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कांग्रेस किस दिशा में जाएगी? चिंतन शिविर में सोनिया गांधी ने रखा रोडमैप

Congress Chintan Shivir: केंद्र की सत्ता से कांग्रेस आठ सालों से बाहर और देश के दो राज्यों में ही उसके मुख्यमंत्री बचे हैं. ऐसे में कांग्रेस दोबारा से खड़ी होने के लिए उदयपुर में तीन दिन का चिंतन शिविर कर रही है, जिसमें सोनिया गांधी ने कांग्रेस का रोडमैप रखा. साफ संदेश दिया है कि कांग्रेस में बड़े बदलाव के साथ ही आगे बढ़ना होगा और संघर्ष के रास्ते पर चलना होगा.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली ,
  • 13 मई 2022,
  • अपडेटेड 4:16 PM IST
  • कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव किए संदेश
  • कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश
  • बीजेपी-संघ सोनिया के निशाने पर

राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस को फिर से मजबूत करने के लिए सोनिया गांधी ने चिंतन शिविर में एक रोडमैप रखा है. सोनिया ने एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार और आरएसएस पर जमकर हमला बोला तो दूसरी तरफ अपनी नाकामयाबियों से बेखबर नहीं होने की बात कह कर एक तरह से संदेश देने की कोशिश की है. इतना ही नहीं सोनिया ने कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को अपनी बात खुलकर रखने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि अपनी नाकामयाबियों के लिए हम यहां ईमानदारी से आत्मनिरीक्षण कर रहे हैं और खुलकर अपनी बात रखें. लेकिन हम तय करें कि यहां से जब बाहर निकलेंगे तब एक नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर निकलेंगे. 

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'ईमानदारी आत्मनिरीक्षण कर रहे हैं'
सोनिया ने कहा कि हम देश की राजनीति में पार्टी को फिर उस भूमिका में ले जाएंगे, जो कांग्रेस ने हमेशा निभाई हैं. मौजूदा बिगड़ते हालात में देश की जनता हमसे उम्मीद करती है. हम यहां ईमानदारी से आत्मनिरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन हम यह तय करें कि यहां से बाहर निकलेंगे तब एक नए आत्म विश्वास, नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर निकलेंगे. सोनिया ने यह भी कहा कि संगठन में ढांचागत बदलावों की आवश्यकता है. अभूतपूर्व परिस्थितियों का सामना अभूतपूर्व कदम उठाकर करना होता है. हम यह ही करने जा रहे हैं. 

असंतुष्ट नेताओं को संदेश
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने साफ तौर पर संदेश दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस के संगठन में बड़े बदलाव के बाद ही कांग्रेस का 'पुनरुत्थान' हो सकता है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताने की कोशिश की है कि कांग्रेस की आगे की राह कठिनाइयों और संघर्ष के रास्ते ही निकलेगा. साथ ही सोनिया गांधी ने उन असंतुष्ट नेताओं को भी संदेश देते हुए कहा कि जो यह बात लगातार उठाते रहे हैं कि उनकी बात पार्टी में नहीं सुनी जा रही है वो  चिंतन शिविर में सभी खुलकर अपनी बात रखें, लेकिन बाहर एक ही संदेश जाना चाहिए कि संगठन की मजबूती, दृढ़ निश्चय और एकता का संदेश. 

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'पार्टी ने बहुत दिया, अब कर्ज उतारने का समय'
सोनिया गांधी ने कहा कि देश में जब जरूरत पड़ी है हर बार हमारे संगठन ने असरदार प्रतिक्रिया दर्शायी हैं. असाधारण परिस्थितियों का मुकाबला असाधारण तरीके से किया जा सकता है.  इस बात के प्रति मैं पूरी सचेत हूं. हर संगठन को न केवल जीवित रहने के लिए बल्कि बढ़ने के लिए समय-समय पर अपने अंदर परिवर्तन लाने होते हैं. हमें सुधारों की सख्त जरुरत है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि रणनीति में बदलाव, रोजाना काम करने में परिवर्तन ये सब बुनियादी मुद्दा है. हमारा पुनरुत्थान सिर्फ विशाल सामूहिक प्रयासों से हो पाएगा. वो विशाल सामूहिक प्रयास न टाले जा सकते हैं ना ही टाले जाएंगे। हमारे लंबे और सुनहरे इतिहास में आज एक ऐसा समय आया है जब हमें अपने निजी आकांक्षाओं को संगठन के हितों के अधीन रखना होगा. साथ ही सोनिया ने एक बार फिर कहा कि पार्टी ने हम सभी को बहुत कुछ दिया है अब समय है कि हम उस कर्ज को उतारें.. 

अल्पसंख्यकों के बहाने मोदी सरकार पर हमला
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों को डराया-धमकाया जा रहा है, जेल में डाला जा रहा है. जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।और लोकतंत्र के सभी स्तंभों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. मोदी और उनके सहयोगियों ने ध्रुवीकरण को सरकार में स्थायी बना लिया है. सोनिया ने कहा कि उनकी(पीएम मोदी) सरकार कहती है कि 'मैक्जिमम गवर्नेंस और मिनिमम गवर्नमेंट'. हकीकत यह है कि विभाजन को स्थायी बना दिया गया है और लोग डर और असुरक्षा के भाव में जी रहे हैं. अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, जो हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं.  

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'महात्मा गांधी के हत्याओं का महिमामंडन'
सोनिया ने बीजेपी-आरएसएस पर हमला करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के हत्यारों का महिमा मंडन किया जा रहा. बीजेपी और आरएसएस की नीतियों के कारण देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उस पर विचार करने के लिए ये शिविर एक बहुत अच्छा अवसर है. ये देश के मुद्दों पर चिंतन और पार्टी के सामने समस्याओं पर आत्मचिंतन दोनों ही है.  उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू जैसे हमारे नेताओं के योगदान, उपलब्धियों और त्याग को नकारा जा रहा है. इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष ने बेरोजगारी के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार घेरा. 

 

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