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कोर पर लौटी BJP... रेखा गुप्ता को ताज, दिल्ली CM रेस में क्यों पिछड़ गए प्रवेश वर्मा?

रेखा गुप्ता ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. रेखा के ठीक बाद प्रवेश वर्मा को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. सीएम रेस में प्रवेश वर्मा क्यों पिछड़ गए और किन फैक्टर्स ने रेखा को सीएम की कुर्सी तक पहुंचा दिया?

रेखा गुप्ता से मुख्यमंत्री पद की रेस में पिछड़े प्रवेश वर्मा दिल्ली सरकार में बने मंत्री रेखा गुप्ता से मुख्यमंत्री पद की रेस में पिछड़े प्रवेश वर्मा दिल्ली सरकार में बने मंत्री
बिकेश तिवारी
  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:48 PM IST

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार का आगाज हो गया है. रेखा गुप्ता ने केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. रेखा गुप्ता के साथ ही उनकी कैबिनेट के छह मंत्रियों ने भी रामलीला मैदान में आयोजित विकसित दिल्ली शपथ समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. शपथ लेने वाले मंत्रियों में सीएम पद के मजबूत दावेदार माने जाते रहे प्रवेश वर्मा का नाम भी शामिल है. बीजेपी के रेखा गुप्ता को सीएम बनाने के दांव के पीछे क्या है और प्रवेश वर्मा क्यों सीएम रेस में पिछड़ गए? इसे 4 पॉइंट में समझा जा सकता है.

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1- महिलाएं कोर वोटर लेकिन नहीं थी एक भी सीएम

महिलाएं बीजेपी का कोर वोटर मानी जाती हैं. राज्य दर राज्य बीजेपी की जीत के पीछे महिला मतदाताओं का निर्णायक रोल माना जाता है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) की बात करते हैं. बीजेपी भी हर चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संसद से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को उपलब्धि के तौर पर लेकर जाती है लेकिन पार्टी की सरकार वाले किसी भी राज्य में सरकार की कमान किसी महिला के हाथ में नहीं थी.

राजस्थान में जीत के बाद पार्टी ने पूर्व सीएम वसुंधरा की जगह भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया जिन्हें सीएम का स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था. अब बीजेपी ने दिल्ली में महिला सीएम देकर पूरे देश की महिलाओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि हमने राष्ट्रीय राजधानी की सरकार की कमान एक महिला को दी है.

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2- बनिया-ब्राह्मण की पार्टी लेकिन नहीं था कोई वैश्य सीएम

बीजेपी की एक पहचान बनिया और ब्राह्मण की पार्टी के रूप में रही है. वोट बेस के विस्तार में अलग-अलग जातियों, समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ते बढ़ी पार्टी की आज डेढ़ दर्जन से अधिक राज्यों में सरकार है लेकिन पूर्वोत्तर के एक राज्य को छोड़ दें तो कहीं भी सरकार की कमान वैश्य वर्ग से आने वाले किसी नेता के हाथ मे नहीं है.

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ब्राह्मण वर्ग की ही बात करें तो राजस्थान में भजनलाल शर्मा, महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और असम में हिमंता बिस्व सरमा के रूप में तीन ब्राह्मण सीएम हैं. मणिपुर के मुख्यमंत्री डॉक्टर माणिक साहा को हटा दें तो पार्टी की सरकार वाले किसी अन्य राज्य में वैश्य वर्ग से आने वाला कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज नहीं था. बीजेपी ने अब हिंदी पट्टी के एक राज्य में भी सरकार की कमान इस जाति से आने वाली रेखा गुप्ता को सौंपकर अपने कोर वोटर को एक संदेश देने की कोशिश की है.

दिल्ली में बीजेपी सरकार का हुआ आगाज (फोटोः एक्स)

3- कैडर को प्राथमिकता

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प्रवेश गुप्ता का चुनावी डेब्यू ही 2013 में हुआ था जब वह पहली बार मेहरौली सीट से विधायकी का चुनाव जीते थे. वह भी संघ से जुड़े रहे हैं, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं और बीजेपी से ही राजनीतिक सफर का आगाज किए लेकिन रेखा गुप्ता का संघर्ष और अनुभव उनकी सीएम दावेदारी पर भारी पड़ा. रेखा गुप्ता तीन दशक से अधिक समय से संघ से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने साल 2002 में बीजेपी तब जॉइन की थी जब दिल्ली में शीला दीक्षित की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार थी.

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पहले कांग्रेस और फिर आम आदमी पार्टी की सरकारों के समय भी रेखा की निष्ठा पार्टी से नहीं डिगी जब दिल्ली में बीजेपी के संघर्ष के दिन थे. रेखा गुप्ता को शालीमार बाग विधानसभा सीट से 2015 और 2020 के दिल्ली चुनाव में मात मिली, लेकिन वह न सिर्फ बीजेपी में रहीं बल्कि सक्रिय भी रहीं. पार्टी ने उन्हें अब सीएम बनाकर कैडर को भी एक संदेश दिया है.

4- नए वोटबैंक की जगह कोर को जोड़े रखने पर फोकस

बीजेपी ने अब अपनी रणनीति बिलकुल साफ कर दी है कि पार्टी नए जाति वर्ग को साथ लाने के लिए जोर लगाने की जगह अब अपने कोर वोटबैंक को साधे रखने पर अधिक फोकस के साथ आगे बढ़ेगी. प्रवेश वर्मा जिस जाट वर्ग से आते हैं, वह हरियाणा के साथ ही पश्चिमी यूपी में भी प्रभावी भूमिका निभाता है. हरियाणा के चुनाव में बहुसंख्यक जाट की जगह बीजेपी ने गैर जातियों की गोलबंदी पर फोकस किया और जाट बाहुल्य सीटों पर भी जीत हासिल की थी.

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ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी जाट समाज को साधने के लिए प्रवेश वर्मा को सीएम बनाने का दांव चल सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं. रेखा गुप्ता को दिल्ली का सीएम बनाने के फैसले से बीजेपी ने ये साफ कर दिया है कि पार्टी नए वोटबैंक को जोड़ने के लिए अपने बेस वोटबैंक की उपेक्षा नहीं करेगी.

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