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देश के वो दिग्गज नेता जिन्होंने किसानों के लिए लड़कर बनाया सियासत में मुकाम

सियासत में आए किसान नेताओं ने सड़क से लेकर संसद तक किसानों के हक में अपनी आवाज बुलंद करने का काम किया. हालांकि, पिछले कुछ दशकों में किसानों की आवाज सड़क पर सुनाई तो दे रही है, लेकिन संसद में नहीं गूंजती है. वहीं, देश के किसानों के सामने ऐसे हालात हो गए कि वो न सिर्फ बदहाल हैं बल्कि आज सड़कों पर भी उतर आए हैं.

कुबूल अहमद
  • नई दिल्ली,
  • 08 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 2:11 PM IST
  • किसानों के मसीहा माने जाते थे चौधरी चरण सिंह
  • हरिकिशन सुरजीत ने पंजाब किसान सभा बनाई थी
  • किसानों के मुद्दे पर देवीलाल सबसे मुखर नेता रहे

मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ देश भर के किसान आज भारत बंद के तहत सड़क पर हैं. किसान संगठन संसद का विशेष सत्र बुला कर इन कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं. विपक्ष के तमाम दल किसानों की मांग का समर्थन कर रहे हैं. भारत में किसानों के आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है. आजादी से पहले स्वामी सहजानंद सरस्वती और सर छोटूराम जैसे किसान नेता इन्हीं आंदोलनों से निकले. आजादी के बाद भी ये सिलसिला जारी रहा. हमारे देश की सियासत में ऐसे तमाम दिग्गज नेता रहे हैं जो किसानों के लिए संघर्ष करते हुए राजनीति के शिखर पर पहुंचे.

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1. चौधरी चरण सिंह
देश के ग्रामीण और शहरी आर्थिक अंतर्विरोध के खिलाफ चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस से अलग होकर धुर किसान राजनीति शुरु की. गाजियाबाद जिले के नूरपुर गांव में जन्मे चौधरी चरण सिंह ने किसान राजनीति के जरिए साठ के दशक के उत्तर भारत में कांग्रेस के सामने एक चुनौती पेश की और बाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक बने. चरण सिंह कहते थे कि देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है. 


वह यह बताने की कोशिश करते रहे कि बगैर किसानों को खुशहाल किए देश का विकास नहीं हो सकता. किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके इसके लिए वो संघर्ष करते रहे, जिसके चलते वो किसानों के मसीहा के तौर पर जाने जाते हैं. चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे चौधरी अजित सिंह ने आगे बढ़ाया और उनके पोते जंयत चौधरी किसानों के मुद्दे पर मुखर रहते हैं.

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चौधरी देवीलाल

 


2. चौधरी देवीलाल
किसान आंदोलन से निकले चौधरी देवीलाल ने हरियाणा ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी. देवीलाल खुद संपन्न परिवार के थे, लेकिन उनका अंदाज ठेठ ग्रामीणों वाला ही रहा, वो किसान, खेतिहर मजदूरों और गरीब गुरबों की आवाज उठाने वाले नेता के तौर पर जाने जाते थे. हरियाणा के मुख्यमंत्री से लेकर देश के उपप्रधानमंत्री तक बने, लेकिन किसान राजनीति को नहीं छोड़ा और राष्ट्रीय कृषि नीति व जल नीति बनवाने में अहम भूमिका अदा की. चौधरी देवीलाल की विरासत को उनके बेटे ओम प्रकाश चौटाला ने संभाला और उन्होंने भी अपनी राजनीति किसानों के इर्द-गिर्द रखी. चौटाला के बेटे अजय चौटाला और अभय चौटाला भी राजनीति में है, लेकिन अजय ने अपने बेटों के साथ मिलकर अलग राजनीति बना ली है. दुष्यंत चौटाला मौजूदा समय में हरियाणा के डिप्टी सीएम हैं. 

 

3. बलराम जाखड़
किसान परिवार में जन्मे बलराम जाखड़ की राजनीति किसान हितों के इर्द-गिर्द सिमटी रही. यही वजह रही कि राजीव गांधी ने अपनी सरकार में कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी बलराम जाखड़ सौंपी थी और कांग्रेस में किसान नेता के तौर पर अपनी जगह बनाई थी. खेतों में पैदावार बढ़ाने के लिए उन्नत और वैज्ञानिक तकनीकों को लेकर जाखड़ हमेशा कोशिश में जुटे रहे. उन्होंने किसानों के हक में आवाज उठाने के लिए किसान संगठन का गठन भी किया था. 

