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राजनीति

मुजफ्फरनगर की महापंचायत में जनसैलाब, हर तरफ किसान ही किसान, देखें तस्वीरें

aajtak.in
  • नई द‍िल्ली ,
  • 05 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST
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यूपी के मुजफ्फरनगर में किसानों की महापंचायत हो रही है. दावा है कि इस महापंचायत में 300 से ज्यादा किसान संगठन शामिल हो रहे हैं. संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि ये किसानों की अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत है. ये महापंचायत जीआईसी ग्राउंड पर हो रही है.

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इस महापंचायत में शामिल होने के लिए यूपी के अलावा पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे 15 राज्यों से किसानों के जुटने का दावा है. 

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दिल्ली के बॉर्डर पर जो लंबे समय से आंदोलन चल रहे हैं वहां से भी किसान इस महापंचायत में शामिल हो रहे हैं. 

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संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि यहां जुटी भीड़ किसानों की 'ताकत' दिखाती है. किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. पंचायत सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलनी है. 

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मुजफ्फरनगर की सड़कों पर सैकड़ों-हजारों की तादाद में किसान जुटे हैं. बताया जा रहा है कि जीआईसी मैदान पर ही लाखों किसान बैठे हैं और इतने ही किसान बाहर भी हैं. मुजफ्फरनगर की सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं है. सड़क, किसान प्रदर्शनकारियों से भरी हुई है.
 

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महापंचायत में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं भी आईं हैं. यहां आईं महिलाओं ने केंद्र सरकार से तीनों कानूनों की वापसी की मांग की है. वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने फोटो ट्वीट कर महापंचायत में उमड़ी भीड़ को 'ताकत' बताया है. संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि अब सरकार को किसानों की मांग मान लेनी चाहिए.

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महापंचायत में शामिल होने आए लोगों के खाने के लिए लंगर की व्यवस्था की गई है. जानकारी के मुताबिक, यहां 500 लंगर लगाए गए हैं.

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बता दें क‍ि किसान नेता राकेश टिकैत 10 महीने बाद मुजफ्फरनगर पहुंचे हैं. टिकैत मुजफ्फरनगर के ही रहने वाले हैं और जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है, तब से उन्होंने यहां कदम नहीं रखा है. टिकैत ने कहा, 'जब से आंदोलन शुरू हुआ है तब से मैं पहली बार मुजफ्फरनगर जा रहा हूं और वो भी गलियारे से जाऊंगा. वहां की जमीन पर कदम भी नहीं रखूंगा, बस अपने घर की तरफ देख लूंगा, वहां के लोगों को देख लूंगा.'

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मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउंड में हो रही महापंचायत का असर अगले साल यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी दिख सकता है. पश्चिमी यूपी किसानों के दबदबे वाला क्षेत्र है और यहां राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 100 से ज्यादा सीटें आती हैं. आज भी महापंचायत के मंच से सरकार को उखाड़ फेंकने की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं.

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