
वक्फ संशोधन बिल 2025 लोकसभा में लगभग 12 घंटे की गरमागरम बहस के बाद पास हो गया है. आज इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जा रहा है और इसे आज ही पास किया जाएगा. वक्फ बिल संपत्तियों के मैनेजमेंट और रेगुलेशन में कई बदलाव लाता है. यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को सरकारी निगरानी में लाने और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देता है. बिल के कानून बन जाने के बाद भी मुसलमान वक्फ बना सकेंगे, लेकिन सख्त नियमों और शर्तों के साथ.
आइए समझते हैं कि इस बिल के कानून बन जाने से मुसलमान क्या कर पाएंगे और क्या नहीं कर पाएंगे. इस कानून का मुस्लिम समुदाय पर असर क्या होगा.
1- वक्फ बाय यूजर (Waqf by user) का खात्मा
वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में वक्फ बाय यूजर के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है. अब सिर्फ वही संपत्ति वक्फ मानी जाएगी, जिसे औपचारिक रूप से (यानी लिखित दस्तावेज या वसीयत के जरिए) वक्फ के लिए समर्पित किया गया हो. लेकिन पहले ऐसा नहीं था.
वक्फ बाय यूजर" एक पारंपरिक तरीका था जिसके तहत कोई संपत्ति, जैसे मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह, अगर लंबे समय से मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक या सामुदायिक कामों के लिए इस्तेमाल हो रही थी, तो उसे बिना किसी औपचारिक दस्तावेज या घोषणा के भी वक्फ मान लिया जाता था. ये इस्लामिक कानून और भारत में वक्फ की पुरानी प्रथा का हिस्सा था.
लेकिन लोकसभा में पास बिल में इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया है. अब अगर कोई जमीन या इमारत सालों से मस्जिद या कब्रिस्तान के तौर पर इस्तेमाल हो रही है, लेकिन उसके पास वक्फ का कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है, तो अब उसे वक्फ नहीं माना जाएगा.
हर वक्फ संपत्ति को जिला कलेक्टर द्वारा जांचा जाएगा. बिना सबूत के कोई भी जगह पर वक्फ बोर्ड दावा नहीं कर सकेगी.
इसे एक उदाहरण के जरिये समझाते हैं- मान लिया जाए एक गांव में 100 साल से एक जमीन पर कब्रिस्तान है, लेकिन कभी इसे औपचारिक रूप से वक्फ घोषित नहीं किया गया. पहले, "वक्फ बाय यूजर" के तहत इसे वक्फ मान लिया जाता था. अब नए कानून के बाद, अगर वक्फ बोर्ड के पास इस जमीन के कोई दस्तावेज नहीं है, तो इसे वक्फ नहीं माना जाएगा. इस जमीन का सही दस्तावेज दिखाने वाला पक्ष इस पर दावा कर सकता है.
2. मुस्लिमों को संपत्ति दान करने के लिए पूरी करनी होगी शर्त
वक्फ (संशोधन) बिल 2025 के तहत अब मुस्लिमों को संपत्ति दान के लिए शर्त पूरी करनी पडे़गी. बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि
वक्फ' का अर्थ है अपनी जमीन, महत्त्वपूर्ण संपत्ति या एसेट को इस्लाम की भलाई के लिए अल्लाह के नाम पर दान करना. दान केवल अपनी संपत्ति का ही किया जा सकता है, सरकार या किसी और की संपत्ति का नहीं.
अमित शाह ने कहा कि इसमें दान देने का बड़ा महत्व है, दान उस चीज का ही किया जा सकता है जो आपकी अपनी संपत्ति है. कोई सरकारी संपत्ति का दान नहीं कर सकता है. किसी और की संपत्ति का दान नहीं कर सकता है.
नए प्रावधान के तहत कोई भी मुसलमान, कम से कम 5 साल से इस्लाम को मान रहा हो और संपत्ति का कानूनी मालिक हो वही वक्फ के लिए संपत्ति दान कर सकेगा. 2013 के वक्फ संशोधन में इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया था. अब इसे फिर से ले आया गया है.
