
वरिष्ठ भाजपा सांसद जगदंबिका पाल को संसद की संयुक्त समिति (JPC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो वक्फ (संशोधन) विधेयक की जांच करेगी. आजतक से खास बातचीत में जगदंबिका पाल ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक ठंडे बस्ते में नहीं जा रहा है बल्कि जेपीसी अगले सत्र के पहले हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी.
क्या बोले जगदंबिका पाल
आजतक से खास बातचीत में जगदंबिका पाल ने कहा कि सरकार चाहती तो बिल लाकर दो घंटे में इसे पास कर सकती थी. हमारे पास सदन में बहुमत था. लेकिन इस मुद्दे को जेपीसी में ले जाया गया है ताकि सभी लोगों की सहमति ली जा सके. विपक्ष, वक्फ सभी की चिंताओं को जानने के लिए ही ये कदम उठाया गया है.
अगले सत्र के पहले हफ्ते में सबमिट होगी रिपोर्ट...
जगदंबिका पाल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने कहा है कि अगले सत्र के पहले हफ्ते तक हमें JPC की रिपोर्ट सबमिट करना है. 3 महीने का वक्त है ऐसे में सभी चाहते हैं कि अच्छा कानून बने, अच्छा संशोधन आए. उन्होंने कहा कि इस बिल के ठंडे बस्ते में जाने का कोई सवाल नहीं है. 22 अगस्त को JPC की पहली बैठक है.इसमें हम सभी की बातों को सुनेंगे.
उन्होंने कहा कि संशोधन तो आते रहते हैं.लेकिन लोगों के मन में अगर कोई शंका है, कोई संशोधन या सुझाव है तो सामने आना चाहिए.
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आम लोगों को मिले फायदा...
उन्होंने कहा कि जेपीसी की बैठक इतनी बेहतरीन होती है कि इसकी गोपनीयता नहीं भंग होती है. सब अपनी बात रखेंगे और सब का एक ही मकसद होगा कि आम लोगों का इसका फायदा मिले. हमें विश्वास है कि यह एक अच्छा बिल आएगा.
उन्होंने कहा कि जेपीसी में जो भी सदस्य बनाए गए हैं वह सभी जिम्मेदार लोग हैं. मेरी सबसे बातचीत भी होती है और जब मुझे जिम्मेदारी दी गई है तो हम एक राय पर जरूर पहुंचना चाहेंगे. बता दें कि संयुक्त समिति में 31 सदस्य हैं - 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से हैं.
बता दें कि विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया था और जोरदार बहस के बाद इसे संसद की एक संयुक्त समिति को भेज दिया गया था, जिसमें सरकार ने कहा था कि प्रस्तावित कानून का मस्जिदों के कामकाज में हस्तक्षेप करने का इरादा नहीं है और विपक्ष ने इसे मुसलमानों को निशाना बनाना और संविधान पर हमला बताया था.
वक्फ (संशोधन) विधेयक क्या है?
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को हाल ही में 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया. यह विधेयक वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन के लिए लाया गया है, जो भारत में वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए बना था. इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य वक्फ प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है.
वक्फ (संशोधन) विधेयक के प्रमुख प्रावधान
1. अधिनियम के नाम में बदलाव: इस विधेयक के तहत, वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर 'संयुक्त वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995' कर दिया गया है.
2. वक्फ का गठन: विधेयक के अनुसार, वक्फ का गठन अब केवल उन व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहे हों. विधेयक में उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ को हटाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि वक्फ-अलल-औलाद (उत्तराधिकारियों के लिए वक्फ) के परिणामस्वरूप दानकर्ता के उत्तराधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा.
3. सरकारी संपत्ति का वक्फ न होना: इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई सरकारी संपत्ति वक्फ के रूप में पहचानी जाती है, तो उसे वक्फ नहीं माना जाएगा. ऐसी संपत्ति के स्वामित्व का निर्धारण उस क्षेत्र का कलेक्टर करेगा और राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा.
4. वक्फ सर्वेक्षण: विधेयक के तहत सर्वेक्षण आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्तों के बजाय, अब कलेक्टरों को वक्फ का सर्वेक्षण करने का अधिकार दिया गया है. लंबित सर्वेक्षण राज्य के राजस्व कानूनों के अनुसार किए जाएंगे.
5. केंद्रीय वक्फ परिषद: विधेयक में केंद्रीय वक्फ परिषद के पुनर्गठन का प्रावधान है. अब इस परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य भी हो सकते हैं, जबकि मुस्लिम सदस्यों में से दो महिलाओं का होना अनिवार्य है.
6. वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन: विधेयक के तहत वक्फ बोर्ड के सदस्यों की संरचना में बदलाव किया गया है. अब बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य भी होंगे और शिया, सुन्नी, पिछड़े मुस्लिम वर्गों के साथ-साथ बोहरा और आगाखानी समुदायों से भी एक-एक सदस्य होगा.
7. ट्रिब्यूनल की संरचना: विधेयक के अनुसार, वक्फ से संबंधित विवादों को निपटाने के लिए ट्रिब्यूनल के गठन का प्रावधान है. ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष के रूप में एक वर्तमान या पूर्व जिला न्यायालय के न्यायाधीश और राज्य सरकार के संयुक्त सचिव के रैंक के अधिकारी को सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाएगा.
8. ट्रिब्यूनल के आदेशों पर अपील: विधेयक के तहत ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है.
9. केंद्र सरकार की शक्तियां: विधेयक के तहत केंद्र सरकार को वक्फ के पंजीकरण, खातों के ऑडिट और बोर्ड की कार्यवाही के प्रकाशन के संबंध में नियम बनाने का अधिकार दिया गया है.
10. बोहरा और आगाखानी वक्फ बोर्ड: विधेयक में सुन्नी और शिया संप्रदायों के साथ-साथ बोहरा और आगाखानी संप्रदायों के लिए भी अलग-अलग वक्फ बोर्ड की स्थापना का प्रावधान किया गया है.
वक्फ संशोधन विधेयक के विवाद: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर विपक्षी दलों और वक्फ प्रबंधन संगठनों के बीच गंभीर आपत्तियां उठाई गई हैं. उनका कहना है कि इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और यह वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कम करेगा.