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बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अस्पताल में भर्ती, 15 दिन में दूसरी बार हुए एडमिट

96 साल के आडवाणी आयु संबंधित स्वास्थ्य दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. कुछ दिनों पहले आडवाणी को तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के AIIMS में भर्ती कराया गया था. जानकारी के मुताबिक उन्हें उम्र संबंधित समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अपोलो अस्पताल में भर्ती बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अपोलो अस्पताल में भर्ती
मिलन शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 11:15 PM IST

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को बुधवार रात 9 बजे दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. उन्हें डॉ विनीत सूरी की देखरेख में भर्ती कराया गया है. फिलहाल उनकी हालत स्थिर है और उन्हें निगरानी में रखा गया है.

96 साल के आडवाणी आयु संबंधित स्वास्थ्य दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. कुछ दिनों पहले आडवाणी को तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के AIIMS में भर्ती कराया गया था. जानकारी के मुताबिक उन्हें उम्र संबंधित समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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आडवाणी को मिला था भारत रत्न

आडवाणी को इसी साल देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. आडवाणी तबीयत के मद्देनजर राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके थे, इसलिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें 30 मार्च को उनके आवास पर जाकर भारत रत्न से सम्मानित किया. औपचारिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और लालकृष्ण आडवाणी के परिवार के सदस्य शामिल हुए.

2015 में पद्म विभूषण से नवाजा गया

इससे पहले आडवाणी 2015 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजा गया था. लालकृष्ण आडवाणी 2002 से 2004 तक भारत के 7वें उप प्रधानमंत्री रहें हैं. वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सह-संस्थापकों में से एक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सदस्य हैं. लालकृष्ण आडवाणी 1998 से 2004 तक सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री रहे.

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वह लोकसभा में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले विपक्ष के नेता भी हैं. अयोध्या राम मंदिर आंदोलन में उन्होंने एक अग्रणी नेता की भूमिका निभाई थी. आडवाणी ने अपनी पहली राम रथ यात्रा (Ram Rath Yatra) 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से शुरू की जो अयोध्या में समाप्त हुई. इस यात्रा से उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को लोगों तक पहुंचाया.

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