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खेल मंत्रालय के एक्शन के बाद बाद हरकत में आया WFI, बृजभूषण के घर से खाली कर दूसरी जगह शिफ्ट किया अपना दफ्तर

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने खेल मंत्रालय की कड़ी फटकार के बाद अपना कार्यालय पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के आवास से दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है. खेल मंत्रालय ने कुछ दिन पहले ही नवनिर्वाचित संस्था को निलंबित कर दिया था.

नितिन कुमार श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 29 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST

खेल मंत्रालय के कड़े एक्शन के बाद अब भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने निर्णायक कदम उठाते हुए अपना कार्यालय अपने पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के आवास से दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया है. दरअसल  खेल मंत्रालय ने नवनिर्वाचित डब्ल्यूएफआई निकाय को निलंबित कर दिया था, जिसका नेतृत्व बृजभूषण शरण सिंह के करीबी सहयोगी संजय सिंह कर रहे थे. यह निलंबन नए पदाधिकारियों के लिए एक बड़ा झटका था.

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मंत्रालय ने यह भी चिंता व्यक्त की थी कि नया निकाय पूर्व पदाधिकारियों के पूर्ण नियंत्रण में काम कर रहा था, जो राष्ट्रीय खेल संहिता के अनुरूप नहीं था. संजय सिंह ने बृजभूषण के आवास से संचालित होने वाले डब्ल्यूएफआई ऑफिस के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा था कि हाल ही में चुनी गई टीम को एक नया कार्यस्थल का चुनाव करने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए.उन्होंने आश्वासन दिया था कि वह सरकार द्वारा निर्देशित किसी भी स्थान पर जल्द ही शिफ्ट होने के लिए तैयार हैं.

संजय सिंह ने दिया था ये बयान

संजय सिंह ने कहा था, "आरोपों में से एक यह है कि महासंघ बृजभूषण शरण सिंह के घर से चलाया जाता है. हमने दो दिन पहले ही डब्ल्यूएफआई का कार्यभार संभाला है, हम जगह की तलाश कर रहे हैं. अगर खेल मंत्रालय हमें बताएगा कि कहां जाना है, तो हम तुरंत वहां जाएंगे. हम एक नए कार्यालय की भी तलाश कर रहे हैं, हम तुरंत शिफ्ट करने के लिए तैयार हैं.'

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यह विवाद 21 दिसंबर, 2023 को हुए डब्ल्यूएफआई चुनावों के तुरंत बाद शुरू हुआ, जहां संजय सिंह विजयी हुए. उनके अध्यक्ष पद पर चुने जाने के बाद शीर्ष पहलवानों ने निराशा जाहिर की थी जिनमें ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट शामिल थे. साक्षी मलिक ने जहां तुरंत सन्यास लेने का ऐलान कर दिया तो वहीं बजरंग पुनिया ने अपना पद्म पुरस्कार पीएम आवास के बाहर फुटपाथ पर छोड़ दिया. 

विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता विनेश फोगाट ने भी अपना खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार लौटा दिया. एथलीटों का मानना था कि नई डब्ल्यूएफआई संस्था बृज भूषण से प्रभावित होगी.

खेल मंत्रालय ने लिया था एक्शन

खेल मंत्रालय भी नई डब्ल्यूएफआई समिति के कामकाज को लेकर संतुष्ट नहीं था. नवनिर्वाचित निकाय ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और पहलवानों को तैयारी के लिए पर्याप्त नोटिस दिए बगैर अंडर 15 और अंडर 20 आयु वर्ग के पहलवानों की चैंपियनशिप गोंडा में कराने का ऐलान कर दिया. इसी बात को लेकर खेल मंत्रालय ने नाराजगी जताई थी.

आपको बता दें कि भारतीय कुश्ती संघ के हाल ही में चुनाव संपन्न हुए थे, जिसमें बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह को जीत मिली थी और पहलवान अनीता श्योराण की हार हुई थी. बाद में खेल मंत्रालय ने कुश्ती संघ को रद्द करते हुए संजय सिंह द्वारा लिए गए सभी फैसलों पर भी रोक लगा दी. खेल मंत्रालय ने अगले आदेश तक किसी भी तरह की गतिविधि पर रोक लगा दी.. WFI को लेकर दिए गए निर्देश में खेल मंत्रालय ने कहा था कि ऐसा लगता है मानो पुराने पदाधिकारी ही सभी फैसले ले रहे हैं. 

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