Advertisement

Zero-Dose Kids: देश में 16 लाख ऐसे बच्चे, जिन्हें नहीं लगी कोई वैक्सीन, नाइजीरिया के बाद WHO की लिस्ट में दूसरे स्थान पर भारत

WHO और WUENIC डेटा में, भारत के बाद अन्य देशों में लिस्ट में इथियोपिया, कांगो, सूडान, इंडोनेशिया, यमन, अफगानिस्तान, अंगोला, पाकिस्तान, सोमालिया, वियतनाम, मेडागास्कर, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, माली, डीपीआरके, चीन, गिनी और म्यांमार जैसे देशों का नाम है.

बच्चों का जीरो डोज वैक्सीनेशन (फाइल फोटो) बच्चों का जीरो डोज वैक्सीनेशन (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ ने सोमवार को जारी अपने वैश्विक टीकाकरण रिपोर्ट में कहा है कि महामारी के तीन साल बाद भी भारत में बच्चों के टीकाकरण का स्तर अभी महामारी से पहले वाले स्तर पर नहीं पहुंचा है. रिपोर्ट में कहा गया कि 2023 में 16 लाख बच्चों को डीपीटी और खसरे के टीके नहीं लग पाए. एजेंसी के मुताबिक, इस पर आधिकारित सूत्रों ने कहा कि WHO और यूनिसेफ द्वारा राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज (WUENIC) के अनुमान में बच्चों के टीकाकरण के आंकड़ों की तुलना 19 अन्य देशों से करते वक्त भारत की जनसंख्या को ध्यान में नहीं रखा गया है, जो कि अन्य देशों से कहीं ज्यादा है. एजेंसी के मुताबिक, सूत्रों ने जोर देकर कहा कि भारत जीरो डोज वाले बच्चों को कम करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है.

Advertisement

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को बताया, "भले ही भारत में दुनिया में टीके की खुराक नहीं लेने वाले बच्चों की संख्या दूसरे स्थान पर है, लेकिन ये देश की कुल आबादी का 0.11 फीसदी है."

सूत्र ने ये बात सोमवार को जारी WUENIC के आंकड़ों पर बात करते हुए कही है, जिसमें कहा गया है कि भारत में  करीब 16 लाख बच्चों को 2023 में कोई टीका नहीं मिला. विश्व स्तर पर देखा जाए तो भारत इस मामले में दूसरे पायदान पर है. पहले पायदान पर नाइजीरिया है, जहां 2023 में जीरो डोज वाले बच्चों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा 21 लाख थी.

यह भी पढ़ें: टाटा-अंबानी के बाद टाइम मैगजीन में इस भारतीय कंपनी का जलवा, वैक्सीन बनाने में महारथ!

उन्होंने कहा कि यह तुलना त्रुटिपूर्ण है क्योंकि आधार जनसंख्या को ध्यान में नहीं रखा गया है." WUENIC के आंकड़ों से पता चला है कि भारत की रैंकिंग 2021 से बेहतर हुई है, जब देश में वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा 27.3 लाख जीरो डोज वाले बच्चे थे. 

Advertisement

सूत्रों ने कहा कि भारत का डीपीटी 1 (डिप्थीरिया-टेटनस-पर्टुसिस वैक्सीन) जीरो डोज के लिए प्रॉक्सी 93 फीसदी है जबकि वैश्विक औसत 89 फीसदी है. सूत्रों ने कहा, "इस तरह भारत दुनिया की तुलना में 4 फीसदी बेहतर है."

भारत का डीपीटी 3 कम टीकाकरण के लिए प्रॉक्सी 91 फीसदी है जबकि वैश्विक औसत 84 फीसदी है. इस तरह से भारत दुनिया की तुलना में 7 फीसदी बेहतर है. इसके अलावा, भारत का एमसीवी 1 (Measles Zero Dose) 92 फीसदी है जबकि वैश्विक औसत 83 फीसदी है.

यह भी पढ़ें: अफ्रीका में लॉन्च हुई सीरम इंस्टीट्यूट की मलेरिया वैक्सीन, 4 डॉलर से भी कम है एक डोज की कीमत

सूत्रों ने कहा, "इस तरह, भारत दुनिया से 10 फीसदी बेहतर है."

इन जीरो डोज वाले बच्चों तक पहुंचने के लिए सभी कोशिशें की जा रही हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि एक स्पेशल जीरो डोज योजना बनाई गई है और इसे लागू किया जा रहा है.

WUENIC डेटा में, भारत के बाद अन्य देशों में लिस्ट में इथियोपिया, कांगो, सूडान, इंडोनेशिया, यमन, अफगानिस्तान, अंगोला, पाकिस्तान, सोमालिया, वियतनाम, मेडागास्कर, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, माली, डीपीआरके, चीन, गिनी और म्यांमार जैसे देशों का नाम है. 

इन 20 देशों को टीकाकरण एजेंडा 2030 (IA2030) के संदर्भ में प्राथमिकता दी गई थी, जो 2021 में जीरो डोज वाले बच्चों की संख्या पर आधारित थी. टॉप 20 जीरो डोज वाले देशों की लिस्ट में चीन 18वें पायदान पर है, जबकि पाकिस्तान 10वें पायदान पर है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Funny Jokes: जब पति ने पूछा- वैक्सीन लगवा ली? तो पत्नी ने दिया ये मजेदार जवाब

शून्य खुराक वाले बच्चों की संख्या के आधार पर रैंक किए गए देशों में, ROSA, 2021-2023, भारत 1,592,000 शून्य खुराक वाले बच्चों के साथ 8 देशों में से नंबर 1 पर है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से कहा किया कि वे सभी स्तर पर और ज्यादा कोशिश करें, जिससे टीकाकरण से बचे और कम टीकाकरण वाले बच्चों की पहचान की जा सके और उनका टीकाकरण किया जा सके.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement