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सोनिया गांधी क्यों देना चाहती हैं इस्तीफा? जानिए इस बार कितना गंभीर है कांग्रेस का संकट

थोड़ी देर में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होने वाली है. बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर जो संकट दिखाई दे रहा है, स्थिति उससे भी गंभीर है. वर्किंग कमेटी की बैठक में पार्टी लीडरशिप पर चर्चा की जाएगी.

सोनिया गांधी (फाइल फोटो-PTI) सोनिया गांधी (फाइल फोटो-PTI)
राहुल श्रीवास्तव
  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 10:48 AM IST
  • कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक आज
  • पार्टी के 23 नेताओं की चिट्ठी पर बवाल
  • सोनिया गांधी दे सकती हैं इस्तीफा

थोड़ी देर में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होने वाली है. बताया जा रहा है कि पार्टी के भीतर जो संकट दिखाई दे रहा है, स्थिति उससे भी कहीं ज्यादा गंभीर है. वर्किंग कमेटी की बैठक में पार्टी लीडरशिप पर चर्चा की जाएगी. सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी ने नेताओं से कह दिया है कि वह इस्तीफा देना चाहती हैं.

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अंतरिम अध्यक्ष पद से हटने का फैसला सोनिया गांधी ने करीब 23 नेताओं की ओर से भेजी गई चिट्ठी के बाद लिया है, जिसमें इन नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव और पार्टी के काम करने के तरीके में भी परिवर्तन लाने की मांग की है. इस चिट्ठी में स्थायी, प्रभावशाली लीडरशिप को मौका देने की बात कही गई, जो जमीन पर दिखे और एक्टिव रहे.

पार्टी लीडरशिप पर होगी चर्चा
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में पार्टी लीडरशिप पर बात होगी. हालांकि, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ऐसी किसी चिट्ठी से इनकार किया है. सुरजेवाला ने कहा कि सोनिया गांधी ने कोई बयान या इंटरव्यू नहीं दिया, जिसमें उन्होंने लीडरशिप बदलाव की बात कही है.

कांग्रेस नेताओं की ओर से लिखी गई चिट्ठी में कई बातें कही गई हैं. इसमें हर दिन मुद्दों पर बातचीत के लिए संसदीय बोर्ड सिस्टम, नामांकन की बजाय कांग्रेस वर्किंग कमेटी के चुनाव, यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के चुनाव को खत्म करने और  समय पर पीसीसी चयन के साथ अधिक कार्यात्मक जिला और ब्लॉक समितियों का गठन शामिल है.

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संविधान का उल्लंघन मान रहे कई कांग्रेसी
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आज की बैठक पर कई पुराने कांग्रेसी नेता सवाल उठा रहे हैं. इंडिया टुडे से बात करते हुए एक सीनियर नेता ने कहा कि इस तरह कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक नहीं बुलाई जा सकती है. यह कांग्रेस के संविधान का उल्लंघन है. नेताओं ने इसे कांग्रेस संविधान के आर्टिकल XVIII (h) का उल्लंघन बताया.

कांग्रेस पार्टी के संविधान के मुताबिक, किसी भी कारण से आई आपात स्थिति जैसे पार्टी अध्यक्ष के इस्तीफे या आकस्मिक निधन पर पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव को जिम्मेदारी मिल जाएगी. जब तक अंतरिम अध्यक्ष या स्थायी अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता है, तब तक राष्ट्रीय महासचिव के पास जिम्मेदारी रहेगी. 

इन नेताओं का दावा है कि संविधान के अनुसार पिछले 365 दिनों में एआईसीसी की बैठक नहीं हुई है, जब से सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला है. अंतरिम अध्यक्ष एक नियमित अध्यक्ष के चयन की देखरेख करने के लिए है, लेकिन अब एक साल के दौरान कोई कदम नहीं उठाया गया है. अंतरिम अध्यक्ष हमेशा नहीं रह सकता है.

चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले एक अन्य नेता ने कहा कि हमारी चिट्ठी की कई नेता आलोचना कर रहे हैं. क्या पार्टी के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पार्टी अध्यक्ष को लिखना अपराध है? बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने से भी ज्यादा कांग्रेस का संकट इस बार गंभीर है. 

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23 वरिष्ठ नेताओं से सलाह के बाद लिखी गई चिट्ठी
कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व में बदलाव के लिए सात पेज की चिट्ठी भेजी गई है. इसमें 23 वरिष्ठ नेताओं के हस्ताक्षर हैं. इन नेताओं के विचार को जानने के बाद चिट्ठी लिखी गई. चिट्ठी की एक प्रतिलिपि बनाई गई थी, जिस पर 23 वरिष्ठ नेताओं के हस्ताक्षर के बाद उसे सोनिया गांधी को भेज दिया गया.

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस चिट्ठी में 23 ही नहीं 303 नेताओं के हस्ताक्षर हैं. 280 नेताओं के हस्ताक्षरों को रोक दिया गया है. कई लोगों ने डिजिटली हस्ताक्षर किया है. गांधी परिवार के वफादारों में से एक मणिशंकर अय्यर ने चिट्ठी का समर्थन किया है. चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले एक नेता ने कहा कि इस चिट्ठी का मकसद गांधी परिवार की आलोचना नहीं है.

दो धड़े में बंटी कांग्रेस!
बताया जा रहा है कि इस चिट्ठी पर वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, शशि थरूर, विवेक तन्खा, पृथ्वीराज चव्हाण, मनीष तिवारी, रेणुका चौधरी, अखिलेश प्रसाद, पीजी कुरियन, जितिन प्रसाद, संदीप दीक्षित, अरविंदर सिंह लवली, टीके सिंह समेत कई नेताओं के हस्ताक्षर हैं. हालांकि, इंडिया टुडे इसकी पुष्टि नहीं करता है.

हालांकि, चिट्ठी के सामने आने के बाद एक धड़ा गांधी परिवार के समर्थन में उतर आया है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने गांधी परिवार का समर्थन किया है. सीएम अमरिंदर सिंह ने रविवार को कहा कि सोनिया गांधी को अध्यक्ष बने रहना चाहिए, इसके बाद राहुल गांधी जिम्मेदारी संभालें.

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