Advertisement

क्या चार्जशीट के बाद बृजभूषण की होगी गिरफ्तारी, जानिए केस में अब आगे क्या होगा?

6 महिला पहलवानों द्वारा की गई शिकायत के मामले में दर्ज केस में पुलिस ने रॉउज एवन्यू कोर्ट में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धारा 354, 354-A एवं D के तहत चार्जशीट दाखिल की है.  इस मामले में अगर बृजभूषण दोषी भी पाए जाते हैं, तो उन्हें अधिकतम 5 साल की सजा होगी.

बृजभूषण शरण सिंह (फाइल फोटो) बृजभूषण शरण सिंह (फाइल फोटो)
अरविंद ओझा
  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2023,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

बीजेपी सांसद बृजभूषण के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के दो मामलों में दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को चार्जशीट दाखिल की. नाबालिग द्वारा दर्ज केस में बृजभूषण को राहत देते हुए दिल्ली पुलिस ने POCSO का मामला रद्द करने की सिफारिश की है. जबकि 6 महिला पहलवानों द्वारा की गई शिकायत के मामले में दर्ज केस में पुलिस ने रॉउज एवन्यू कोर्ट में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धारा 354, 354-A एवं D के तहत चार्जशीट दाखिल की है.  ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब बृजभूषण की गिरफ्तारी होगी या नहीं? आइए जानते हैं कि अब इस केस में आगे क्या होगा? 

Advertisement

सबसे पहले ये जानते है कि 6 महिला पहलवानों की शिकायत पर चार्जशीट में जिन धाराओं का जिक्र हैं, वे क्या हैं और किन मामलों में लगाई जाती हैं और उनमें कितनी सजा का प्रावधान है?

IPC की धारा 354 : अगर किसी महिला की मर्यादा और सम्मान को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करना या उसके साथ गलत मंशा के साथ जोर जबरदस्ती की गई हो. 

सजा: इस धारा के तहत आरोपी पर दोष सिद्ध हो जाने पर उसे कम से कम एक साल की सजा और अधिकतम 5 साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है.

गैर जमानती धारा: इसके तहत किया गया अपराध एक संज्ञेय और गैर-जमानती होता है यानी मजिस्ट्रेट कोर्ट ही मामले पर विचार करने और अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद जमानत दे सकता है.

Advertisement

IPC की धारा-354 ए : अगर कोई व्यक्ति शारीरिक संपर्क या अवांछित और स्पष्ट यौन संबंध का प्रस्ताव देता है या यौन अनुग्रह की मांग या अनुरोध करता है, महिला की इच्छा के बिना उसे अश्लील कंटेंट दिखाता या यौन संबंधी टिप्पणियां करता है, तो वह यौन उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा. 

सजा: अगर कोई उप-धारा (1) के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) के तहत दोषी पाया जाता है तो, उसे कठोर कारावास की सजा सुनाई जा सकती है. इस सजा को तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना या दोनों ही सजा सुनाई जा सकती है. अगर कोई उप-धारा (1) के खंड (iv) में दोषी पाया जाता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा हो सकती है, जिसे एक साल तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना या दोनों की सजा मिल सकती है. 

जमानती अपराध: यह मामला संज्ञेय है लेकिन जमानती अपराध है, जिसका अर्थ है कि शिकायत मिलने पर पुलिस को शिकायत दर्ज करनी होगी, लेकिन आरोपी को पुलिस स्टेशन से ही जमानत मिल सकती है.

आईपीसी की धारा 354 डी : अगर कोई पुरुष किसी महिला का पीछा करता है और संपर्क करता है, या महिला की इच्छा के विरुद्ध या साफ मना करने के संकेत के बावजूद बार-बार व्यक्तिगत बातचीत को बढ़ाने के लिए संपर्क करने का प्रयास करता है; या इंटरनेट, ईमेल या इलेक्ट्रॉनिक संचार के किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल कर महिला की निगरानी करता है, वह स्टॉकिंग के तहत दोषी माना जाएगा. 

Advertisement

सजा: अगर आरोपी पहली बार दोषी पाया जाता है तो उसे तय कारावास की सजा हो सकती है, जिसके तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, या उस पर जुर्माने ठोका जा सकता है. वहीं दूसरी या उससे ज्यादा बार दोषी पाए जाने पर तय कारावास की सजा हो सकती है, जिसे पांच साल तक बढ़ सकता है या जुर्माना लगाया जा सकता है. 

