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5 करोड़ बच्चों और एक करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, WHO की रिपोर्ट पर सरकार की सफाई

WHO और यूनिसेफ की रिपोर्ट के बाद सरकार ने दावा किया है कि ‘शून्य खुराक वाले बच्चों’ की उच्च संख्या को रेखांकित करने वाली मीडिया रिपोर्ट देश के टीकाकरण संबंधी प्रयासों की अधूरी तस्वीर पेश करती हैं.

बच्चे के डोज लगाता स्वास्थ्य कर्मी. (फाइल फोटो) बच्चे के डोज लगाता स्वास्थ्य कर्मी. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 6:41 AM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ ने हाल ही में अपने वैश्विक टीकाकरण रिपोर्ट में कहा है कि महामारी के तीन साल बाद भी भारत में बच्चों के टीकाकरण का स्तर अभी महामारी से पहले वाले स्तर पर नहीं पहुंचा है. अब इस पर सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि भारत में जीरो डोज चिल्ड्रन की हाई नंबर को रेखांकित करने वाली मीडिया रिपोर्ट देश के टीकाकरण प्रयासों की अधूरी तस्वीर दिखाई है.

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भारत में ‘शून्य खुराक वाले बच्चों’ की उच्च संख्या को रेखांकित करने वाली मीडिया रिपोर्ट देश के टीकाकरण संबंधी प्रयासों की अधूरी तस्वीर पेश करती हैं. ये मीडिया रिपोर्ट में भारत की जनसंख्या और उच्च टीकाकरण कवरेज को ध्यान में रखे बिना अन्य देशों के साथ त्रुटिपूर्ण तुलना प्रस्तुत करती हैं.

'सबसे आगे है भारत'

कुल जनसंख्या की प्रतिशतता की रूप में जीरो डोज चिल्ड्रन वाले देश की कुल जनसंख्या का 0.11 प्रतिशत है. भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए, अन्य देशों की तुलना में टीकाकरण कराने वाले बच्चों की संख्या यहां सबसे अधिक है.

'देश भर में 93.23% टीकाकरण'

फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के लिए देश का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 93.23% है. भारत का टीकाकरण कार्यक्रम विश्व स्तर पर सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है जो सालाना 1.2 करोड़ टीकाकरण सत्रों के माध्यम से 2.6 करोड़ बच्चों और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं के एक विशाल समूह को लक्षित करता है.

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वहीं, मिशन इंद्रधनुष के तहत 2023 तक 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया है.

WHO ने सोमवार को जारी किए थे आंकड़े

वहीं, सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ ने वैश्विक टीकाकरण रिपोर्ट में कहा है कि महामारी के तीन साल बाद भी भारत में बच्चों के टीकाकरण का स्तर अभी महामारी से पहले वाले स्तर पर नहीं पहुंचा है. रिपोर्ट में कहा गया कि 2023 में 16 लाख बच्चों को डीपीटी और खसरे के टीके नहीं लग पाए.

एजेंसी के मुताबिक, इस पर आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि WHO और यूनिसेफ द्वारा राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज (WUENIC) के अनुमान में बच्चों के टीकाकरण के आंकड़ों  की तुलना 19 अन्य देशों से करते वक्त भारत की जनसंख्या को ध्यान में नहीं रखा गया है, जो कि अन्य देशों से कहीं ज्यादा है.एजेंसी के मुताबिक, सूत्रों ने जोर देकर कहा कि भारत जीरो डोज वाले बच्चों को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है. 

बता दें कि शून्य खुराक वाले बच्चों की संख्या के आधार पर रैंक किए गए देशों में, ROSA, 2021-2023, भारत 1,592,000 शून्य खुराक वाले बच्चों के साथ 8 देशों में से नंबर एक पर है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से कहा किया कि वे सभी स्तर पर और ज्यादा प्रयास करें, जिससे टीकाकरण से बचे और कम टीकाकरण वाले बच्चों की पहचान की जा सके. साथ ही उनका टीकाकरण किया जा सके.

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