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Waqf Amendment Bill: 'मैं गांधी की तरह वक्फ बिल को फाड़ता हूं', असदुद्दीन ओवैसी बोले- इसका मकसद मुसलमानों को जलील करना

ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिमों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित करना चाहती है. उन्होंने अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थानों के संचालन का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मुस्लिमों को उनके धार्मिक संस्थानों पर प्रशासनिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है.

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में वक्फ बिल का विरोध किया AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने संसद में वक्फ बिल का विरोध किया
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 11:47 PM IST

लोकसभा में बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसमें 1995 के वक्फ अधिनियम में व्यापक बदलाव करने का प्रस्ताव है. सरकार इस विधेयक को लोकसभा में पारित कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध दिख रही है, वहीं विपक्ष ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया है. लोकसभा में चर्चा के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने इस विधेयक को मुस्लिमों के धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया और इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन बताया और कहा कि इसका मकसद मुसलमानों को जलील करना है.

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ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को खत्म करने की साजिश है. उन्होंने कहा कि हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों की धार्मिक संपत्तियों को संरक्षण प्राप्त है, लेकिन मुस्लिम वक्फ की संपत्तियों को इस विधेयक के माध्यम से सरकार जब्त करना चाहती है. इस विधेयक के प्रावधान मुस्लिम वक्फ बोर्ड से प्रशासनिक नियंत्रण छीनकर सरकार को सौंप देते हैं, जिससे यह बोर्ड मुस्लिम समाज के हितों की रक्षा नहीं कर पाएंगे. उन्होंने तर्क दिया कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है क्योंकि अन्य धार्मिक समुदायों की संपत्तियों को विशेष संरक्षण प्राप्त है, लेकिन मुस्लिमों की संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में लेने की योजना बनाई जा रही है.

'वक्फ संपत्तियों पर कब्जे की साजिश'

ओवैसी ने संसद में कहा कि इस विधेयक के लागू होने से वक्फ संपत्तियों पर कब्जे को कानूनी मान्यता मिल जाएगी. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने वक्फ संपत्ति पर कब्जा कर लिया, तो सरकार इस पर लिमिटेशन एक्ट लागू करेगी, जिससे रातों-रात अतिक्रमणकर्ता उस संपत्ति का कानूनी मालिक बन जाएगा. उन्होंने इसे न्याय की भावना के खिलाफ बताया और कहा कि यह विधेयक अतिक्रमण करने वालों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है.

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को कमजोर कर रही है ताकि मुसलमानों की आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति को रोका जा सके. उन्होंने बताया कि 2007 की सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि सिर्फ दिल्ली में 123 वक्फ संपत्तियों की बाजार कीमत 6000 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब सरकार इन संपत्तियों को हड़पने के लिए नए कानून बना रही है.

'अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन'

ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिमों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित करना चाहती है. उन्होंने अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थानों के संचालन का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मुस्लिमों को उनके धार्मिक संस्थानों पर प्रशासनिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है.

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के धार्मिक संस्थानों को अपने मामलों को खुद संचालित करने का अधिकार है, तो फिर मुस्लिम वक्फ बोर्ड के अधिकारों को क्यों छीना जा रहा है? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मुस्लिम धार्मिक स्थलों – मस्जिदों, मदरसों, खानकाहों और दरगाहों को निशाना बना रही है.

सरकार पर तीखा हमला

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण से जुड़े आंकड़े पेश करने पर ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि 2014 में सरकार ने अवैध कब्जे हटाने के लिए एक बिल लाया था, तो उसे 2024 में वापस क्यों लिया गया? उन्होंने कहा कि "सरकार खुद ही अपने फैसलों से मुकर रही है और झूठा प्रचार कर रही है."

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ओवैसी ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि 2013 में जब वक्फ अधिनियम पारित हुआ था, तब भाजपा नेताओं ने इसका समर्थन किया था. उन्होंने पूछा कि क्या अब भाजपा अपने ही पुराने नेताओं – अडवाणी, सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह – के फैसलों को गलत मान रही है?

अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी

ओवैसी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मुस्लिम सदस्यों के साथ भेदभाव कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जनजाति से है और वह मुस्लिम है, तो क्या उसे उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जाएगा? उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 29 का उल्लंघन करार दिया.

ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों से संबंधित मामलों में न्यायिक अपील के अधिकार को समाप्त कर देगा. उन्होंने बताया कि आमतौर पर विभिन्न ट्रिब्यूनलों (जैसे रेलवे ट्रिब्यूनल, इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल) में अपील करने का अधिकार होता है, लेकिन इस विधेयक में वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में अपील के अधिकार को खत्म किया जा रहा है.

उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में अब गैर-मुस्लिमों को भी शामिल किया जा सकता है, जिससे वक्फ बोर्ड मुसलमानों के हितों की रक्षा नहीं कर सकेगा.

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ओवैसी का विधेयक को फाड़ने का ऐलान

अपने भाषण के अंत में ओवैसी ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में नस्लवादी कानूनों के खिलाफ खड़े होकर अन्यायपूर्ण कानून को अस्वीकार किया था, उसी तरह वह भी इस विधेयक को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा कि यह विधेयक असंवैधानिक है और वह इसे संसद में ही फाड़कर विरोध दर्ज कर रहे हैं. उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह धार्मिक ध्रुवीकरण करके देश में मंदिर-मस्जिद के नाम पर संघर्ष भड़काना चाहती है. उन्होंने अपने 10 संशोधन प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत किए और मांग की कि सरकार इनपर विचार करे.

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