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सरकार वक्फ से जुड़े 2 बिल संसद में लाएगी, बोहरा-आगाखानी के लिए अलग बोर्ड बनेगा

केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड अधिनियम संशोधन बिल 2024 के जरिए 44 संशोधन करने जा रही है. सरकार ने कहा है कि यह बिल लाने का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संचालन है. इसमें वक्फ कानून 1995 के सेक्शन 40 को हटाया जा रहा है जिसके तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने का अधिकार था.

दिल्ली वक्फ बोर्ड दिल्ली वक्फ बोर्ड
हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 07 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 10:33 AM IST

केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड अधिनियम में बड़े संशोधन करने की तैयारी में है. सरकार वक्फ से जुड़े दो बिल संसद में लाने जा रही है. इन सुधारों को लेकर सरकार के बिल की कॉपी जारी हुई है. जानिए सरकार अब जो बिल लेकर आने वाली है, उनमें क्या खास होगा?

पहले बिल के जरिए मुसलमान वक्फ कानून 1923 को समाप्त किया जाएगा जबकि दूसरे बिल के जरिए वक्फ कानून 1995 में महत्वपूर्ण संशोधन होंगे.

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केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड अधिनियम संशोधन बिल 2024 के जरिए 44 संशोधन करने जा रही है. सरकार ने कहा है कि यह बिल लाने का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संचालन है. इसमें वक्फ कानून 1995 के सेक्शन 40 को हटाया जा रहा है जिसके तहत वक्फ बोर्ड को किसी भी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित करने का अधिकार था.

वहीं, वक्फ कानून 1995 का नाम बदलकर एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 होगा. केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम और गैर मुस्लिम का उचित प्रतिनिधित्व होगा. मुस्लिम समुदायों में अन्य पिछड़ा वर्ग; शिया, सुन्नी, बोहरा, आगाखानी का प्रतिनिधित्व होगा. 

इसके साथ ही महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. केंद्रीय परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में दो महिलाओं को रखना अनिवार्य होगा. एक केंद्रीय पोर्टल और डेटाबेस के माध्यम से वक्फ के पंजीकरण के तरीके को सुव्यवस्थित करना होगा. इसके साथ ही दो सदस्यों के साथ ट्रिब्यूनल संरचना में सुधार करना होगा. वहीं, ट्रिब्यूनल के आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के लिए नब्बे दिनों की मियाद निर्धारित की गई है. वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण के लिए सर्वे कमिश्नर का अधिकार कलेक्टर या कलेक्टर द्वारा नामित डिप्टी कलेक्टर को होगा.

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बोहरा और आगाखानियों के लिए अलग बोर्ड

बोहरा और आगाखानियों के लिए अलग बोर्ड की स्थापना का प्रावधान किया गया है. किसी भी संपत्ति को वक्फ के रूप में दर्ज करने से पहले सभी संबंधितों को उचित नोटिस दिया जाएगा. 

वक्फ परिषद में केंद्रीय मंत्री, तीन सांसद, मुस्लिम संगठनों के तीन नुमाइंदे, मुस्लिम कानून के तीन जानकार, सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के दो पूर्व जज, एक प्रसिद्ध वकील, राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चार लोग, भारत सरकार के अतिरिक्त या संयुक्त सचिव आदि होंगे. इनमें दो महिलाओं का होना जरूरी होगा.

वक्फ क्या है 

'वक्फ' अरबी भाषा के 'वकुफा' शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है ठहरना. वक्फ का मतलब, दरअसल उन संपत्तियों से है जो इस्लामी कानून के तहत विशेष रूप से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित हैं. इस्लाम में ये एक तरह का धर्मार्थ बंदोबस्त है. वक्फ उस जायदाद को कहते हैं, जो इस्लाम को मानने वाले दान करते हैं. ये चल-अचल दोनों तरह की हो सकती है. ये दौलत वक्फ बोर्ड के तहत आती है. जैसे ही संबंधित संपत्ति का स्वामित्व बदलता है तो यह माना जाता है कि यह संपत्ति मालिक से अल्लाह को हस्तांतरित हो गई है. इसके साथ ही यह अपरिवर्तनीय हो जाता है.

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‘एक बार वक्फ, हमेशा एक वक्फ’ का सिद्धांत यहां लागू होता है, यानि- एक बार जब किसी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाता है, तो वह हमेशा वैसी ही रहती है. वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करने के लिए प्रत्येक राज्य में एक वक्फ बोर्ड का गठन किया गया है.

2013 में क्या बदलाव हुए 

2013 में, इस अधिनियम में और संशोधन किया गया, ताकि वक्फ बोर्डों को किसी की भी संपत्ति छीनने के असीमित अधिकार दिए जा सकें, जिसे किसी भी अदालत में चुनौती भी नहीं दी जा सकती. सीधे शब्दों में कहें तो वक्फ बोर्ड के पास मुस्लिम दान के नाम पर संपत्ति का दावा करने के असीमित अधिकार हैं. इसका सीधा मतलब यह था कि एक धार्मिक निकाय को असीमित अधिकार दिए गए थे, जिसने वादी को न्यायपालिका से न्याय मांगने से भी रोक दिया. 

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