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'चरण रज के चक्कर में इतना बड़ा हादसा हो गया, गुनहगारों पर हो सख्त एक्शन', हाथरस कांड पर बोलीं यूपी गवर्नर आनंदीबेन पटेल

उत्तर प्रदेश के हाथरस में 2 जुलाई को सत्संग के दौरान भगदड़ होने से बड़ा हादसा हो गया था. इस दौरान सौ से ज्याद लोगों की मौत हो गई थी.

आनंदीबेन पटेल (फाइल फोटो) आनंदीबेन पटेल (फाइल फोटो)
राजेश सिंघल
  • लखनऊ,
  • 19 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) ने हाथरस 'भोलो बाबा' के सत्संग के दौरान हुए हादसे पर बयान दिया है. उन्होंने कहा, "चरण रज के चक्कर में इतना बड़ा हादसा हो गया. इस तरह के अंधविश्वास में लोगों को नहीं पड़ना चाहिए था. इस तरह का भ्रम फैलाने को मैं गुनाह की श्रेणी देती हूं. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए.

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यूपी के हाथरस में 2 जुलाई को सत्संग के दौरान भगदड़ होने से बड़ा हादसा हो गया था. इस दौरान सौ से ज्याद लोगों की मौत हो गई थी. सत्संग 'भोलो बाबा' नाम के शख्स के द्वारा किया जा रहा था, जिसमें दूर-दूर से आए हुए लाखों लोगों ने हिस्सा लिया था. हादसे के बाद बाबा फरार हो गया. 

हादसे के बाद स्वयंभू संत नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी. नारायण साकार ने कहा कि वो इस घटना के बाद से बहुत परेशान चल रहे हैं लेकिन होनी को कोई नहीं टाल सकता. जो इस धरती पर आया है, उसे जाना ही है.

कौन है भोले बाबा?

यूपी के एटा जिले के बहादुर नगर गांव में जन्मे बाबा साकार हरि का असली नाम सूरजपाल सिंह जाटव है. सत्संग मार्ग में आने से पहले सूरजपाल इटावा पुलिस में पदस्थ था. नौकरी के दौरान साल 1997 में बाबा के ऊपर यौन शौषण की एफआईआर भी दर्ज हुई थी. लेकिन जेल से छूटने के बाद वह साकार विश्व हरि बाबा बनकर सत्संग करने लगा. 

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सूरजपाल जाटव उर्फ भोले बाबा के उपर अब तक 5 मुकदमे चल रहे हैं  इनमें से 1- 1 केस आगरा, इटावा, कासगंज और फर्रुखाबाद और राजस्थान के दौसा में दर्ज है.

यह भी पढ़ें: हाथरस हादसे पर भोले बाबा का असंवेदनशील बयान- होनी को कौन टाल सकता, जो आया है, उसे जाना है!

साकार विश्व हरि या भोले बाबा उर्फ सूरजपाल की पत्नी का नाम कटोरी देवी है. सूरजपाल तीन भाइयों में से सबसे बड़ा है. इनसे छोटे भाई रामप्रसाद की मृत्यु हो चुकी है. तीसरे नंबर के भाई राकेश गांव में रहकर खेती का काम करते हैं. सूरजपाल से बने साकार विश्व हरि बाबा अपने पैतृक गांव में बने आश्रम पर आखिरी बार 23 मई 2023 को आये थे, तब से नहीं आए हैं. हालांकि, उनके आश्रम पर हर मंगलवार को हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है. बाबा के अनुयाई आश्रम पर पहुंचकर अपने आपको को धन्य समझते हैं. 

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