
वक्फ बोर्ड चर्चा में है. केंद्र की मोदी सरकार वक्फ बोर्ड के 70 साल पुराने कानून में एक बार फिर बदलाव लाने की तैयारी में है. जल्द ही इस संशोधित विधेयक संसद के पटल पर रखा जाएगा. इस विधेयक के जरिए मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की मनमानी पर रोक लगा सकेगी और अधिकारों को भी कम किया जा सकेगा. देशभर में वक्फ की 8.7 लाख से ज्यादा संपत्तियां हैं. वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में कुल मिलाकर करीब 9.4 लाख एकड़ जमीन है. इससे पहले शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में वक्फ अधिनियम में 40 संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने वक्फ बोर्ड की क्या शक्तियां बढ़ाई थीं? कब-कब इसमें बदलाव हुए? जानिए पूरी टाइमलाइन...
शुरुआत में अंग्रेजों द्वारा मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 पेश किया गया. अंग्रेजों ने सबसे पहले मद्रास धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1925 पेश किया था. इसका मुसलमानों और ईसाइयों ने बड़े पैमाने पर विरोध किया. इस तरह मुस्लिमों और ईसाइयों को इस विधेयक से बाहर करने के लिए इसे फिर से तैयार किया गया. बाद में इसे सिर्फ हिंदुओं पर लागू किया गया और इसका नाम बदलकर मद्रास हिंदू धार्मिक और बंदोबस्ती अधिनियम 1927 कर दिया गया. आजादी के बाद वक्फ अधिनियम पहली बार 1954 में संसद द्वारा पारित किया गया. इसके बाद 1995 में एक नया वक्फ अधिनियम पारित किया गया, जिसमें वक्फ बोर्डों को ज्यादा शक्तियां दीं गईं. 2013 में संशोधन हुआ और वक्फ बोर्डों को संपत्ति छीनने की असीमित शक्तियां दी गईं. वक्फ अधिनियम के संशोधन में यह भी प्रावधान किया गया कि इसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है.सीधे शब्दों में कहें तो वक्फ बोर्ड के पास मुस्लिम दान के नाम पर संपत्तियों पर दावा करने की असीमित शक्तियां हैं.
इसका सीधा मतलब यह है कि एक धार्मिक बॉडी को असीमित शक्तियां दी गईं, जिसने वादी को न्यायपालिका से न्याय मांगने से भी रोक दिया. लोकतांत्रिक भारत में किसी अन्य धार्मिक संस्था के पास ऐसी शक्तियां नहीं हैं. वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 3 में कहा गया है कि यदि वक्फ सोचता है कि भूमि किसी मुस्लिम की है तो यह वक्फ की संपत्ति है. वक्त को इस बारे में कोई सबूत देने की जरूरत नहीं है कि उन्हें क्यों लगता है कि जमीन उनके स्वामित्व में आती है. यहां तक कि मुस्लिम कानूनों का पालन करने वाले देशों में भी वक्फ संस्था नहीं है और ना ही किसी धार्मिक संस्था के पास असीमित शक्तियां हैं. वक्फ बॉडी ने विभाजन के दौरान पाकिस्तान से पलायन करने वाले हिंदुओं को कोई भी जमीन वापस नहीं दी. देशभर में एक्ट एक्ट के दुरुपयोग की ऐसी ही खबरें सामने आईं. पहला वक्फ अधिनियम 1954 में पारित किया गया. पहला संशोधन 1995 में और फिर 2013 में संशोधन किया गया.
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वक्फ कानून में कब-कब हुए बदलाव?
वक्फ एक्ट में कई बार बदलाव किए गए हैं ताकि इसे अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सके. 1954 में जब वक्फ बोर्ड का गठन हुआ, तब पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे. यानी नेहरू सरकार के समय वक्फ अधिनियम पारित किया गया था, जिसके बाद इसका सेंट्रलाइजेशन हुआ. भारत से पाकिस्तान गए मुसलमानों की जमीन केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड अधिनियम 1954 के तहत वक्फ बोर्डों को दे दी. 1964 में केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना हुई. 1995 में कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने 1991 के बाबरी मस्जिद विध्वंस की भरपाई के लिए वक्फ बोर्ड अधिनियम में बदलाव किया और वक्फ बोर्डों को भूमि अधिग्रहण के असीमित अधिकार दे दिए. 1995 के संशोधन से वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां मिलीं. वक्फ एक्ट में नए-नए प्रावधान जोड़े. जो संशोधन किया गया, उसमें प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में वक्फ बोर्ड के गठन की अनुमति दी गई. उसके बाद साल 2013 में एक बार फिर संशोधन पेश किए गए और वक्फ को असीमित शक्ति और पूर्ण स्वायत्तता मिल गई. 2013 में भी देश में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे.
