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अटल ने इंदिरा से कहा था-आप पीएम हैं तो संजय गांधी की वजह से! आजाद ने याद किया वाकया

आजतक से खास बातचीत में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आज राजनीति में बहुत गिरावट आ गई है. आज विपक्ष का आदमी अगर सरकार से बात करे या सरकार का आदमी विपक्ष से बात करे तो ये लगता है कि मिले हुए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (पीटीआई) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (पीटीआई)
मौसमी सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:14 AM IST
  • कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री ऐसे भावुक हो जाएंगेः आजाद
  • अपेक्षा से कहीं ज्यादा पीएम और उपराष्ट्रपति ने की तारीफ

संसद के ऊपरी सदन से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की मंगलवार को विदाई हो गई. इस मौके पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा को संबोधित किया. अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने गुलाम नबी आजाद की जमकर तारीफ की और भावुक हो गए.

वहीं, विदाई भाषण में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वो अपने माता-पिता की मौत पर भी चिल्लाकर नहीं रोए थे, लेकिन उनके जीवन में पांच मौके ऐसे आए जब वो फूट-फूटकर रोए. गुलाम नबी ने बताया कि जब संजय गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की मौत हुई तो इन तीनों हादसों पर मैं जोर से चिल्ला-चिल्लाकर रोया था. इस भावुक विदाई के बाद गुलाम नबी आजाद ने आजतक से खास बातचीत की और कई राजनीतिक किस्से भी साझा किए.

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सवाल: आपके मन में क्या ख्याल आ रहा था जब आज आप सदन जा रहे थे? 

जवाब: मन में तो ख्याल आ रहा था कि आज फेयरवेल है, देखना है कि कौन क्या बोलता है. मेरी अपेक्षा से कई गुना ज्यादा हमारे सांसदों ने बोला. सभी पार्टी के दलों ने बोला, अपेक्षा से कई गुना ज्यादा हमारे उपराष्ट्रपति और हमारे प्रधानमंत्री जी ने बोला.

मैंने कभी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री इतना सेंटीमेंटल हो जाएंगे. इतना भावुक हो जाएंगे. पुरानी यादें सोचकर जब गुजरात के लोगों पर ग्रेनेड फेंका गया था, किस तरह से रोना आ गया था. उस वक्त नरेंद्र मोदी और हम सीएम थे.

जिन पर ग्रेनेड फेंका गया था उनके बच्चे मेरे पैरों पर लिपट गए थे कि हमारे पापा कहां हैं? आप सीएम हैं बताइए? हमारे पापा कहां हैं तो... मेरे आंसू नहीं रुक रहे थे. मेरी चीखें निकल गईं कि मैं कहां से तुम्हारे मां-पिता ला पाऊंगा. 

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रोते-रोते ही मैं मोदी साहब से बात कर रहा था. मैंने कभी नहीं सोचा था कि पीएम उसका जिक्र करेंगे. आज उसका जिक्र हुआ तो बहुत सारे लोग ने उसकी फुटेज निकाली. ऐसा सदमा पहुंचा था उस घटना से मैंने सोचा अल्लाह उनको कभी माफ नहीं करेगा. जिन्होंने टूरिस्ट पर ग्रेनेड फेंका था. बहुत गहरा दुख हुआ था. 

सवाल: पीएम घटना याद करेंगे और भावुक होंगे क्या आपने सोचा था?

जवाब: पीएम ने जब जिक्र किया तो वह भावुक हुए और मैं भी भावुक हो गया. वह दृश्य मुझे याद आ गया मुझे लगा कि बच्चे अभी भी मेरी टांगे पकड़ कर बैठे हैं. एक गम वाला माहौल बन गया था.

सवाल:  किसी ने कल्पना नहीं की थी कि आपको प्रधानमंत्री इतनी अच्छी तरह जानते हैं?

जवाब: आज राजनीति में बहुत गिरावट आ गई है. बदलाव भी आया, गिरावट भी आई है. आज विपक्ष का आदमी अगर सरकार से बात करे या सरकार का आदमी विपक्ष से बात करे तो ये लगता है कि मिले हुए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. 40 साल पहले जब नेता सदन में बोलते थे तो हम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बोलते थे. उसकी विचारधारा के खिलाफ बोलते थे, उसकी पॉलिसी के खिलाफ बोलते थे. 

सवाल: प्रधानमंत्री के भाषण ने आपको हैरत में डाला?

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जवाब: मेरे ख्याल से बहुत सारे पुराने लोग हैं, वो ऐसा करते हैं. अटल बिहारी वाजपेई जी ने संजय गांधी के बारे में बोला था. मैं 1980 की बात कर रहा हूं. राष्ट्रपति के अभिभाषण की चर्चा थी, जब संजय गांधी ने अटल जी की खूब आलोचना की. मार्च के महीने की बात है. आखिर में इंदिरा गांधी बोलने वाली थीं पर उससे पहले अटल जी को बोलना था.

संजय गांधी हमेशा दो-तीन मिनट ही बोलते थे, मगर उस दिन उन्होंने 15 मिनट बोला. वो अटल जी के खिलाफ बोल रहे थे और मैं उनका कुर्ता खींचकर कह रहा था कि जब अटल जी बोलेंगे तो धज्जियां उड़ा देंगे.

