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राष्ट्रपति पर अपमानजक टिप्पणी कर फंसे पप्पू यादव, 20 आदिवासी सांसदों ने स्पीकर से की एक्शन लेने की मांग

भाजपा सांसदों ने सांसद पप्पू यादव द्वारा 'सर्वोच्च पद की गरिमा को कम करने के उद्देश्य से भारत के राष्ट्रपति के खिलाफ अपमानजनक और निंदनीय शब्दों के उपयोग के माध्यम से' संसदीय विशेषाधिकार, नैतिकता और औचित्य के उल्लंघन के लिए नोटिस भेजा है.

पप्पू यादव के खिलाफ नारेबाजी करते बीजेपी सांसद. पप्पू यादव के खिलाफ नारेबाजी करते बीजेपी सांसद.
पीयूष मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:31 PM IST

बीजेपी के लगभग 20 आदिवासी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भारत के राष्ट्रपति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए सांसद पप्पू यादव पर कार्रवाई करने की मांग की है और संसद परिसर के अंदर निर्दलीय सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

जानकारी के अनुसार, भाजपा सांसदों ने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा "सर्वोच्च पद की गरिमा को कम करने के इरादे से भारत के राष्ट्रपति के खिलाफ अपमानजनक और निंदनीय शब्दों का उपयोग करके" संसदीय विशेषाधिकार, नैतिकता और मर्यादा के उल्लंघन का नोटिस पेश किया है.

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'अपमानजनक है पप्पू यादव का बयान'

बीजेपी सांसदों ने स्पीकर को लिखे पत्र में कहा कि पप्पू यादव द्वारा हाल ही में दिया गया बयान आदिवासी महिला विरोधी और अपमानजनक है, जिससे भारत की  राष्ट्रपति की गरिमा को अत्यंत ठेस पहुंची है. इससे संसद के सदस्यों और देशवासियों दोनों को सामूहिक शर्मिंदगी उठानी पड़ी है.

नोटिस के अनुसार, 'उनका यह बयान "वो तो स्टाम्प है... किसी का प्रेम पत्र पढ़ना है उनको' बहुत अपमानजनक है. ऐसे बयान न केवल अनुचित है, बल्कि राष्ट्रपति पद की गरिमा और हमारी सर्वज्ञ लोकतांत्रिक संस्था की पवित्रता पर सीधा हमला भी है. भारत की राष्ट्रपति संवैधानिक ढांचे के भीतर एक सम्मानित स्थान रखती हैं और इस तरह की टिप्पणी हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्म और मजाक का पात्र भी बनाती है.'

बीजेपी सांसदों ने पत्र में कहा कहा कि इन महिला एवं आदिवासी विरोधी और अपमानजनक टिप्पणियों द्वारा व्यक्त किए गए आरोप राष्ट्रपति को एक कठपुतली के रूप में चित्रित करते है, जिसमें स्वायत्तता और गरिमा का अभाव है जो पूरी तरह से निराधार और अनुचित हैं.

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उल्लेखनीय है कि स्वतंत्र भारत में, चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो. राष्ट्रपति का पद पक्षपातपूर्ण और सस्ती राजनीति से परे रहा है. संसद सदस्य के रूप में हमें सार्वजनिक आचरण, मर्यादा और नैतिकता का पथप्रदर्शक होना चाहिए. इसलिए पप्पू यादव का कृत्य संसदीय परंपरा, नैतिकता और आचारसंहिता का उल्लंघन है.

पद की गरिमा के लिए जरूरी है कार्रवाई

हम इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आपसे आग्रह करते हैं कि आप पप्पू यादव के खिलाफ कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई शुरू करें. ये कार्रवाई राष्ट्रपति पद की गरिमा को बरकरार रखने के लिए जरूरी है. 

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