इतना ही नहीं, मार्च 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 123 प्रमुख संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को गिफ्ट में दे दिया. 2022 में एक आरटीआई से पता चला कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार ने 2015 में सत्ता में आने के बाद से दिल्ली वक्फ बोर्ड को 101 करोड़ रुपये से ज्यादा सार्वजनिक धन दिया है. अकेले 2021 में 62.57 करोड़ रुपये दिए गए.
कब-कब संशोधन हुए...
वक्फ एक्ट, 1954: यह पहला वक्फ एक्ट था, जिसे भारत में मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों और संस्थाओं के प्रबंधन के लिए लागू किया गया था.
वक्फ एक्ट, 1995: 1954 के एक्ट को संशोधित करके 1995 में नया वक्फ एक्ट लाया गया. इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना और भ्रष्टाचार को कम करना था. इस एक्ट के तहत वक्फ बोर्डों को ज्यादा शक्तियां और जिम्मेदारियां दी गईं. 1995 के एक्ट में वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए राज्य वक्फ बोर्डों का गठन किया गया. वक्फ संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया को ज्यादा संगठित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया.
वक्फ (संशोधन) एक्ट, 2013: यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को और ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लाया गया. इसमें वक्फ संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया और वक्फ बोर्डों की शक्तियों को बढ़ाया गया. साथ ही वक्फ संपत्तियों की जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) मैपिंग अनिवार्य की गई. वक्फ संपत्तियों की GIS मैपिंग को अनिवार्य बनाया गया, ताकि संपत्तियों का सही आकलन और निगरानी की जा सके. इसके अलावा, वक्फ संपत्तियों के विवादों के निपटारे के लिए एक विशेष न्यायालय का गठन किया गया. तत्कालीन सरकार का कहना था कि ये संशोधन वक्फ संपत्तियों का सही और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे और उनका उपयोग मुस्लिम समुदाय और समाज के वंचित वर्गों के लाभ के लिए किया जा सकेगा.
वक्फ बोर्ड की क्या शक्तियां बढ़ाईं गईं?
- 2013 में कांग्रेस की UPA सरकार ने वक्फ बोर्ड की शक्तियों और अधिकारों में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए थे. संशोधन के तहत सभी वक्फ संपत्तियों की पहचान और पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था. इसके लिए वक्फ संपत्तियों की जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) मैपिंग की व्यवस्था की गई, ताकि संपत्तियों का सही और सटीक रिकॉर्ड रखा जा सके.
- वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वक्फ बोर्डों को ज्यादा अधिकार दिए गए. वक्फ बोर्ड बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपनी संपत्तियों का प्रबंधन कर सकते हैं. वक्फ संपत्तियों के विवादों के निपटान के लिए एक विशेष न्यायालय की स्थापना की गई. तत्कालीन सरकार का कहना था कि इससे वक्फ संपत्तियों के विवादों को तेजी से और निष्पक्ष तरीके से निपटाने में मदद मिलेगी.
- केंद्रीय वक्फ काउंसिल को ज्यादा शक्तियां और जिम्मेदारियां दी गईं. इसे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाया गया.
- वक्फ संपत्तियों को विशेष दर्जा दिया गया है, जो किसी ट्रस्ट आदि से ऊपर है. यह अधिनियम 'औकाफ' को रेगुलेट करने के लिए लाया गया था. एक वकीफ द्वारा दान की गई और वक्फ के रूप में नामित संपत्ति को 'औकाफ' कहते हैं. वकीफ उस व्यक्ति को कहते हैं, जो मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त उद्देश्यों के लिए संपत्ति समर्पित करता है.
- संशोधित वक्फ एक्ट 1995 का सेक्शन 3(R) कहता है कि अगर कोई संपत्ति किसी उद्देश्य के लिए पवित्र, धार्मिक या चेरिटेबल परोपरकारी मान ली जाए तो वो वक्फ की संपत्ति हो जाएगी.
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- वक्फ एक्ट 1995 का आर्टिकल 40 कहता है कि यह जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और वक्फ बोर्ड तय करेगा.
- अगर आपकी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दी गई तो आप उसके खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते. आपको वक्फ बोर्ड से ही गुहार लगानी होगी. वक्फ बोर्ड का फैसला आपके खिलाफ आया, तब भी आप कोर्ट नहीं जा सकते. तब आप वक्फ ट्रिब्यूनल में जा सकते हैं. इस ट्राइब्यूनल में प्रशासनिक अधिकारी होते हैं. उसमें गैर-मुस्लिम भी हो सकते हैं.
