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जेएनयू की योद्धा...बंगाल के रण में हो गई ढेर...आइशी घोष 46 हजार वोट से हारीं

जेएनयू की योद्धा आइशी को 24818 वोट मिले और उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा. पश्चिमी बर्दवान जिले के जमुरिया विधानसभा क्षेत्र में नोटा को 2353 वोट मिले.

जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष (फाइल फोटोः ट्विटर) जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष (फाइल फोटोः ट्विटर)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 मई 2021,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST
  • माकपा ने आइशी को जमुरिया से दिया था टिकट
  • तीसरे स्थान पर रहीं जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बंगाल की चुनावी रणभूमि में उतार दिया था. जेएनयू की छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए विधानसभा चुनाव लड़ने वालीं आइशी घोष को हार का सामना करना पड़ा है. आइशी घोष को करीब 45 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा है.

जेएनयू की योद्धा आइशी को माकपा ने बंगाल के पश्चिमी बर्दवान जिले की जमुरिया विधानसभा सीट से टिकट दिया था. इसके साथ ही जेएनयू का छात्रसंघ अध्यक्ष रहते विधानसभा चुनाव लड़ने का अनोखा रिकॉर्ड भी आइशी के नाम दर्ज हो गया. हालांकि आइशी पार्टी की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं और उन्हें अपने प्रतिद्वंदी से करीब 46 हजार वोट के बड़े अंतर से मात खानी पड़ी.

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आइशी घोष करीब 25 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं. जमुरिया सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार हरेराम सिंह 71002 वोट पाकर विजयी रहे. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तापस कुमार रॉय 62951 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे. जेएनयू की योद्धा आइशी को 24818 वोट मिले और उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा. पश्चिमी बर्दवान जिले के जमुरिया विधानसभा क्षेत्र में नोटा को 2353 वोट मिले. नोटा  को मिले ये वोट कई उम्मीदवारों को मिले वोट से भी ज्यादा हैं.

गौरतलब है कि बंगाल की रणभूमि में उतरने के बाद आइशी ने कहा था कि वो बंगाल के लोगों के लिए उन मुद्दों को लेकर बढ़ेंगी जैसे मुद्दों को लेकर वो जेएनयू में संघर्ष करती रही हैं. बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली आइशी जेएनयू में फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर चुकी हैं. बता दें कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 200 से ज्यादा सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है. वहीं ऐसा पहली बार हुआ है जब बंगाल की विधानसभा में लेफ्ट और कांग्रेस के एक भी विधायक नहीं होंगे.

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