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बलराम जाखड़


4. राजेश पायलट
किसान परिवार में जन्मे राजेश पायलट की पहचान एक किसान नेता के तौर पर रही. किसानों के मुद्दे पर पायलट सड़क से लेकर संसद तक में मुखर रहे हैं. उन्होंने किसानों के मुद्दे पर अपनी सरकार और कांग्रेस भी आलोचना करने से नहीं चूके. यूपी के गाजियाबाद में जन्मे थे, लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि राजस्थान को चुना और केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया. 


5. शरद पवार 
महाराष्ट्र की राजनीति के बेताज बादशाह कहे जाने वाले एनसीपी प्रमुख शरद पवार की राजनीति भी किसानों के इर्द-गिर्द सिमटी रही है. महाराष्ट्र में किसानों के हक में शरद पवार हमेशा आवाज उठाते रहे हैं और यूपीए सरकार में कृषि मंत्री रहे. शरद पवार ने किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पिछले साल मुलाकात भी की थी और हाल में उन्होंने पीएम को पत्र भी लिखा है. पवार महाराष्ट्र के सीएम रहने के साथ केंद्र में कई बार मंत्री भी रहे. 

शरद पवार


6. वसंत दादा पाटिल

महाराष्ट्र में किसान नेता को तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले वसंत दादा पाटिल साठ के दशक में कांग्रेस के दिग्गज नेता थे. वसंत दादा पाटिल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक रहे हैं और वह अपने कार्यकाल में कपास और गन्ना किसानों पर खास मेहरबान थे और उनके तमाम योजनाएं शुरू की थीं, जिनमें सिचाई योजना प्रमुख रही थी. 

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7. एचडी देवगौड़ा 
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा भी किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता खेती करते थे और राजनीति के केंद्र में किसान ही रहे हैं. कर्नाटक में किसान नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई और प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक बने, लेकिन किसानों के मुद्दों पर समझौता नहीं किया. हालांकि, उन्होंने अपना सियासी सफर कांग्रेस से शुरू किया था, लेकिन बाद में अलग अपनी राजनीतिक लकीर खींची. 


8. मुलायम सिंह यादव
किसान परिवार में जन्मे मुलायम सिंह यादव ने किसान नेता चौधरी चरण सिंह के सानिध्य में रहकर राजनीति का हुनर सीखा. इसी का नतीजा था कि मुलायम सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने तो किसान और पशुपालकों को ही अपने मुख्य एजेंडे में रखा. सपा के शासन में ही किसान की सिंचाई के लिए बिजली बिल माफ किए गए थे और गांव के विकास को प्राथमिकता दी गई. इसी के चलते उनके समर्थक उन्हें धरतीपुत्र के नाम से पुकारते थे. 

चौधरी चरण सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव


9. सोमपाल शास्त्री
जनता पार्टी से अपना सियासी सफर शुरू करने वाले सोमपाल शास्त्री किसान नेता रहे और बाद में बीजेपी का दामन थाम लिया, लेकिन किसानों के मुद्दे को उठाना नहीं छोड़ा. इसी का नतीजा था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार में  सोमपाल शास्त्री को कृषि मंत्री बनाया. उन्होंने अपने कार्यकाल में किसानों को क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू की और गेहूं का समर्थन मूल्य 19.6 प्रतिशत बढ़ाकर इतिहास रचा. इसके अलावा चीनी मिलों को लाइसेंस प्रणाली से मुक्त किया और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना तैयार कराई. 

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10. साहब सिंह वर्मा
किसान परिवार से आए साहब सिंह वर्मा की राजनीति भले ही दिल्ली केंद्रित रही हो, लेकिन उनकी पहचान एक किसान नेता के तौर पर रही है. बीजेपी के एक समय किसान चेहरा थे, जिनके जरिए पार्टी किसानों को साधने का काम करती थी. साहब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते हुए किसानों के हित में कई अहम काम किए थे. इसी के चलते साहिब ने अपने आपको ग्रामीण दिल्ली के सर्वमान्य नेता के तौर पर स्थापित किया. 


