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राज्यसभा की चार सीटें, चार हस्तियां... और बीजेपी ने रख दिया साउथ में विस्तार का ब्लू प्रिंट!

बीजेपी जिसने उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक अपना उदय किया हो, उन राज्यों में सरकार बनाई जहां या तो लेफ्ट या फिर कांग्रेस का कई सालों तक राज रहा, लेकिन दक्षिण भारत में अभी तक अपनी सियासी जड़़े नहीं जमा सकी. 2019 में बीजेपी ने भले ही 3003 सीटें जीती, लेकिन आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में पार्टी का खाता नहीं खुला. ऐसे में अब बीजेपी की नजर दक्षिण भारत में कमल खिलाने का है, जिसके लिए अपने कदम बढ़ा दिए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (पीटीआई)
कुबूल अहमद/सुधांशु माहेश्वरी
  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST
  • हैदराबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी
  • लोकसभा की 129 सीटों पर कमल मजबूत करने पर जोर
  • उत्तर भारत की तरह दक्षिण में भी बीजेपी का एजेंडा

मोदी सरकार ने दक्षिण भारत से आने वाली चार बड़ी हस्तियों को राज्यसभा के लिए नामित किया है. मनोनीत कोटे से उच्च सदन के लिए पूर्व दिग्गज एथलीट पीटी उषा, मशहूर संगीतकार इलैयाराजा, आध्यात्मिक गुरु वीरेंद्र हेगड़े और प्रसिद्ध पटकथा लेखक एवं निर्देशक वी विजयेंद्र प्रसाद का नाम शामिल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर सभी के साथ अपनी तस्वीर जारी की और उन्हें अलग-अलग ट्वीट कर बधाई दी. साथ ही पीएम ने उनके जीवन के बारे में लोगों को विस्तार से बताया. 

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माना जा रहा है कि राज्यसभा के लिए दक्षिण भारत की चार हस्तियों को नामित कर मोदी सरकार ने दूर तक सियासी संदेश देने का दांव चला है. पीटी उषा केरल से आती हैं तो इलैयाराजा तमिलनाडु से हैं जबकि विजयेंद्र प्रसाद आंध्र प्रदेश से और वीरेंद्र हेगड़े कर्नाटक से संबंध रखते हैं. इस तरह मोदी सरकार ने दक्षिण भारत के चारों प्रमुख राज्यों से एक-एक सदस्य को उच्च सदन भेज रही है. निश्चित रूप से बीजेपी की कोशिश इन नामी हस्तियों के जरिए दक्षिण के चारों राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करने की है. 

बता दें कि बीजेपी ने हाल ही में तेलंगाना के हैदराबाद में अपनी दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी आयोजित की थी, जहां पर जेपी नड्डा से लेकर अमित शाह और पीएम मोदी तक पहुंचे थे. बीजेपी ने इस दौरान मिशन साउथ के प्लान का खाका खींचा था. बीजेपी ने इस बात को सामने रखा था कि वह खुद को उत्तर भारत तक सीमित न रखकर दक्षिण तक अपने को ले जाना चाहती है. 

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2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर भारत में बड़ी सफलता हासिल करने वाली बीजेपी की नजर अब दक्षिण के राज्यों पर है. बीजेपी भले ही देश की सत्ता पर दो बार से काबिज है और देश के 18 राज्यों में उसकी सरकार है. इसके बाद भी बीजेपी दक्षिण में अपने आपको अभी तक मजबूत नहीं कर सकी. कर्नाटक को छोड़ दिया जाए तो दक्षिण के किसी भी राज्य में फिलहाल बीजेपी की सरकार नहीं है. 

नरेंद्र मोदी के विजय रथ पर सवार बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 303 सीटों पर जीत दर्ज करने में भले ही कामयाब रही, लेकिन दक्षिण भारत के राज्यों में मोदी का जादू पूरी तरह से फीका रहा था. बीजेपी केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में अपना खाता तक भी नहीं खोल पाई थी जबकि तेलंगाना में चार सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. यही वजह है कि बीजेपी की पूरी कोशिश दक्षिण भारत के राज्यों में है.

केंद्र की मोदी सरकार ने राज्यसभा के लिए जिन चारों हस्तियों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है. वो दक्षिण भारत के चार अलग-अलग राज्यों से हैं, जिससे पार्टी की रणनीति स्पष्ट दिखाई पड़ती है. ये चारों वो राज्य हैं जहां पर बीजेपी की नजर काफी पहले से है. कर्नाटक में बीजेपी ने 2008 में ही अपनी जड़ें जमा ली थी और अब तो वो दूसरी बार सत्ता में है, लेकिन तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में पार्टी को अभी तक सफलता नहीं मिली है. 

