कंगना का सामना शिवसेना की सत्ता की ताकत से है तो उसे बीजेपी के समर्थन की ताकत भी मिल रही है और अब तो आरएसएस भी कंगना के साथ खड़ा हो गया है. यानी ये मामला सिर्फ कंगना तक सीमित नहीं. इसके पीछे शुद्ध सियासत है.