- वक्फ एक्ट का सेक्शन 85 कहता है कि ट्रिब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है.
अब नए संशोधन में क्या बदलाव की तैयारी?
केंद्र की एनडीए सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में वक्फ बोर्ड की शक्तियां कम करने की तैयारी की है. जो संशोधन प्रस्तावित हैं, उनमें वक्फ बोर्ड के असीमित अधिकारों पर नकेल कसी जाएगी. वक्फ संपत्तियों का अनिवार्य वेरिफिकेशन किया जाए. वक्फ बोर्ड के दावों का अनिवार्य रूप से वेरिफिकेशन किया जाएगा. उन संपत्तियों का भी अनिवार्य वेरिफिकेशन प्रस्तावित किया गया है, जिनके लिए वक्फ बोर्ड और व्यक्तिगत मालिकों ने दावे और जवाबी दावे किए हैं. सूत्रों का कहना है कि कानून में संशोधन की वजहों का भी जिक्र किया है. इसमें जस्टिस सच्चर आयोग और के रहमान खान की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया है. चूंकि, मौजूदा कानून के मुताबिक राज्य और केंद्र सरकार वक्फ संपत्तियों में दखल नहीं दे सकती हैं, लेकिन संशोधन के बाद वक्फ बोर्ड को अपनी संपत्ति जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर में रजिस्टर्ड करानी होगी, ताकि संपत्ति का मूल्यांकन हो सके. राजस्व की जांच हो सकेगी. नए बिल में यह प्रावधान होगा कि सिर्फ मुस्लिम ही वक्फ संपत्ति बना सकते हैं.
बोर्ड के स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाएगा और इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित की जाएगी. राज्यों में वक्फ बोर्ड में महिला सदस्य शामिल होंगी. प्रत्येक राज्य बोर्ड में दो और केंद्रीय परिषद में दो महिलाएं होंगी. अभी तक महिलाएं वक्फ बोर्ड और काउंसिल की सदस्य नहीं हैं. जिन जगहों पर वक्फ बोर्ड नहीं है, वहां कोई ट्रिब्यूनल में जा सकता है. जो अब तक नहीं है. ये संशोधन विधेयक इसी हफ्ते संसद में पेश हो सकता है. वक्फ एक्ट की धारा 19 और 14 में बदलाव होगा. इससे केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव संभव है. वक्फ बोर्ड के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अब अपील की जा सकती है. यह प्रावधान अब तक नहीं था.
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देश में कैसा है वक्फ बोर्ड का स्ट्रक्चर?
देशभर में एक सेंट्रल और 32 स्टेट वक्फ बोर्ड हैं. केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री सेंट्रल वक्फ बोर्ड का पदेन अध्यक्ष होता है. अब तक सरकारों की तरफ से वक्फ बोर्ड अनुदान दिया जाता रहा है. मूल रूप से वक्फ की पूरे देश में लगभग 52,000 संपत्तियां थीं. 2009 तक 4 लाख एकड़ तक की 3 लाख रजिस्टर्ड वक्फ संपत्तियां थीं. आज की तारीख में 8 लाख एकड़ भूमि में फैली 8,72,292 से ज्यादा रजिस्टर्ड वक्फ संपत्तियां हैं. यानी महज 13 साल में वक्फ की जमीन दोगुनी हो गई. आरोप लगता रहा है कि अधिनियम में संशोधन के कारण वक्फ बोर्ड भू-माफिया की तरह व्यवहार कर रहा है और संपत्ति हड़प रहा है. निजी संपत्ति से लेकर सरकारी जमीन तक और मंदिर की जमीन से लेकर गुरुद्वारों तक की जमीन पर वक्फ बोर्ड की कार्रवाई विवादों में है. दुनिया के किसी भी देश में वक्फ बोर्ड के पास इतनी शक्तियां नहीं हैं. यहां तक कि सऊदी या ओमान में भी ऐसा कानून नहीं है. एक बार जब कोई जमीन वक्फ के पास चली जाती है तो उसे पलट नहीं सकते. शक्तिशाली मुसलमानों ने वक्फ बोर्ड पर कब्जा कर लिया है. भारत में वक्फ संपत्ति दुनिया में सबसे ज्यादा है और 200 करोड़ का भी राजस्व नहीं आ रहा है. यहां तक कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार या अदालतें भी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं. वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण रखने वालों के अलावा अन्य लोग भी इस कानून के खिलाफ हैं. सच्चर कमेटी ने भी कहा कि वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता होनी चाहिए. वक्फ संपत्ति का उपयोग सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं.