक क्या-क्या हुआ?
18 जुलाई

मुस्लिम समुदाय की 3 लड़कियों पर एक हिंदू समुदाय की लड़की का वीडियो रिकॉर्ड करने का आरोप लगा. छात्रा गर्ल्स टॉयलेट में थी. एफआईआर के मुताबिक, हिंदू लड़की ने वीडियो डिलीट कर दिया.

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19 जुलाई
लड़की ने इस घटना की शिकायत कॉलेज स्टाफ से की और मामला फैलते ही, तीनों आरोपी छात्राओं को निलंबित कर दिया गया.

26 जुलाई
तीनों आरोपी लड़कियों के खिलाफ मालपे पुलिस स्टेशन में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया गया है. स्वत: संज्ञान शिकायत में कहा गया है कि 3 लड़कियां वॉशरूम में किसी अन्य छात्रा की वीडियो बनाना चाहती थीं, लेकिन गलती से इस छात्रा की वीडियो शूट हो गई. दोनों ही लड़कियां हिंदू समुदाय की हैं. 

उधर, मालपे पुलिस ने घटना पर फर्जी खबर और गलत जानकारी फैलाने के लिए कालू सिंह चौहान नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ एक और स्वत: संज्ञान मामला दर्ज किया था. उन्होंने कथित तौर पर सच्चाई की पुष्टि किए बिना इस घटना से संबंधित एक वीडियो को वन इंडिया कन्नड़ यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था. 

26 जुलाई
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य खुशबू सुंदर दिल्ली से उडुपी पहुंचीं. स्थिति का जायजा लेने के लिए उडुपी एसपी से मुलाकात की.

27 जुलाईः खुशबू कॉलेज एडमिन से मिली

28 जुलाई
कृषि राज्य मंत्री शोबा करंदलाजे ने उडुपी का दौरा किया. नेत्र ज्योति कॉलेज की लड़कियों ने उन्हें बताया कि यह रिकॉर्डिंग एक साल से अधिक समय से चल रही है. शोबा का कहना है कि पहले भी 3 अन्य लड़कियों के साथ ऐसा हो चुका है. तीनों आरोपी लड़कियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की.

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28 जुलाईः 3 लड़कियों की अग्रिम जमानत मंजूर

4 अगस्त
उडुपी शौचालय मामले की एसआईटी जांच के लिए भाजपा ने राज्यपाल को पत्र लिखा और कहा कि, पीड़ित हिंदू हैं और आरोपी दूसरे धर्म के हैं. राज्य में व्यापक विरोध के बाद भी, सरकार मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है. इसलिए मामले की एसआईटी जांच की जरूरत है.

7 अगस्तः मामला सीआइडी को सौंपा गया

9 और 10 अगस्तः सीआईडी ​​अधिकारी तीनों आरोपी लड़कियों से मिले और उनका बयान लिखा.

 

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