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Waqf Amendment Bill: वक्फ बिल से क्या बदलेगा, समर्थन और विरोध में क्या दलीलें, आगे का रास्ता क्या? 10 बड़े सवालों के जवाब

वक्फ संशोधन बिल आज लोकसभा में पेश हो रहा है. लोकसभा में बिल पर बहस के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है. सत्ता पक्ष यानी एनडीए को 4 घंटे 40 मिनट का वक्त दिया गया है. इसमें बीजेपी के वक्ता 4 घंटे बोलेंगे. इसके बाद वोटिंग कराई जाएगी.

केंद्रीय वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम व्यक्ति और दो मुस्लिम महिलाओं को भी जगह दी जाएगी. केंद्रीय वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम व्यक्ति और दो मुस्लिम महिलाओं को भी जगह दी जाएगी.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 12:32 PM IST

केंद्र की एनडीए सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) पेश करने जा रही है. दोपहर 12 बजे बिल पर बहस शुरू होगी. बीजेपी समेत एनडीए के सभी सहयोगी दलों ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है. बहस के दौरान लोकसभा में भारी हंगामे के आसार हैं. बिल के खिलाफ विपक्ष लामबंद है. इससे पहले सुबह साढ़े 9 बजे कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में विधेयक के विरोध को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सभी सेक्युलर दलों से बिल का पुरजोर विरोध करने की अपील की है.

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वक्फ को लेकर सवाल उठ रहा है कि इससे क्या बदलाव आएगा? इस बिल के समर्थन और विरोध में क्या-क्या दलीलें जा रही हैं और आगे का रास्ता क्या होगा? जानिए 10 बड़े सवालों के जवाब...

1. कब बिल पेश होना है?

दोपहर 12 बजे संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पेश करने जा रहे हैं. लोकसभा में बिल पर बहस के लिए 8 घंटे का समय तय किया गया है. सत्ता पक्ष यानी एनडीए को 4 घंटे 40 मिनट का वक्त दिया गया है. इसमें बीजेपी के वक्ता 4 घंटे बोलेंगे. इसके बाद वोटिंग कराई जाएगी. ये फैसला मंगलवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में हुआ, जिसे विपक्षी नेता बीच में ही छोड़कर चले गए थे. बीजेपी की तरफ बोलने वाले पहले वक्ता जगदंबिका पाल होंगे, जो वक्फ संशोधन बिल पर बनी जेपीसी के अध्यक्ष थे.

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2. एनडीए के सहयोगी दलों का क्या रुख?

वक्फ संशोधन बिल को लेकर जेडीयू, टीडीपी और एलजेपी (R) के रुख को लेकर कल तक अटकलें लगती रहीं. लेकिन तीनों दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर बिल का समर्थन करने को कहा है. यानी लोकसभा में नंबर को लेकर सरकार की बड़ी चिंता खत्म हो गई है. इस बिल पर बहस के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू रात साढ़े 8 बजे अपना जवाब देंगे और इसी जवाब के बाद इस बिल पर वोटिंग कराई जाएगी.

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3. विपक्ष की क्या मांग?

विपक्षी नेताओं की मांग है कि इस बिल पर लोकसभा में 12 घंटे बहस होनी चाहिए और सभी सदस्यों को अपनी राय देने के लिए ज्यादा से ज्यादा समय मिलना चाहिए लेकिन कमेटी ने इस मांग को नहीं माना और कुल 8 घंटे बहस पर सहमति बनी. दरअसल, कमेटी का कहना था कि कुछ सदस्य बहस के लिए 4 से 5 घंटे देने की मांग कर रहे हैं. इसलिए दोनों पक्षों को सुनने के बाद बहस के लिए आठ घंटे का समय देना सही होगा.

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4. सभी पार्टियों ने जारी कर दिया व्हिप

इस फैसले के बाद बीजेपी, जेडीयू, टीडीपी और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत सभी राजनीतिक दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है. इसका मतलब ये है कि इन पार्टियों ने अपने सभी सांसदों को वोटिंग के दौरान लोकसभा में उपस्थित रहने का आदेश दिया है और जो सांसद ऐसा नहीं करेगा, उसके खिलाफ उसकी पार्टी ऐक्शन ले सकती है.