जमानती-गैरजमानती: अगर कोई इस धारा के तहत पहली बार दोषी पाया जाता है तो उसे जमानत मिल सकती है, लेकिन अगर कोई एक से ज्यादा बार यह हरकत करता है तो यह अपराध गैर जमानती हो जाता है.

7 साल से कम सजा में तुरंत गिरफ्तारी जरूरी नहीं

यानी बृजभूषण सिंह पर जो धाराएं लगी हैं, उनमें अगर उन्हें अधिकतम सजा भी होती है, तो वह 5 साल तक की ही होगी. सुप्रीम कोर्ट के  2 जुलाई 2014 को अरनेश कुमार बनाम बिहार सरकार के मामले में दिए गए फैसले के मुताबिक, जिन अपराधों में सात साल से कम की सजा है, उनमें पुलिस तत्काल गिरफ्तारी नहीं करेगी. पुलिस शिकायत के बाद आरोपी को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है. आरोपी जांच में सहयोग करता है तो गिरफ्तारी जरूरी नहीं है. अगर लगता है कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे या देश से भाग सकते हैं, तभी गिरफ्तार करेगी. 

Advertisement

पुलिस के मुताबिक, बृज भूषण को जब भी जांच संबंधी संपर्क किया गया, उन्होंने पूरा सहयोग किया, इसलिए उनकी गिरफ्तारी की कोई खास वजह नहीं थी.

POCSO एक्ट में मिली राहत

दिल्ली पुलिस की ओर से बृजभूषण को POCSO एक्ट में दर्ज केस के मामले में बड़ी राहत मिली है. दरअसल, अपने बयान में पहले जहां नाबालिग महिला पहलवान ने बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. हालांकि, बाद में उसने बयान में बदलाव करते हुए कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष पर भेदभाव का आरोप लगाया थे. दूसरे बयान में नाबालिग ने यौन शौषण का आरोप वापस लेते हुए कहा कि मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ था, मैंने बहुत मेहनत की थी, मैं डिप्रेशन में थी. इसलिए गुस्से में यौन शौषण का मामला दर्ज करवाया था. ऐसे में पुलिस ने POCSO को वापस लेने की सिफारिश की थी. 

POCSO यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट. इस कानून को 2012 में लाया गया था. ये बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन शोषण को अपराध बनाता है. ये कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों, दोनों पर लागू होता है. इसका मकसद बच्चों को यौन उत्पीड़न और अश्लीलता से जुड़े अपराधों से बचाना है. पॉक्सो एक गैर-जमानती अपराध है. इसमें दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 साल की जेल और अधिकतम उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. अगर बृजभूषण के खिलाफ POCSO के तहत चार्जशीट दाखिल होती तो उनकी मुसीबतें बढ़ सकती थी. 

Advertisement

क्या चार्जशीट के बाद अब पहलवानों का आंदोलन हो जाएगा खत्म?

7 जून को पहलवानों ने खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के बुलावे पर उनके घर जाकर उनसे मुलाकात की थी. 6 घंटे तक चली इस बैठक में अनुराग ठाकुर ने पहलवानों को आश्वासन दिया था कि इस मामले में 15 जून तक दिल्ली पुलिस की चार्जशीट दाखिल हो जाएगी. साथ ही कहा था कि पहलवानों पर 28 मई को दर्ज केस वापस ले लिए जाएंगे. इसके अलावा जल्द ही कुश्ती संघ के चुनाव कराने का ऐलान किया जाएगा. 

खेल मंत्री इसे मिले आश्वासन के बाद 15 जून तक पहलवानों ने अपना आंदोलन रद्द कर दिया था. अब 15 जून को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है. इसके अलावा पहलवानों पर दर्ज केस वापस लेने की भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. साथ ही कुश्ती संघ के चुनाव 6 जुलाई को कराने का ऐलान किया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि अब पहलवान अपना आंदोलन खत्म कर सकते हैं. 

साक्षी मलिक ने क्या कहा?

हालांकि, रेसलर साक्षी मलिक ने कहा है कि अभी चार्जशीट की कॉपी उन्हें नहीं  मिली है. चार्जशीट की कॉपी मिलने के बाद पता चलेगा कि बृजभूषण पर कौन कौन सी धाराएं लगाई गई हैं. इसके बाद ही हम आंदोलन पर कोई फैसला करेंगे. 

Advertisement

 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement