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मोदी 3.0 में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव और आमूलचूल परिवर्तन की संभावना है. एक दर्जन से ज्यादा हाई रिस्क वाले लोगों को एनएसजी और आईटीबीपी का सुरक्षा कवर मिला हुआ है, जिसमें बदलाव की उम्मीद है. उनके सुरक्षा की जिम्मेदारी अन्य पैरामिलिट्री फोर्सेज को दिया जा सकता है.
गृह मंत्रालय द्वारा महत्वपूर्ण सिक्योरिटी विंग की समीक्षा जल्द ही किए जाने की उम्मीद है और विभिन्न राजनीतिक हस्तियों और उम्मीदवारों, पूर्व मंत्रियों, रिटारयर्ड नौकरशाहों और कुछ अन्य लोगों को दी गई सुरक्षा या तो वापस ले ली जाएगी, या कम कर दी जाएगी या बढ़ा दी जाएगी.
'ब्लैक कैट' कमांडो को वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी से किया जा सकता है मुक्त
एनएसजी के 'ब्लैक कैट' कमांडो को वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी से पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव लंबे समय से पेंडिंग है. इसके सभी 9 जेड-प्लस श्रेणी के सुरक्षा प्राप्त लोगों को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की वीआईपी सुरक्षा इकाई को सौंप दिया जाएगा.
इसी तरह जिन लोगों को आईटीबीपी सुरक्षा कवर मिला हुआ है, उसमें भी बदलाव किया जा सकता है, और ऐसे लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ या सीआईएसएफ के वीआईपी सुरक्षा विंग को दिया जा सकता है, जिसे एसएसजी भी कहते हैं.
वो लोग जिन्हें मिली है हाई लेवल सुरक्षा
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमो मायावती, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, बीजेपी नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, जैसे कुछ बड़े नेता हैं, जिन्हें एनएसजी सुरक्षा कवर मिला हुआ है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू को भी एनएसजी कमांडो की सुरक्षा मिली हुई है. वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, नेशनलन कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और अन्य लोग आईटीबीपी सुरक्षा कवर में रहते हैं, जिनके सुरक्षा में बदलाव किया जा सकता है.