
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने भोपाल में अपने भाषण के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लाने के संकेत दिए थे. इसी के बाद देश में एक बार फिर यूसीसी का विरोध तेज हो गया है. बीजेपी के सहयोगी दल भी इसका विरोध करने लगे हैं. इन दलों में अब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) का भी नाम शामिल हो गया है. एआईएडीएमके चीफ के. पलानीस्वामी ने बुधवार को यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए जारी हमारी पार्टी के घोषणापत्र में रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था.
तमिलनाडु के पूर्व सीएम पलानीस्वामी ने पार्टी के जिला सचिवों की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया से कहा,‘हमारा घोषणापत्र पढ़ें, हमने इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है.' घोषणापत्र में ‘धर्मनिरपेक्षता' विषय के तहत, पार्टी ने 2019 में कहा था,‘अन्नाद्रमुक भारत सरकार से समान नागरिक संहिता के लिए संविधान में कोई संशोधन नहीं करने का आग्रह करेगी क्योंकि यह भारत में अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा.' यह पूछे जाने पर कि क्या AIADMK का बीजेपी के साथ गठबंधन जारी रहेगा, इस पर पलानीस्वामी ने कहा,‘लोकसभा चुनाव होने में अभी एक साल है. चुनाव के समय निश्चित रूप से हम आपको बताएंगे कि हम किन पार्टियों के साथ गठबंधन कर रहे हैं.
पूर्वोत्तर में बीजेपी के सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के चीफ और मेघालय के सीएम कॉनराड संगमा ने UCC 30 जून को बयान दिया कि समान नागरिक संहिता भारत के वास्तविक विचार के विपरीत है. यह देश के लिए सही नहीं है. भारत एक विविधतापूर्ण देश है, विविधता ही हमारी ताकत है.
उन्होंने कहा- मेघायल में हम जिस संस्कृति का लंबे समय से अनुसरण कर रहे हैं, उसे बदला नहीं जा सकता. एक राजनीतिक दल के रूप में, हमें एहसास है कि पूरे पूर्वोत्तर में अनूठी संस्कृति है. हम यही चाहेंगे कि हमारी परंपराओं और संस्कृति का न छुआ जाए.
नगालैंड में बीजेपी की सहयोगी नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) ने समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन का विरोध किया है. एनडीपीपी ने कहा कि यह कानून भारत के अल्पसंख्यक समुदायों और आदिवासी लोगों की स्वतंत्रता और अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा. भारत के संविधान में अनुच्छेद 371 (ए) को शामिल करके नागाओं को हमारी पारंपरिक प्रथाओं और परंपराओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है.
पार्टी ने कहा कि जब शांति समझौते के लिए एनएससीएन (आईएम) और एनएनपीजी के साथ गति वार्ता महत्वपूर्ण मोड़ पर है, तो ऐसे में यूसीसी जैसा कानून बनाना नासमझी होगी. इसे लागू करने से बुरे नतीजे सामने आना तय हैं. नया कानून पेश करने से लोगों के व्यक्तिगत कानूनों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, बल्कि इससे और अधिक अनिश्चितता पैदा होगी और शांतिपूर्ण माहौल को खतरे में डालने की गंभीर आशंका है.
पंजाब में बीजेपी की सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल ने भी यूसीसी का विरोध किया है. शिरोमणि अकाली दल के दिल्ली स्टेट चीफ परमजीत सिंह सरना ने कहा कि भविष्य के किसी भी तरह के गठबंधन की सोच से पहले बीजेपी को यूसीसी को सिरे से खारिज करना होगा. उन्होंने कहा कि बिना कोई मसौदा सामने रखे, लॉ कमीशन द्वारा धार्मिक संस्थाओं से समान नागरिक संहिता पर सलाह कैसे मांग सकती है?
वहीं सरदार मंजीत सिंह जीके ने कहा कि देश की आजादी के 75 साल के बाद भी सिखों का पर्सनल लॉ नहीं है. श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को तुरंत सिख पर्सनल लॉ बनाने के लिए कमेटी बनानी चाहिए. तभी सिख पर्सनल लॉ को लागू करवाने का सरकार पर दबाव बनेगा. लॉ कमीशन को चिट्ठी लिखकर यूनिफॉर्म सिविल कोड में सिख इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की मांग की है.