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Explainer: वैक्सीन क्या होती है, बीमारियों से लड़ने में कैसे मददगार? दुनिया में अबतक कितनी वैक्सीन सफल हुईं

कोरोना वायरस महामारी के बीच वैक्सीन यानी टीकों से दुनिया को बड़ी उम्मीदे हैं. वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं. ऐसे में वैक्सीन का इतिहास और तमाम बीमारियों में उनके प्रभाव, वैक्सीन के काम करने के तरीके, उनके साइड इफेक्ट के बारे में जान लेना जरूरी है.

कोरोना वैक्सीन का दुनिया कर रही इंतजार (फाइल फोटो: PTI) कोरोना वैक्सीन का दुनिया कर रही इंतजार (फाइल फोटो: PTI)
संदीप कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 30 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:19 AM IST
  • कोरोना वायरस की वैक्सीन से दुनिया को बड़ी उम्मीदें
  • 20 से अधिक बीमारियों में वैक्सीन अब तक रही है कारगर
  • 1796 में हुआ था दुनिया की पहली वैक्सीन का आविष्कार

आज जब पूरी दुनिया को कोरोना वायरस महामारी से जूझते हुए एक साल से अधिक वक्त हो गया है. तब पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा वैक्सीन यानी टीके की हो रही है. अलग-अलग देशों में कोरोना वायरस की चार दर्जन से अधिक वैक्सीन पर काम जारी है और कई के अगले महीने तक आ जाने के दावे भी किए जा रहे हैं. दुनिया को उम्मीद है कि वैक्सीन इस महामारी से निजात दिला पाएगी.

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दुनियाभर में करीब दो दर्जन बीमारियों से लड़ने में तमाम तरह की वैक्सीन आज के वक्त में मददगार साबित हो रही हैं. ताजा संकट कोरोना वायरस का है जिसके सामने आने के एक साल के अंदर लगभग कई दवा कंपनियां वैक्सीन बनाने की स्थिति में आ चुकी हैं और उनकी वैक्सीन ट्रायल के एडवांस स्टेज में भी पहुंच चुकी हैं. फाइनल ट्रायल और अप्रूवल के स्टेज के बाद इन्हें लोगों को दिया भी जाने लगेगा. ऐसे में वैक्सीन से जुड़ी कुछ बुनियादी सवालों के जवाब जान लेने जरूरी हैं.

वैक्सीन क्या होती है?
वैक्सीन या टीका जैविक पदार्थों से बना द्रव्य है. वैक्सीन शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी कि Immunity को बढ़ाकर शरीर में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने का काम करती है. वैक्सीन न केवल बीमारी को कंट्रोल करने में मदद करता है बल्कि जिन लोगों में वायरस का संक्रमण अभी नहीं हुआ है उनमें भी इम्युनिटी का विकास कर बीमारी को फैलने से रोकने का काम करता है.

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कितने तरीके से दिए जाते हैं टीके?
इसे कई माध्यमों जैसे कि इंजेक्शन, मुंह से पिला कर या फिर सांस के जरिए इनहेल कराकर दिया जाता है. इसके अलावा नोजल स्प्रे यानी कि नाक से डालकर भी दिया जाता है. वैक्सीन या टीके शरीर में एंटीबॉडिज का निर्माण करते हैं. जिन्हें तैयार करने के लिए उन्हीं वायरस के कुछ अणुओं का इस्तेमाल किया जाता है. यही अणु शरीर में जाकर ऐसे विषाणुओं की पहचान करते हैं और फिर उनसे लड़ने की क्षमता विकसित करते हैं. यह ऐसे स्पाइक प्रोटीन्स को जन्म देते हैं जो वायरस के अणुओं को हमारी कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोककर उनको बढ़ने से रोकते हैं और बीमारी को कंट्रोल करते हैं या फिर उन्हें एंट्री नहीं करने देते.

कैसे काम करती है वैक्सीन?
वैक्सीन का काम शरीर में इम्युन सिस्टम को डेवलप करना है. इम्युन सिस्टम वायरस से लेकर परजीवी कृमियों की पहचान करने में सक्षम होती है साथ ही उन्हें खत्म करने में भी. इम्युन सिस्टम हमारे शरीर का रक्षा कवच है जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगी, एल्गी समेत उन तमाम रोगाणुओं के सामने ढाल बनता है, जो बीमारियों का कारण बनता है. इसके साथ ही यह इनकी स्वस्थ कोशिकाओं और उत्तकों को अलग से पहचान सकती हैं और उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाती जो कि शरीर के अंदर सुचारू रूप से अंगों के काम करने के लिए जरूरी हैं.

