
चुनाव आयोग ने इस साल के शुरुआत में हुए लोकसभा और कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों से जुड़ा डाटा जारी कर दिया है. डेटा के अनुसार लोकसभा चुनावों में 64.4 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जिसमें महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुष मतदाताओं से ज्यादा थी.
चुनाव आयोग ने कहा कि महिला मतदाताओं का प्रतिशत 65.78 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 65.55 प्रतिशत रहा.
चुनाव आयोग के पदाधिकारियों ने दावा किया कि इस तरह का विस्तृत डेटा दुनिया भर के लोकतंत्रों में किसी भी चुनाव प्रबंधन निकाय द्वारा साझा नहीं किया जाता है.
लोकसभा चुनाव, 2024 और चार विधानसभा चुनावों आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के आंकड़े संसदीय चुनावों के साथ चुनाव आयोग द्वारा खुलासा न करने के आरोपों की पृष्ठभूमि में आए हैं.
800 महिला उम्मीदवारों ने लड़ा चुनाव
चुनाव में महिलाओं की भागीदारी का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या 800 थी, जबकि 2019 में यह 726 थी.
महाराष्ट्र में सबसे अधिक 111 महिला उम्मीदवार मैदान में थीं, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 80 और तमिलनाडु में 77 महिलाएं थीं. साथ ही कुछ 543 लोकसभा क्षेत्रों में से 152 क्षेत्र ऐसे थे, जहां कोई महिला उम्मीदवार नहीं थी.
वोटरों की संख्या में हुई 7.43% की वृद्धि
वहीं, वोटरों की संख्या में 7.43 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो साल 2019 में 91.19 करोड़ के मुकाबले इस बार 97.97 करोड़ से ज्यादा नागरिकों ने खुद को मतदाताओं के रूप में पंजीकृत किया. चुनाव आयोग ने कहा कि इन पंजीकृत मतदाताओं में से 64.64 करोड़ ने 2024 में वोट डाले थे, जबकि 2019 में ये संख्या 61.4 करोड़ थी. साथ ही 13 हजार से ज्यादा 27 प्रतिशत थर्ड जेंडर के मतदाताओं ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
पोल पैनल के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक जो मतदाता सूची में पंजीकरण कराता है, उसे मतदाता के रूप में परिभाषित किया गया है. जो निर्वाचक अंततः मतदान करता है उसे मतदाता कहा जाता है.
आयोग के मुताबिक, ईवीएम और डाक मतपत्र से कुल 64,64,20,869 वोट पड़े. इसमें ईवीएम पर 64,21,39,275 वोट पड़े, जिनमें 32,93,61,948 पुरुष मतदाता और 31,27,64,269 महिला मतदाता थे. लगभग 43 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल डाक मतपत्र किया.
असम में हुआ सबसे ज्यादा मतदान
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, असम में धुबरी संसदीय क्षेत्र में सबसे अधिक 92.3 प्रतिशत मतदान हुआ तो जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सबसे कम 38.7 प्रतिशत मतदान हुआ. जबकि 2019 में यह 14.4 प्रतिशत था. साथ ही कम-से-कम 11 संसदीय क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 50 प्रतिशत से कम रहा.
चुनाव आयोग ने बताया कि 2019 में 540 की तुलना में कुल 10.52 लाख मतदान केंद्रों में से 40 मतदान केंद्रों या 0.0038 प्रतिशत पर पुनर्मतदान हुए.
इसके अलावा प्रवासी भारतीय मतदाताओं का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि इस श्रेणी में 1,19 लाख से अधिक लोग पंजीकृत थे, जिनमें 1.06 लाख पुरुष, 12,950 महिलाएं और 13 थर्ड जेंडर शामिल थे. जबकि 2019 में 99,844 पंजीकृत विदेशी मतदाता थे.
प्रवासी भारतीय मतदाता वे हैं जो विभिन्न कारणों से विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक हैं और यहां मतदान करने के पात्र हैं. वे पहचान के प्रमाण के रूप में अपना मूल पासपोर्ट दिखाकर मतदान करने के लिए भारत आए थे.