5. बिल पर क्या विवाद?

केंद्र सरकार का कहना है कि वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार करना है. वक्फ अधिनियम 1995 मुसलमानों द्वारा दान की गई संपत्तियों के प्रबंधन को नियंत्रित करता है. वक्फ विधेयक पर विपक्ष की ओर से आवाज उठा रहे AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना है. मुस्लिम संगठनों का दावा है कि नए संशोधन के पारित हो जाने के बाद कलेक्टर राज अस्तित्व में आ जाएगा और वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी नहीं होगा कि कौन सी संपत्ति वक्फ है और कौन सी नहीं. ओनरशिप के संबंध में कलेक्टर का फैसला आखिरी होगा. 

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मुस्लिम संगठनों का कहना है कि अब तक यह अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल के पास है. वक्फ एक्ट में प्रस्तावित संशोधन संविधान द्वारा दी गई मजहबी आजादी के भी खिलाफ है और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 25 का उल्लंघन है. हालांकि, सरकार का कहना है कि विपक्ष की तरफ से भ्रम फैलाया जा रहा है. अगर बिल का विरोध करना है तो तर्क होने चाहिए. अभी सिर्फ गुमराह किया जा रहा है. ये भी बताना चाहिए कि इसमें क्या गैरसंवैधानिक है. झूठ बात फैलाने से काम नहीं चलेगा.

6. कब संशोधन बिल आया?

वक्फ विधेयक में संशोधन के लिए पिछले साल अगस्त में संसद में बिल पेश किया गया. हालांकि, विपक्ष और विभिन्न मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया था. कई सप्ताह तक चर्चा चली और तीखी बहस भी हुई. जेपीसी ने विधेयक में 14 संशोधनों को मंजूरी दी. विपक्षी सांसदों द्वारा प्रस्तावित 44 संशोधनों को जगदंबिका पाल के नेतृत्व वाली कमेटी ने खारिज कर दिया था. इस विधेयक को अंततः फरवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दे दी गई.

7. बिल पर विपक्ष का क्या स्टैंड?

विपक्षी दल वक्फ संशोधन विधेयक पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इसे असंवैधानिक और मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बीजेपी के सहयोगी दलों से इस बिल के खिलाफ वोट करने की अपील की है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हैं. विधेयक के पीछे सरकार का एजेंडा विभाजनकारी है और इसे हराने के लिए वे संसद में मिलकर काम करेंगे.

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8. लोकसभा और राज्यसभा में क्या है नंबरगेम?

लोकसभा में NDA के 293 सांसद हैं. इंडिया गठबंधन के पास 235 सांसद हैं. अन्य को भी जोड़ दें तो ये संख्या 249 तक ही जाती है. जबकि बहुमत का नंबर 272 है. विपक्ष को लगता रहा कि अगर 16 सांसद वाली टीडीपी और 12 सांसद वाली जेडीयू वक्फ बिल का विरोध कर दें तो गेम पलट सकता है, क्योंकि तब NDA का नंबर घटकर 265 हो जाएगा और बिल के विरोध में नंबर 277 पहुंच जाएगा. लेकिन टीडीपी हो या जेडीयू दोनों मजबूती से सरकार के साथ हैं. यानी लोकसभा से वक्फ संशोधन बिल पास होने का रास्ता साफ है. 

राज्यसभा में भी एनडीए के पास बहुमत

राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं. एनडीए के पास 125 सांसद हैं. इनसे 98 सांसद बीजेपी के हैं. 9 सीटें खाली हैं. ऐसे में एनडीए को विधेयक पारित कराने के लिए 118 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. यानी एनडीए के पास राज्यसभा में संख्याबल ज्यादा है. विपक्षी दलों के पास राज्यसभा में 85 सांसद हैं. कांग्रेस के सिर्फ 27 सांसद हैं और 30 सांसद ऐसे हैं, जो दोनों में से किसी भी गठबंधन से नहीं हैं. 

