
हर साल 16 दिसंबर को भारत विजय दिवस मनाता है. यह दिन 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना की जीत और बांग्लादेश की आजादी को याद करने के लिए समर्पित है. इस समारोह में बांग्लादेश के मुक्ति योद्धाओं को आमंत्रित किया जाता है, लेकिन इस साल उनकी भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
सूत्रों के अनुसार, इस साल कोलकाता में होने वाले विजय दिवस समारोह में अब तक मुक्ति योद्धाओं की उपस्थिति का कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है. जब सेना के अधिकारियों से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हम जानकारी देंगे,' लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है.
यह भी पढ़ें: दरभंगा में बांग्लादेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा
मुक्ति योद्धा, जिन्हें 'मुक्ति वाहिनी' भी कहा जाता है, बांग्लादेश के नागरिकों, सेना और अर्धसैनिक बलों का एक गुरिल्ला समूह था. इन योद्धाओं ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध लड़ा और भारतीय सेना को बांग्लादेश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण मदद की.
पिछले 50 वर्षों से, मुक्ति योद्धाओं और बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल कोलकाता में विजय दिवस समारोह का हिस्सा बनते आ रहे हैं. उनका इस समारोह में शामिल होना भारत और बांग्लादेश के बीच दोस्ती और इतिहास को याद करने का प्रतीक माना जाता है.
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश हिंसा: BJP सांसद ने नोबेल कमेटी को लिखा पत्र, मुहम्मद यूनुस को लेकर की ये मांग
हालांकि, इस साल के कार्यक्रम की सूची में अब तक उनकी भागीदारी शामिल नहीं है. भारतीय सेना ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. यह देखा जाना बाकी है कि क्या मुक्ति योद्धा इस बार भी समारोह का हिस्सा बनेंगे या नहीं.
बता दें कि बांग्लादेश में इसी साल पांच अगस्त को हुए तख़्तापलट के बाद से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में हैं. उन्हें इस तख्तापलट के बीच पद से इस्तीफा देकर देश छोड़कर भागने को मजबूर होना पड़ा था. इसके बाद बांग्लादेश की एक अंतरिम सरकार बनाई गई जिसका मुखिय मोहम्मद यूनुस को बनाया गया.