यानी कि कोई व्यक्ति अगर 5 साल से कम समय से इस्लाम को मान रहा है, तो व्यक्ति धर्मांतरण करके मुस्लिम बनता है तो ऐसी परिस्थिति में वह अपनी संपत्ति वक्फ को दान नहीं कर पाएगा. इसके लिए उसे 5 साल तक इंतजार करना होगा.
3. वक्फ करने से पहले महिलाओं को उनका हिस्सा देना पड़ेगा
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में एक नया प्रावधान है जो कहता है कि अगर कोई मुसलमान अपनी किसी संपत्ति को वक्फ को दान में देना चाहता है तो उसे इसकी घोषणा करने से पहले महिलाओं को उनका हिस्सा देना पड़ेगा. इसमें विधवाओं (widows), तलाकशुदा महिलाओं (divorced women) और अनाथों (orphans) के लिए खास प्रावधान किया गया है.
उदाहरण के लिए एक शख्स अपनी 10 बीघा जमीन को वक्फ करना चाहता है. उसके पास एक बेटी, एक विधवा बहन, और एक अनाथ भतीजा है. पुराने नियम में वो पूरी जमीन को वक्फ में दे सकता था, लेकिन अब उसे इन्हें भी उनका हिस्सा देना पड़ेगा इसके बाद ही वो अपने हिस्से की जमीन को वक्फ को दान दे सकेगा.
अब वक्फ बनाने से पहले ये चेक होगा कि बेटियों, बहनों, पत्नियों, विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों को उनका हिस्सा मिल गया है या नहीं. अगर नहीं मिला, तो वक्फ मान्य नहीं होगा.
4.आदिवासी जमीन को नहीं कर पाएंगे वक्फ
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 में आदिवासियों की जमीन को वक्फ घोषित करने से पूरी सुरक्षा दी गई है. भारत में आदिवासी समुदायों की जमीन को संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत चिह्नित और संरक्षित किया गया है. ये जमीनें उनकी संस्कृति, आजीविका और पहचान का हिस्सा हैं.
नए नियम के तहत अगर कोई जमीन आदिवासी समुदाय (Tribal Community) की है, यानी जो भारत के संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) के नाम पर दर्ज है या उनके पारंपरिक अधिकार क्षेत्र में आती है, तो उस जमीन को वक्फ बोर्ड अपने कब्जे में नहीं ले सकेगा. न ही आदिवासी समुदाय की इस जमीन को कोई मुसलमान वक्फ के लिए दान कर सकेगा.
इस प्रावधान का उद्देश्य आदिवासियों के हितों की रक्षा करना है.
5.धारा 40 की समाप्ति
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में पुराने कानून की धारा 40 को हटाने का प्रस्ताव एक बड़ा बदलाव है. इसे समझने के लिए पहले ये जानना जरूरी है कि धारा 40 क्या थी और अब इसके हटने से क्या होगा.
अधिनियम की धारा 40 में प्रावधान था कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं, यह निर्णय लेने का अंतिम अधिकार वक्फ बोर्ड के पास था.
वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 40 वक्फ बोर्ड को ये अधिकार देती थी कि अगर उसे लगता था कि कोई संपत्ति वक्फ की है या वक्फ के तौर पर इस्तेमाल हो रही है, तो वह उसकी जांच कर सकता था और उसे अपने कब्जे में ले सकता था. यानी, बिना किसी ठोस सबूत या कोर्ट के फैसले के, वक्फ बोर्ड खुद तय कर सकता था कि कोई जमीन या इमारत उसकी है या नहीं. ये शक्ति बोर्ड को बहुत ताकतवर बनाती थी. कई बार इसका दुरुपयोग भी हुआ.
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में इस धारा-40 को ही समाप्त कर दिया गया है. बुधवार को किरेन रिजिजू ने इस धारा को सबसे ज्यादा आपत्तिजनक बताया था. अब किसी संपत्ति के वक्फ होने की जांच और फैसला जिला कलेक्टर या राज्य सरकार का नामित अधिकारी करेगा.
