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भारत बायोटेक ने शुरू किया टीबी वैक्सीन MTBVAC का क्लिनिकल ट्रायल, बायोफैब्री की मदद से बना है टीका

बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी बायोफैब्री के साथ मिलकर भारत बायोटेक ने एक ऐसे टीके को विकसित किया है, जो युवाओं में टीबी के खिलाफ लड़ने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा. यह वैक्सीन पहले से मौजूद टीबी के टीके BCG से ज्यादा कारगर होगा.

भारत बायोटेक ने बायोफ्रैबी के साथ मिलकर बनाया टीबी का टीका MTBVAC (गेटी/प्रतीकात्मक फोटो) भारत बायोटेक ने बायोफ्रैबी के साथ मिलकर बनाया टीबी का टीका MTBVAC (गेटी/प्रतीकात्मक फोटो)
मिलन शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 3:05 PM IST

वर्ल्ड टीबी डे (World Tuberculosis Day) के मौके पर भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने ह्यूमन सोर्स से बने टीबी के पहले टीके MTBVAC का ऐलान किया है. भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड ने बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी बायोफैब्री (Biofabri) के साथ मिलकर भारत में MTBVAC का मूल्यांकन करने के लिए क्लिनिकल ट्रायल्स की एक सीरीज शुरू की है. MTBVAC को दो उद्देश्यों के लिए विकसित किया जा रहा है- नवजात शिशुओं के लिए BCG की तुलना में अधिक प्रभावी और युवाओं में टीबी रोग की रोकथाम के लिए. इसको एक ऐसा टीका बनाने की कोशिश की जा रही है, जो लंबे वक्त तक चल सके. बता दें कि टीबी से हर साल 16 लाख से ज्यादा लोगों की मौतें होती हैं.

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तीन दशकों से ज्यादा की रिसर्च के बाद, बायोफैब्री के CEO एस्टेबन रोड्रिग्ज (Esteban Rodriguez) कहते हैं कि यह ट्रायल करने के लिए एक बड़ा कदम है. ऐसे देश में जहां, युवकों और नई नस्ल के लोगों में दुनिया के 28 फीसदी टीबी के केस सामने आते हैं. टीबी के इलाज के लिए बहुत ज्यादा कोशिश और पैसों की जरूरत पड़ती है. 

TB के खिलाफ नए टीके की जरूरत क्यों?

मौजूदा वक्त में टीबी के खिलाफ लड़ने के लिए सिर्फ एक टीका BCG है. यह सौ साल से ज्यादा पुराना है और फेफड़े से संबंधित टीबी की बीमारी पर यह बहुत ज्यादा असरदार नहीं होता. इसलिए इस नए टीके की जरूरत है, जो ग्लोबल वैक्सिनोलॉजी में एक मील का पत्थर साबित होगा. 

भारत बायोटेक के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कृष्णा एला ने कहा कि भारत में क्लिनिकल ट्रायल्स के साथ टीबी के खिलाफ ज्यादा असरदार टीके की हमारी खोज को आज बढ़ावा मिला है. युवाओं में बीमारी की रोकथाम के लिए टीबी के टीके विकसित करने का हमने लक्ष्य रखा और आज एक बड़ा कदम उठाया गया है. टीबी के टीकों का आविष्कार करने की इस कोशिश में हम बायोफैब्री, डॉ. एस्टेबन रोड्रिग्ज और डॉ. कार्लोस मार्टिन के साथ पार्टनर बनकर बेहतर महसूस कर रहे हैं. 

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एक लंबे प्रोसेस के बाद MTBVAC वैक्सीन ने भारत में क्लिनिकल ​​ट्रायल्स में एंट्री करने से पहले कई मील के पत्थर पार कर लिए हैं. पहला यह है कि हाल ही में फेज 2 डोज खोजने का ट्रायल पूरा होने के बाद, 2023 में नवजात बच्चों में एक डबल-ब्लाइंड, कंट्रोल्ड फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो गया है, जिसमें टीके की तुलना मौजूदा बीसीजी वैक्सीन से की जाएगी.

यह भी पढ़ें: Tuberculosis New symptoms: इन दो बॉडी पार्ट को छोड़ शरीर में कहीं भी हो सकता है टीबी, AIIMS दे रहा स्पेशल ट्रेन‍िंग

कोरोना वायरस से टीबी के खिलाफ लड़ाई हुई कमजोर

दक्षिण अफ्रीका से 7,000 नवजात शिशुओं, मेडागास्कर से 60 और सेनेगल से 60 नवजात शिशुओं को टीका लगाया जाएगा. आज तक, 1,900 से ज्यादा शिशुओं को टीका लगाया गया है. टीकाकरण उस वक्त शुरू हुआ, जब टीबी के खिलाफ चल रही ग्लोबल फाइट को तगड़ा झटका लगा था. कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से संक्रमण में बढ़ोतरी हुई और इलाज में कमी आई. इसका नतीजा ये हुआ कि एक साल में टीबी से होने वाली मौतें 16 लाख से ज्यादा हो गई हैं.

एक और अहम मील का पत्थर यह है कि HIV असंक्रमित युवाओं में खुराक बढ़ातरी ट्रायल पूरा करने के बाद, HIV संक्रमित युवानओं में फेज 2 की स्टडी 2024 में शुरू हो गई है, जिससे यह तय किया जा सके कि MTBVAC इस आबादी में सुरक्षित है या नहीं. 

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MTBVAC बनाने में भारत की मदद करने वाली कंपनी बायोफैब्री, ज़ेंडल ग्रुप (Zendal Group) का हिस्सा है, जो मानव और पशु स्वास्थ्य में विशेषज्ञता रखने वाली कंपनियों का एक स्पेनिश फार्मास्युटिकल समूह है. 
 

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