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इसके काम को मुख्यत: दो हिस्सों में बांट सकते हैं. पहला- इनैट यानी जन्मजात इम्युन क्षमता. जैसे- त्वचा, नाक में मौजूद स्नॉट, लार पहला रक्षा कवच होते हैं. दूसरा है ए़ॉप्टिव इम्युन सिस्टम. यानी जो हम लाइफस्टाइल से हासिल करते हैं. जब हम किसी रोगजनक वायरस या बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं तो हमारा शरीर उससे निपटने के लिए तैयार होता है. इनैट से बचकर शरीर में प्रवेश करने के बाद उनका मुकाबला हमारे रक्त में मौजूद व्हाइट ब्लड सेल्स से होता है. यहीं पर वैक्सीन द्वारा तैयार किए गए एंटीबॉडिज की जरूरत होती है जो रक्त कोशिकाओं में घातक विषाणुओं को प्रवेश नहीं करने देतीं.

वैक्सीन की जरूरत लोगों को क्यों होती है?
वैक्सीन या टीका घातक वायरस से ग्रसित शरीर को उससे उबरने में जहां मदद करती है वहीं जिनमें संक्रमण नहीं है उनमें उस वायरस से लड़ने की क्षमता भी विकसित करती है. एक समय था जब पोलियो, डिप्थीरिया, टेटनस या काली खांसी जैसी बीमारियों से हर साल लाखों लोग ग्रसित हो रहे थे और बड़ी संख्या में लोगों की जान भी जा रही थी लेकिन इनकी वैक्सीन बनने के बाद लोगों का टीकाकरण किया गया और अब इन बीमारियों पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है.

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टीकों के क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं?
ICMR यानी इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल के मुताबिक टीकाकरण से होने वाले अधिकांश साइड इफेक्ट हल्के होते हैं. जैसे दर्द, सूजन या इंफेक्शन के स्थान पर लाल हो जाना. कुछ टीके बुखार, चकते और दर्द भी दे सकते हैं. गंभीर साइड इफेक्ट के चांस बहुत ही रेयर होते हैं जिसमें दौरा या जानलेवा एलर्जिक रिएक्शन की आशंका होती है.

टीकाकरण न करने के क्या जोखिम हैं?
लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या टीका लेना जरूरी है. इस बारे में ICMR का कहना है कि टीकाकरण न मिलने से संक्रमण को बढ़ावा मिल सकता है. खासकर ऐसे वायरस के खतरे के दौर में जहां तेजी से लोगों में इसका प्रसार हो रहा हो. टीका न लेना उस संक्रमण के जोखिम को और बढ़ावा देना है जिसके खिलाफ टीका तैयार किया गया हो. लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि अगर टीकाकरण नहीं हुआ है तो निश्चित रूप से संक्रमण हो ही जाएगा. बल्कि दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसे लोगों में संक्रमण की संभावना अधिक रहती है.

टीके किन रोगों से बचाव करते हैं?
टीकाकरण ने दुनिया से चेचक को मिटा दिया. इस बीमारी से 30 फीसदी लोगों की मौत हो रही थी. अपंग और लकवाग्रस्त करने वाली बीमारी पोलियो को टीकाकरण से ही खत्म किया जा सका है. इसके साथ ही अन्य घातक रोगों जैसे कि रेबीज, पीला बुखार, डिप्थीरिया, टेटनस, हूपिंग कफ, खसरा, जन्मजात रूबेला और कण्ठमाला जैसी बीमारियों को भी पिछले 5 दशक में व्यापक टीकाकरण के जरिए कंट्रोल किया जा सका है. इसके अलावा हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस ए, न्यूमोकोकल संक्रमण, हेमोफिलसिनफ्लुएंजा संक्रमण, बच्चों में रोटावायरल दस्त और जापानी एन्सेफलाइटिस पर टीकाकरण अभियान चलाकर कंट्रोल करने की कोशिश हो रही है.