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9. आगे क्या होगा?

लोकसभा में पारित होने के बाद वक्फ संशोधन विधेयक को राज्यसभा के पटल पर रखा जाएगा. 3 अप्रैल को ये बिल राज्यसभा में पेश होगा और वहां भी 8 घंटे की बहस के बाद इस पर वोटिंग कराई जाएगी. अगर राज्यसभा में भी ये बिल पास हो गया तो इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अगले एक हफ्ते से चार हफ्तों में ये बिल देश में वक्फ की सम्पत्तियों के लिए लागू हो जाएगा.

10. बिल पारित होने से क्या बदलाव आएगा?

  • अगर ये बिल पास होता है तो वक्फ कानून में बड़े बदलाव आएंगे. वक्फ बोर्डों की संरचना में भी बदलाव देखने को मिलेगा. गैर-मुस्लिमों को बोर्ड के सदस्यों के रूप में शामिल करना अनिवार्य हो जाएगा. यह कानून लागू होने के छह महीने के भीतर हर वक्फ संपत्ति को केंद्रीय डेटाबेस पर पंजीकृत करना अनिवार्य बनाता है. हालांकि, यह वक्फ ट्रिब्यूनल को कुछ परिस्थितियों में समय-सीमा बढ़ाने का अधिकार देता है. विवाद की स्थिति में राज्य सरकार के अधिकारी को यह निर्धारित करने का अधिकार होगा कि संपत्ति वक्फ है या सरकार की. इससे पहले विधेयक में जिला कलेक्टर को निर्धारण प्राधिकारी बनाने के प्रस्ताव पर काफी विवाद देखने को मिला था. मुस्लिम संगठनों का तर्क है कि अधिकारी द्वारा सरकार के पक्ष में निर्णय दिए जाने की संभावना है.
  • संशोधन विधेयक के मुताबिक, अब दान में मिली संपत्ति ही वक्फ की होगी. वक्फ बोर्ड में दो महिलाओं के साथ दूसरे धर्म से जुड़े दो लोग शामिल हो सकेंगे. जमीन पर दावा करने वाला अपील कर सकेगा. ट्रिब्यूनल, रेवेन्यू कोर्ट में अपील कर सकेगा. सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में अपील हो सकेगी. ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी जा सकेगी.
  • इसके अलावा, कोई भी व्यक्ति उसी जमीन को दान में दे पाएगा, जो उसके नाम पर रजिस्टर्ड होगी. अगर कोई व्यक्ति किसी और के नाम पर रजिस्टर्ड जमीन को दान में देता है तो इसे गैर-कानूनी माना जाएगा. वक्फ भी ऐसी संपत्तियों पर अपना दावा नहीं कर पाएगा. 'वक्फ-अल-औलाद' के तहत महिलाओं को भी वक्फ की जमीन में उत्तराधिकारी माना जाएगा. इसका मतलब ये है कि जिस परिवार ने वक्फ की जमीन 'वक्फ-अल-औलाद' के लिए दान में दी है, उस जमीन से होने वाली आमदनी सिर्फ उन परिवारों के पुरुषों को नहीं मिलेगी, बल्कि इसमें महिलाओं का भी हिस्सा होगा. वक्फ में दी गई जमीन का पूरा 'ब्यौरा' ऑनलाइन पोर्टल पर 6 महीने के अंदर अपलोड करना होगा और कुछ मामलों में इस समय अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है.