लेकिन पूरा हाउस दंग रह गया जब अटल जी बोले. अटल जी ने संजय गांधी की तारीफ शुरू की. उन्होंने कहा संजय गांधी ने आज मेरे बारे में बहुत कुछ कहा लेकिन आज भी संजय गांधी के बारे में एक बात नहीं कहूंगा. उन्होंने इंदिरा गांधी की तरफ देखा और बोला पिछले चुनाव में हमने संजय गांधी को मुद्दा बनाया था, आपकी हार का लेकिन उस वक्त संजय गांधी लीडर नहीं था लेकिन आज इंदिरा गांधी अगर आप इस कुर्सी पर हैं तो आप संजय गांधी और उनके वर्कर की वजह से.

क्योंकि संजय गांधी ने गलियों में कूचों में हमारे साथ लड़ाई की. इसने लाठियां खाईं. आपके सीनियर लीडर भाग गए थे, लेकिन इसके लोग डटे रहे और इसीलिए आप आज प्रधानमंत्री हैं. आज संजय गांधी लीडर है तो मैं लीडर के खिलाफ कुछ नहीं बोलूंगा. राजनीति में इस तरह के नेताओं से हम सीखते हैं. 

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सवाल: क्या प्रधानमंत्री मोदी ने भी वही किया? 

जवाब: प्रधानमंत्री ने ये बातें कीं जैसे अटल जी ने किया, यही राजनीति होती है. वह अच्छा को अच्छा कहते हैं और बुरा को बुरा कहते हैं. पुराने समय के लीडर ऐसे ही करते हैं. यही राजनीति होती है. यही राजनीति की ताकत है अगर हम अच्छे को बुरा कहें और बुरे को अच्छा कहें तो यह राजनीति ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलती. धन्यवाद करता हूं प्रधानमंत्री, राज्यसभा चेयरमैन और सभी नेताओं का, शायद इसके काबिल हूं भी नहीं. उन्होंने बहुत सारी बात कही हैं.

सवाल: पीएम ने G28 का जिक्र किया? 

जवाब: प्रधानमंत्री जी बहुत अच्छे स्पीकर हैं. वह कभी इस तरह से हंसी-मजाक में बहुत सारी चीजें बोल देते हैं. लेकिन उनकी अपनी पार्टी है, मेरी अपनी पार्टी है. वह जितनी दृढ़ता से अपनी पार्टी को पकड़ कर रखे हैं उतनी मजबूती से मैं भी अपनी पार्टी को पकड़ के रखा हूं. पीएम भी अच्छी तरह जानते हैं और मैं उनको अच्छी तरह से जानता हूं. यह जानकर भी हम में से कोई भी एक-दूसरे की पार्टी क्रॉस नहीं करने वाले हैं. 

सवाल: बहुत लोगों को तारीफ खटक रही है? 

जवाब: मैं चाहूंगा कि प्रधानमंत्री उनकी भी तारीफ करें जब वह सदन छोड़ें. मेरी पार्टी कोई बच्चों की पार्टी नहीं है कि कोई मेरी तारीफ करेगा और विशेष रूप से प्रधानमंत्री तो कोई बुरा मान जाएगा. यह तो गौरव की बात होनी चाहिए कि उनके पार्टी के सदस्य की कोई सराहना कर रहा है. 

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सवाल: आपकी पार्टी में आपकी क्षमता पर सवाल खड़े हो रहे हैं?

जवाब: मेरी क्षमता में कांग्रेस पार्टी में किसी ने सवाल नहीं खड़ा किया. छोटे नेता हो सकते हैं, लेकिन जिनके साथ मैंने काम किया है जिनको हमारी क्षमता के बारे में मालूम है, उन्होंने कभी सवाल नहीं खड़ा किया. 

सवाल: पीएम ने कहा कि आपको निवृत नहीं होने दूंगा? 

जवाब: जयललिता, ज्योति बसु, करुणा कारण के साथ में काम कर चुका हूं. बहुत छोटी उम्र में मैं जनरल सेक्रेटरी बन गया था. 37 साल में एआईसीसी का जनरल सेक्रेटरी था, मंत्री भी छोटी उम्र में बन गया. आज जो सदन में नेता हैं, उनके लीडर उनके साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध रहे. मायावती के साथ भी मैं कई डेलिगेशन में जा चुका हूं, जब मैं केंद्रीय मंत्री था. 

सवाल: आज रिटायर होने की नौबत क्यों आ पड़ी? 

जवाब: अब जम्मू-कश्मीर में इलेक्शन नहीं हो रहे. मैं कहीं जा तो नहीं रहा. पार्लियामेंट ही बड़ी चीज नहीं है. संसद से थोड़ी छुट्टी मिलेगी तो फ्री होकर काम करुंगा.

सवाल: आप के बगीचे में क्या खास है, प्रधानमंत्री ने जिक्र किया था? 

जवाब: मेरे ख्याल में मेरे बगीचे में 25-26 वैरायटी के फूल हैं. जब मैं मुख्यमंत्री था तो मैंने एशिया का पहला ट्यूलिप गार्डन कश्मीर में बनाया था. आज वह एक पर्यटक स्थल है. मैं सिर्फ फूल ही नहीं उगाता हूं, बीज भी खुद रखता हूं, कलेक्ट करता हूं पौध भी तैयार करता हूं. कौन सी चीज कहां लगेगी, उसके बाद अलग-अलग जगह लगाता हूं. 

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सवाल: आजाद होंगे टायर या रिटायर ? 

जवाब: टायर तो कभी नहीं, फिजिकली-मेंटली फिट हूं. वह तो हमारे चेयरमैन साहब की स्पेशल कहावत है ना टायर ना रिटायर...तो उसका सवाल ही नहीं है टायर या रिटायर होने का. 

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