11. बंसीलाल 
हरियाणा की राजनीति में बंसीलाल के नाम से हर कोई वाकिफ होगा. बंसीलाल ने भी किसानों की राजनीति तो की, लेकिन वफादारी इंदिरा गांधी के प्रति रही. 1968 से लेकर 1975 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. नए राज्य हरियाणा में इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल विकास का श्रेय बंसीलाल को जाता है. यही नहीं हरियाणा में किसानों के हित में कई अहम कदम उठाए हैं. 


12. हरिकिशन सुरजीत 
वामपंथ की राजनीति का चेहरा रहे हरिकिशन सुरजीत भी किसान आंदोलन से निकलकर राजनीति में आए थे. 1936 में अविभाजित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बन गए थे और पंजाब में किसान सभा की नींव रखने वालों में से एक थे. पंजाब में किसानों की आवाज थे, जिसे सड़क से लेकर संसद तक उन्होंने उठाने का काम किया. राजनीतिक तौर पर उन्होंने काग्रेस-बीजेपी के सामने 1996 में तीसरे मोर्चे को खड़ा किया और फिर कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को खड़ा करने में अहम कड़ी बने. 

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13. प्रकाश सिंह बादल
पंजाब राजनीति का चेहरा रहे अकाली दल के संस्थापक प्रकाश सिंह बादल ऐसे अकेले नेता हैं, जो 5 बार पंजाब के मुख्‍यमंत्री बने. हाल ही में किसान आंदोलन के समर्थन में बादल एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने पद्म विभूषण सम्मान लौटा दिया. खेती-किसानी के परिवार से आने वाले बादल ने पंजाब में किसानों के लिए काफी काम किए. पशुपालन और खेती से जुड़े डेयरी उद्योग में किसानों को काफी रियायतें दीं ताकि खेती को बढ़ावा मिल सके. पंचायतीराज पर भी बादल ने खूब काम किया ताकि स्थानीय स्तर पर ही व्यवस्था मजबूत हो सके. पंजाब किसानों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिसके चलते ही अकाली बीजेपी से अलग हुई है. 

चौधरी चरण सिंह के साथ प्रकाश सिंह बादल


14. राजीव शेट्टी
महाराष्ट्र में किसानों की आवाज बनकर उभरे स्वाभिमानी पक्ष के संयोजक राजू शेट्टी अपनी अलग जगह बना चुके हैं. विधानसभा से लेकर लोकसभा तक के सदस्य रहे राजीव शेट्टी हमेशा किसानों के मुद्दे पर मुखर रहे हैं. महाराष्ट्र में गन्ना किसानों की लड़ाई लड़ते रहे हैं, जिसके चलते उनके क्षेत्र में गन्ना मिलों पर किसानों का कोई बकाया नहीं है. महाराष्ट्र किसानों के मुद्दे को लेकर सड़क से संसद तक संघर्ष करने वाले नेताओं में गिना जाता है. 

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15. राज शेखर रेड्डी 
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राज शेखर रेड्डी की पहचान भी किसान नेता के तौर पर होती थी. सीएम रहते हुए उन्होंने किसानों के हक में कई अहम कदम उठाए थे और विपक्ष में रहते हुए किसानों के मुद्दे पर राज्य भर का दौरा किया था. इसी का नतीजा है कि राज शेखर रेड्डी की जयंती को आज भी आंध्र प्रदेश में 'किसान दिवस' के रूप में लोग मनाते हैं. राज शेखर कांग्रेस का चेहरा हुआ करते थे, लेकिन उनके निधन के बाद जगन मोहन रेड्डी ने अपनी अलग पार्टी बनाई और प्रदेश की सत्ता पर काबिज हैं. 


16. राजनाथ सिंह 
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता राजनाथ सिंह किसान आंदोलन से तो राजनीति में नही आए हैं, लेकिन किसान परिवार से जरूर आए हैं. ऐसे में वह किसान के लिए हमेशा मुखर रहे हैं और मौजूदा समय में कृषि कानूनों से नाराज किसानों से बातचीत और उनको साधने के काम में राजनाथ सिंह लगे हुए हैं. राजनाथ बीजेपी के अध्यक्ष से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री तक रहे चुके हैं. यूपी के सीएम रहते हुए राजनाथ सिंह ने गन्ना किसानों के हित में कई अहम कदम उठाए थे.

 

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