इस 'रात' की सुबह कब. चाहरदीवारी के अंदर रजाई में दुबकने के बावजूद हमें-आपको सर्दी सताती है. कल्पना कीजिए उन किसानों का क्या हाल होता होगा जो दिसंबर की सर्दी को सड़क पर बिताने को मजबूर हैं. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक और युवतियों से लेकर महिलाओं तक सब संघर्ष के इस सफर में अपने परिवार के साथ दिखाई दे रहे हैं. अपनी मांगों को लेकर किसान आंदोलन पर बैठे हैं खुले आसमान के नीचे. सरकार के प्रस्तावों पर राजी होने को किसान तैयार नहीं है. किसानों का कहना है कि जब तक नया कृषि विधेयक रद्द नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. देखिए ग्राउंड रिपोर्ट, चित्रा त्रिपाठी के साथ.