इस मामले में बोर्ड का निर्णय अंतिम होता था, जब तक कि वक्फ न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) द्वारा उसे रद्द या संशोधित न कर दिया जाए.
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अनुसार ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ कोई अपील भी नहीं की जा सकती थी.
अब वक्फ संशोधन विधेयक में वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णयों को अंतिम मानने वाले प्रावधानों को हटा दिया गया है और उसके आदेशों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है.
विपक्ष ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि इस धारा को हटाने से वक्फ बोर्ड एक "दंतविहीन गुड़िया" (Toothless doll) बन जाएगा.
6.ASI की जमीनों और संपत्तियों को सुरक्षा
वक्फ (संशोधन) बिल 2025 के तहत वक्फ संपत्तियों के संबंध में जारी की गई कोई भी घोषणा या अधिसूचना अमान्य होगी, यदि ऐसी संपत्ति ऐसी घोषणा या अधिसूचना के समय प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 (Ancient Monuments Preservation Act, 1904 ) या प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958) के तहत वो सपंत्ति संरक्षित स्मारक या संरक्षित क्षेत्र थी.
इसका मतलब यह है कि एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों को अब वक्फ के दायरे से बाहर कर दिया गया है.
मान लीजिए, कोई पुराना दरगाह या कब्र ASI के पास संरक्षित है, लेकिन अगर वक्फ बोर्ड उसे अपनी संपत्ति घोषित कर देती है तो नए बिल के तहत वक्फ बोर्ड को सबूत देना होगा कि वह संपत्ति वास्तव में उनकी है. उसे कागज दिखाने पड़ेंगे.
अगर सबूत नहीं मिले और वह ASI की सूची में है, तो कलेक्टर उसे वक्फ से बाहर कर देगा.
बता दें कि ताजमहल को भी वक्फ की संपत्ति घोषित करने की कोशिश हुई थी.
7. कलेक्टर को बड़े पैमाने पर अधिकार
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 में जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और विवादों के निपटारे में अहम अधिकार दिए गए हैं. पुराने वक्फ अधिनियम, 1995 में जिला कलेक्टर की कोई बड़ी भूमिका नहीं थी. वक्फ बोर्ड खुद संपत्ति की जांच करता था, दावा करता था, और अपने फैसले लागू करता था. लेकिन अब इसे बदल दिया गया है.
अब कलेक्टर सरकारी संपत्ति की पहचान करेगा. किसी संपत्ति के वक्फ होने या न होने का फैसला करेगा. विवादों का निपटारा भी कलेक्टर करेगा.
गृह मंत्री ने कहा कि किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया है और अब ऐसी घोषणाओं को जिला कलेक्टर द्वारा सत्यापित किया जाएगा.
अमित शाह ने कहा कि देश में जब भी किसी मंदिर के लिए जमीन खरीदी जाती है तो उसका मालिकाना हक कलेक्टर ही तय करता है. उन्होंने सवाल उठाया कि कलेक्टर द्वारा वक्फ की जमीन की जांच का विरोध क्यों हो रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्फ की जमीन सरकार की है या नहीं, यह जांचने का अधिकार केवल कलेक्टर को है.
8. सेंट्रल और स्टेट वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों की एंट्री
इस नए बिल के अनुसार सेंट्रल वक्फ काउंसिल और स्टेट वक्फ बोर्ड में समावेशी नजरिये को ध्यान में रखते हुए गैर मुस्लिम सदस्यों की भी नियुक्ति होगी. केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि केंद्रीय वक्फ बोर्ड में अधिकतम 4 गैर मुस्लिम (न्यूनतम-2) सदस्य हो सकते हैं. गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार वक्फ बोर्ड या इसके परिसर में नियुक्त कोई भी गैर-मुस्लिम सदस्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं होगा. उनकी भूमिका केवल यह सुनिश्चित करना होगी कि दान से संबंधित मामलों का प्रशासन नियमों के अनुसार संचालित हो रहा है
इसके साथ ही, दोनों में कम से कम दो महिलाएं (मुस्लिम या गैर-मुस्लिम) भी शामिल होंगी.