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दुनिया की पहली वैक्सीन कौन सी थी और किसलिए बनी थी?
मानव इतिहास में प्लेग, चेचक, हैजा, टाइफाइड, टिटनेस , रेबीज, टीबी, पोलियो जैसी कई महामारी फैली थीं, जिनकी वजह से लाखों-करोड़ों लोगों की जान गई. कई दशकों तक चेचक का प्रकोप जारी रहा था. चेचक दुनिया की पहली बीमारी थी, जिसके टीके की खोज हुई. 1796 में अंग्रेज चिकित्सक एडवर्ड जेनर ने चेचक के टीके का आविष्कार किया. इसके बाद प्रसिद्ध फ्रेंच वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने रेबीज के टीके का सफल परीक्षण किया. उनकी इस खोज ने मेडिकल की दुनिया में क्रांति ला दी और मानवता को एक बड़े संकट से बचा लिया था.

किन बीमारियों की वैक्सीन मौजूद हैं?
WHO के आंकड़े बताते हैं कि आज के वक्त में दुनिया में करीब 20 से अधिक घातक रोगों को टीकों के जरिए कंट्रोल किया जा रहा है. आज इन बीमारियों की वैक्सीन मौजूद हैं-
-कालरा
-डेंगू
-डिप्थीरिया
-हेपेटाइटिस
-हिमोफिलस इंफ्लूएंजा टाइप-बी(HIB)
-HPV
-इंफ्लूएंजा
-जापानी एन्सेफलाइटिस
-मलेरिया
-चेचक
-मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस
-Mumps
-Pertussis
-न्यूमोनिया
-पॉलिमेलिटिस
-रेबीज
-रोटावायरस
-टेटनस
-टिक-बॉर्न एन्सेफलाइटिस
-टीबी
-टाइफायड
-वेरिसेल्ला
-यलो फीवर

इन बीमारियों की वैक्सीन पाइपलाइन में हैं-
इसके अलावा डब्ल्यूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के समन्वय में दो दर्जन से अधिक बीमारियों के टीके पर काम जारी है. जैसे- चिकनगुनिया, डेंगू, Herpes Simplex Virus, HIV-1, Human Hookworm Disease, नीपा वायरस, नोरो वायरस आदि बीमारियां जिनका प्रकोप दुनिया के अलग-अलग इलाकों में है.

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बच्चों और बड़ों के लिए क्या है टीकों का महत्व?
बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए उनका संक्रमण मुक्त होना जरूरी है. इसलिए अधिकांश टीके बच्चों को दिए जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि व्यस्कों का टीकाकरण नहीं होता. उम्र, जगह, संक्रमण के खतरे और हेल्थ एडवाइजरी के आधार पर भी टीकाकरण का अभियान चलाया जाता है. स्वाइन फ्लू, टाइफॉयड, हेपेटाइटिस, टेटनस और निमोनिया के बचाव के लिए व्यस्कों को भी टीका दिया जाता है.

ऐसे ही यदि आपको दक्षिणी अमेरिका या अफ्रीका के किसी देश का दौरा करना है तो आपको बचाव के लिए यलो फीवर वैक्सीन लेने की सलाह दी जाती है. कोरोना संक्रमण में ज्यादा खतरा 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में पाया गया है इसी कारण अधिकांश सरकारों ने वैक्सीन आने पर सबसे पहले 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को पहले ही फेज में टीकाकरण कराने का लक्ष्य तय कर रखा है.

कितना बड़ा है दुनिया के लिए कोरोना का खतरा
पिछले साल चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस की महामारी अब तक दुनियाभर में 6 करोड़ लोगों को संक्रमित कर चुकी है. 14 लाख के करीब लोगों की इससे अबतक जान जा चुकी है. दुनिया के 190 देश इससे प्रभावित हैं और कोई भी इलाका अछूता नहीं है. इसी डर के बीच वैक्सीन की उम्मीद लोगों को राहत दे रही है. तमाम देशों में वैक्सीन बुक कराने की होड़ सी मची हुई है. अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार अब तक कोरोना वैक्सीन के 6.4 बिलियन डोज की बुकिंग हो चुकी है. जबकि 3.2 बिलियन और डोज की खरीद पर बातचीत चल रही है.

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