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  • हालांकि, बड़ा बदलाव ये है कि अब वक्फ में दी गई हर जमीन का ऑनलाइन पोर्टल पर डेटाबेस होगा और वक्फ बोर्ड इन सम्पत्तियों के बारे में किसी बात को छिपा नहीं पाएगा. किस जमीन को किस व्यक्ति ने दान में दिया. वो जमीन उसके पास कहां से आई. वक्फ बोर्ड को उससे कितने पैसे की आमदनी होती है. और उस संपत्ति की देख-रेख करने वाले 'मुतव्वली' को कितनी तनख्वाह मिलती है, ये जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध होगी और इससे वक्फ की सम्पत्तियों में पारदर्शिता आएगी और वक्फ को होने वाला नुकसान कम होगा.
  • बड़ा बदलाव ये भी है कि जिन सरकारी संपत्तियों पर वक्फ अपना अधिकार बताता है, उन संपत्तियों को पहले दिन से ही वक्फ की सम्पत्ति नहीं माना जाएगा. अगर ये दावा किया जाता है कि कोई सरकारी संपत्ति वक्फ की है तो ऐसी स्थिति में राज्य सरकार एक नामित अधिकारी से जांच कराएगी और ये कलेक्टर रैंक से ऊपर का अधिकारी होगा. अगर इस रिपोर्ट में वक्फ का दावा गलत निकलता है तो सरकारी सम्पत्ति का पूरा ब्यौरा Revenue Record में दर्ज किया जाएगा और ये सरकारी संपत्ति वक्फ की नहीं मानी जाएगी. ये नियम उन सरकारी संपत्तियों पर भी लागू होगा, जिन पर पहले से वक्फ का दावा और कब्जा है. कोई अन्य सम्पत्ति या जमीन वक्फ की है या नहीं, इसकी जांच कराने के लिए राज्य सरकार को जरूरी अधिकार दिए गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव ये आएगा कि वक्फ बिना किसी दस्तावेज और सर्वे के किसी जमीन को अपना बताकर उस पर कब्जा नहीं कर सकेगा. 
  • वक्फ बोर्ड में नियुक्त किए गए सांसद और पूर्व जजों का भी मुस्लिम होना जरूरी नहीं होगा. सरकार का कहना है कि इससे वक्फ में पिछड़े और गरीब मुसलमानों को भी जगह मिलेगी और वक्फ में मुस्लिम महिलाओं की भी हिस्सेदारी होगी. राज्यों के वक्फ बोर्ड में भी दो मुस्लिम महिलाएं और दो गैर-मुस्लिम सदस्य ज़रूर होंगे और शिया, सुन्नी और पिछड़े मुसलमानों से भी एक-एक सदस्य को जगह देना अनिवार्य होगा. इनमें बोहरा और आगाखानी समुदायों से भी एक-एक सदस्य होना चाहिए और ये वो समुदाय हैं, जिनकी संख्या बहुत कम है और जो बाकी मुसलमानों से अलग होते हैं क्योंकि ये ना तो दिन में पांच वक्त की नमाज़ पढ़ते हैं और ना ही हज की यात्रा पर जाते हैं.

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  • सरकार ने इन दोनों मुस्लिम संप्रदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड बनाने का भी प्रावधान इस कानून में जोड़ा है. लोगों के पास वक्फ Tribunal के फैसले के खिलाफ 90 दिनों में Revenue कोर्ट, सिविल कोर्ट और हाई कोर्ट में अपील दायर करने का अधिकार होगा, जो मौजूदा कानून में नहीं है. केंद्र और राज्य सरकारों के पास वक्फ के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार होगा, जिससे किसी भी तरह की बेईमानी और भ्रष्टाचार को रोका जा सकेगा. वक्फ बोर्ड सरकार को कोई भी जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकता और वक्फ बोर्ड ये भी नहीं कह सकता कि कोई जमीन आज से 200-300 या 500 साल पहले किसी इस्लामिक काम के लिए इस्तेमाल हो रही थी तो वो जमीन उसकी है. ये मनमानी अब इस नए बिल से समाप्त हो जाएगी.
  • वर्ष 1950 में पूरे देश में वक्फ बोर्ड के पास सिर्फ 52 हज़ार एकड़ जमीन थी, जो वर्ष 2009 में 4 लाख एकड़ हो गई. 2014 में 6 लाख एकड़ हो गई और अब वर्ष 2025 में वक्फ बोर्ड के पास देश की कुल 9 लाख 40 हज़ार एकड़ जमीन है. देश में सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड के पास है. 

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