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साउथ की 129 लोकसभा सीटें

बीजेपी मिशन 2024 की तैयारी शुरू कर चुकी है और तेलंगाना में राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में इसकी रूप रेखा भी बन गई. बीजेपी की नजर दक्षिण भारत के राज्यों में कमल खिलाना का है. दक्षिण के 5 राज्यों में 129 लोकसभा सीटें आती है, जो कुल लोकसभा सीटों का 25 फीसदी है. ऐसे में सियासी तौर पर दक्षिण का काफी महत्व है. ऐसे में बीजेपी 2024 के चुनाव में कुछ सीटें दक्षिण भारत से झटकना चाहती है जिससे लोकसभा में उसकी संख्या बढ़े और वो सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी ना कहलाए. 

बीजेपी ने जिस तरह से 2019 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में कमाल का प्रदर्शन करके दिखाया था, अब 2024 में दक्षिण भारत में भी बीजेपी उसी रणनीति पर काम करती दिख रही है. बीजेपी के लिए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में उम्मीदें दिखाई दे रही हैं. 2019 के बाद से आंध्र प्रदेश में जो भी उपचुनाव हुई है, बीजेपी भले ही न जीत सकी हो, लेकिन पार्टी ने अपना प्रदर्शन पहले से बेहतर किया है. 

आंध्र प्रदेश में बीजेपी की कोशिश टीडीपी और कांग्रेस के विकल्प बनने का फिलहाल है जबकि तेलंगाना में टीआरएस के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश करनी की है. तेलंगाना में बीजेपी ने जिस तरह से खुद को मजबूत किया है और हर चुनाव के साथ उसके वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई है. हैदराबाद निकाय चुनाव में बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है तो उपचुनाव में जीत का परचम फहराया है. तेलंगाना के नेताओं को बीजेपी खास अहमियत दे रही है.

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उत्तर भारत में हिंदुत्व और वंशवादी राजनीति

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बीजेपी ने जिस तरह उत्तर भारत में हिंदुत्व और वंशवादी राजनीति के खिलाफ अभियान चलाकर सत्ता पर काबिज हुई है. उसी तर्ज पर बीजेपी दक्षिण भरत में भी अपने सियासी कदम बढ़ा रही है. कर्नाटक बीजेपी के लिए हिंदुत्व की दक्षिण में नई प्रयोगशाला के तौर पर है, जिससे बाकी राज्यों को सियासी संदेश दिया जा रहा. दक्षिण के कई राज्य में हिंदुत्व से जुड़े तमाम मुद्दों को धार दिया जा रहा है और संघ भी लगातार अपनी सियासी जड़े जमा रहा है. 

दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में मंदिर और धार्मिक स्थल सरकार के नियंत्रण में है, जिसके खिलाफ हिंदु संगठन लगातार आवाज उठा रहे हैं. उत्तराखंड में हिंदू संगठनों के विरोध के चलते सरकार ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. इस फैसले से हिंदु संगठनों को हौसला मिला है तो बीजेपी भी इस मुद्दे पर खुलकर खेलने की स्थिति में है. 

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु की सत्ता और सियासत में परिवारवाद का कब्जा है. बीजेपी और पीएम मोदी इन दिनों वंशवादी राजनीति के खिलाफ मुखर रुख अपना रखा है. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी दक्षिण में हिंदुत्व के साथ-साथ परिवारवादी राजनीति को लेकर अपने सियासी अभियान को धार देगी ताकि अपनी सियासी जड़े जमाना चाहती है. 

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'सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय'

पीएम मोदी ने बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक को संबोधित करते हुई कहा कि भाजपा का उद्देश्य 'सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय' है, जबकि देश के कई विपक्षी दल वंशवाद से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. परिवारवाद से देश पूरी तरह ऊब चुका है. ऐसे दलों के लिए अब टिक पाना मुश्किल है. मोदी ने युवा पीढ़ी को आगे लाने का आह्वान करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अधिक से अधिक युवाओं से संपर्क करें और उन्हें पार्टी से जोड़ें. मतलब साफ है कि बीजेपी साउथ में इसी एजेंडे को लेकर आगे बढ़ेगी. 

बीजेपी मिशन साउथ को लेकर अपने कदम बढ़ा दिए हैं. अब ये तमाम वो फैक्टर हैं जो दक्षिण में बीजेपी की सियासी पिच को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. राज्यसभा के लिए मनोनीत कोटे से केरल की पीटी उषा को मौका मिला है, कर्नाटक से वीरेंद्र हेगड़े को अवसर दिया गया है, तमिलनाडु से इलैयाराजा आ गए हैं और आंध्र से केवी विजयेंद्र प्रसाद. इस तरह से बीजेपी सियासी माहौल को अपने पक्ष में बनाने में जुटी है. देखना होगा कि बीजेपी को दक्षिण भारत में क्या किसी तरह की कामयाबी मिलती है? 

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