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रूम से लेकर टॉयलेट तक करना पड़ता है शेयर, नाइट शिफ्ट में सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा... किस हाल में हैं देश की महिला डॉक्टर्स?

आजतक से बात करते हुए डॉ अरुणिमा ने कहा कि सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट (सीपीए) लागू करने की मांग एक बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि महिला डॉक्टरों को कभी-कभी अपने पुरुष समकक्षों के साथ कॉमन वॉशरूम शेयर करना पड़ता है, जो सुरक्षा का मुद्दा है. डॉ अरुणिमा ने कहा कि अस्पताल के भीतर अजनबियों की सख्त निगरानी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.

कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं (फोटो: PTI) कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं (फोटो: PTI)
aajtak.in
  • कोलकाता,
  • 15 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 4:37 AM IST

कोलकाता में 31 साल की ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक लोग सड़कों पर हैं और विरोध कर रहे हैं. इस घटना के बाद मेडिकल जगत के लोग आगे आए हैं और मांग उठाई है कि ड्यूटी करते समय उन्हें सुरक्षित महसूस कराया जाए.

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आजतक ने डॉक्टर्स से बात की, जिन्होंने उन खतरों के बारे में बताया जो लगातार उनके सिर पर मंडराते रहते हैं. दिल्ली में राम मनोहर लोहिया अस्पताल में काम करने वाली रेजिडेंट महिला डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बात की. उन्होंने उन प्रमुख मुद्दों के बारे में बताया जिनका सामना उन्हें देर तक काम करते हुए और नाइट शिफ्ट के दौरान करना पड़ता है.

महिला डॉक्टरों के पास नहीं हैं डीडीआर

महिला डॉक्टर ने कहा, 'सरकारी अस्पताल में नाइट शिफ्ट में काम करना बहुत कठिन है. हमारे पास खासकर महिलाओं के लिए डीडीआर (ड्यूटी डॉक्टर रूम) नहीं हैं. मुझे नहीं लगता कि यह सुविधा किसी सरकारी अस्पताल में है. सभी शौचालय बंद हैं या इस्तेमाल करने की हालत में नहीं हैं. हमारे पास पीने के पानी की सुविधा भी नहीं है. रात की शिफ्ट में, हमें पानी के लिए कैंटीन या कहीं और जाना पड़ता है. जब भी हम इन सुविधाओं के लिए पूछते हैं, तो हमें बताया जाता है कि हम मानवता की सेवा कर रहे हैं. ज्यादातर रेजिडेंट डॉक्टर्स को इसी का सामना करना पड़ता है.'

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पुरुष के साथ शेयर करना पड़ता है डीडीआर

दूसरी डॉक्टर ने बताया, 'कुछ विभागों के पास डीडीआर है, लेकिन उन्हें शेयर किया जाता है. पुरुष और महिला उसे शेयर करते हैं. भले ही डीडीआर में एक बेड हो, उसे शेयर करना होगा. डीडीआर में कुंडी नहीं है, कई बार तो मरीज के परिजन भी डीडीआर में चले आते हैं. वहां कोई सुरक्षा नहीं है. मान लीजिए, एक पुरुष और एक महिला डॉक्टर रात की शिफ्ट में हैं, तो उन्हें वह जगह शेयर करनी होगी.'

उन्होंने कहा, 'इसके अलावा, हमारे पास बुनियादी स्वच्छता तक नहीं है, हमारे पास शौचालय नहीं हैं. हम अपना दोपहर का भोजन, नाश्ता छोड़ देते हैं लेकिन पूरे भारत में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाता है.'

'ऐसे माहौल में हम कैसे सेवाएं दे पाएंगे'

पीजीआई चंडीगढ़ में न्यू ओपीडी के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज अरोड़ा ने कहा, 'डॉक्टरों की सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. पीजीआई ने यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं कि विरोध के बावजूद मरीजों को परेशानी न हो. हम सुरक्षा चाहते हैं. यहां एक मेडिकल कॉलेज है, लेकिन न उचित इन्फ्रास्ट्रक्चर है और न ही वॉशरूम. जब हमारे साथ ऐसे जघन्य अपराध हो रहे हों तो हमें कैसे सेवाएं दे पाएंगे? हम चाहते हैं कि उचित जांच हो.'

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डॉ. अरोड़ा ने कहा, 'हम यहां काम करने आते हैं. हम दिन-रात काम करते हैं. हम रात की ड्यूटी करते हैं. हमारे माता-पिता सोचते हैं कि हम सुरक्षित हैं, लेकिन इस (कोलकाता) घटना से, वह भरोसा टूट गया है. हम कैसे सुरक्षित हैं?' उन्होंने कहा कि हम अस्पताल के अंदर सुरक्षा चाहते हैं.

अस्पताल से दूर हैं लीज पर लिए गए हॉस्टल

महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) के अध्यक्ष डॉ. संपत सूर्यवंशी ने भी इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा, 'मुंबई में रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए सरकारी अस्पतालों में कोई हॉस्टल नहीं है और लीज पर लिए गए कुछ हॉस्टल अस्पतालों से बहुत दूर हैं. इसलिए जब कुछ डॉक्टरों को देर रात कॉल आती है तो उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता है.'

वॉशरूम तक करना पड़ रहा शेयर

यूपी के केजीएमयू में माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कार्यरत डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है और कोलकाता की घटना के बाद ज्यादातर महिला डॉक्टर अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. डॉ. वर्मा ने बताया कि देर रात की शिफ्ट काम का हिस्सा है, लेकिन हर तरह के मरीज से निपटना डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय है, जिन्हें दुर्व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है.

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आजतक से बात करते हुए डॉ अरुणिमा ने कहा कि सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट (सीपीए) लागू करने की मांग एक बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि महिला डॉक्टरों को कभी-कभी अपने पुरुष समकक्षों के साथ कॉमन वॉशरूम शेयर करना पड़ता है, जो सुरक्षा का मुद्दा है. डॉ अरुणिमा ने कहा कि अस्पताल के भीतर अजनबियों की सख्त निगरानी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.

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