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भारतीय वायुसेना की तैयारी... महिला फाइटर पायलट उड़ाएंगी LCH Prachand

जोधपुर एयरबेस पर LCH Prachand की तैनाती के बाद अब भारतीय वायुसेना की तैयारी है कि इसे महिला पायलट उड़ाएं. इसकी योजना तैयार की जा रही है. क्योंकि वायुसेना का महिला फाइटर पायलट्स ने एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर उड़ाया हुआ है. इसलिए इनकी तैनाती प्रचंड हेलिकॉप्टर के लिए की जा सकती है.

3 अक्टूबर 2022 को LCH Prachand को भारतीय वायुसेना के जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया गया है. 3 अक्टूबर 2022 को LCH Prachand को भारतीय वायुसेना के जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया गया है.
मंजीत नेगी
  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 6:38 PM IST

हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर प्रचंड (LCH Prachand) को महिला फाइटर पायलट भी उड़ाएंगी. भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) इसकी तैयारी कर रहा है.  भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने इंडिया टुडे को बताया कि जल्द ही प्रचंड की फ्लीट के लिए महिला फाइटर पायलटों की भर्ती की जाएगी. क्योंकि भारतीय वायुसेना की महिला वायुवीर एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) उड़ा रही हैं. 

स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर प्रचंड को 3 अक्टूबर 2022 को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल अनिल चौहान और वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल वीआर चौधरी की मौजूदगी में जोधपुर के एयरबेस पर वायुसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद राजनाथ सिंह ने ही इस हेलिकॉप्टर के नाम का खुलासा किया था. फिर इस हेलिकॉप्टर में उड़ान भी भरी थी. यह हेलिकॉप्टर ऐसा है कि ये किसी भी मौसम और जगह पर उड़ान भर सकता है. अपनी कैटेगरी में प्रचंड दुनिया का सबसे बेहतरीन हेलिकॉप्टर है. 

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लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल वहां किया जाता है जहां पर फाइटर जेट्स की जरुरत नहीं होती. भारत में बना LCH दुनिया का इकलौता अपनी कैटेगरी का सर्वश्रेष्ठ हेलिकॉप्टर है. ये यह अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकता है. वहां पर हमला कर सकता है. फाइटर जेट से कम रफ्तार में ज्यादा सटीक और घातक हमला करने सक्षम ये होते हैं ये हेलिकॉप्टर. क्योंकि फाइटर जेट ज्यादा गति में उड़ते हैं. उनका इस्तेमाल अलग होता है. सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए ये हेलिकॉप्टर ज्यादा उपयुक्त होते हैं. 

15.5 फीट ऊंचे लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर यानी LCH की की लंबाई 51.10 फीट है. इसे दो पायलट मिलकर उड़ाते हैं. एक फ्लाइंग करता है तो दूसरा नेविगेशन और हथियार वगैरह देखता है. 550 किलोमीटर की कॉम्बैट रेंज में यह अधिकतम 268 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. लगातार सवा तीन घंटे उड़ान भर सकता है. इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता हिमालय पर मौजूद चीन सीमाओं की निगरानी में होगी. 

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LCH 16,400 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसकी मदद से चीन की हालत पस्त की जा सकती है. क्योंकि अभी दुनिया में इस तरह का कोई हेलिकॉप्टर नहीं है, जो इतनी ऊंचाई पर हिमालय में उड़ सके. इसका कॉकपिट ग्लास से बना है. साथ ही बॉडी फ्रेम कंपोजिट है. यानी इस पर सामान्य असॉल्ट राइफलों की गोलियों का भी असर नहीं होगा. न ही इसके रोटर यानी ब्लेड्स पर.- 

जैसे-जैसे लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की तैनाती होती जाएगी. देश में मौजूद पुराने सोवियत संघ के समय के Mi-25 के स्क्वॉड्रन को खत्म कर दिया जाएगा. Mi-35 हेलिकॉप्टरों का आधुनिकीकरण हो रहा है. ताकि उनकी लाइफ बढ़ सके. इनका भी एक स्क्वॉड्रन तो खत्म कर दिया गया है. आमतौर पर एक स्क्वॉड्रन में 17 से 20 हेलिकॉप्टर होते हैं. यानी जहां भी ये हेलिकॉप्टर तैनात होंगे वहां पर दुश्मन हमला करने से पहले कई बार सोचेगा. 

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की चोंच यानी कॉकपिट के ठीक नीचे 20 mm की तोप है. हेलिकॉप्टर में चार हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी चार एक जैसे या अलग-अलग प्रकार के हथियार लगाए जा सकते हैं. जैसे - चार 12 FZ275 लेजर गाइडेड रॉकेट्स या हवा से हवा में मार करने वाली चार Mistral मिसाइलें. चार ध्रुवास्त्र एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें. या चार क्लस्टर बम, अनगाइडेड बम, ग्रेनेड लॉन्चर लगाया जा सकता है. या फिर इन सबका मिश्रण सेट कर सकते हैं. 

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