
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को दिल्ली में पार्टी के नेताओं की बैठक को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने बढ़ती गरीब विरोधी, पूंजीवादी राजनीति, जातिगत और सांप्रदायिक दुश्मनी में बढ़ोतरी पर चिंता जताई.
पार्टी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार बसपा सुप्रीमो ने पार्टी के सदस्यों से 'बहुजन' के लिए लड़ने का आह्वान किया, जिसका अर्थ है बहुमत. साथ ही कहा कि ये लड़ाई मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के लिए है.
मायावती ने कहा कि बसपा की लड़ाई बहुजन समुदायों का शासन सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि गरीब, दलित, आदिवासी, ओबीसी, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक सम्मानजनक जीवन जी सकें. उन्होंने पार्टी के सदस्यों से संगठन को मजबूत करने और सभी समुदायों के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ाने का आह्वान किया.
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जोर देकर कहा कि युवाओं को आंदोलन में शामिल करने की जरूरत है, उन्होंने कहा कि बसपा एक कैडर-आधारित पार्टी है. उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में अमीरों के पक्षधर और गरीब विरोधी दलों के बढ़ते प्रभाव के कारण गरीब, दलित, आदिवासी और ओबीसी आरक्षण जैसे कानूनी अधिकारों को खोने के खतरे में हैं. मायावती ने बसपा को एकमात्र सच्ची अंबेडकरवादी पार्टी बताया. उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर कमजोर सामाजिक तबकों के मुद्दों पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाया.