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निलंबित सांसदों के समर्थन में फारूक अब्दुल्ला, कहा- सदन में बोलने नहीं दिया जाता

तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन समेत 8 निलंबित सदस्य, संसद परिसर में गांधी मूर्ति के पास धरने पर बैठे हैं. ये सभी सभापति के फैसले का विरोध कर रहे हैं. अब विपक्षी दलों के कई सांसद भी इन निलंबित सांसदों के समर्थन में उतर आए हैं.

फारूक अब्दुल्ला और संजय राउत ने निलंबित सांसदों का किया समर्थन फारूक अब्दुल्ला और संजय राउत ने निलंबित सांसदों का किया समर्थन
अशोक सिंघल
  • नई दिल्ली ,
  • 21 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:44 PM IST
  • 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए किया गया निलंबित
  • सभापति के फैसले का विरोध कर रहे हैं आठों सांसद
  • फैसले के विरोध में संसद परिसर के अंदर दिया धरना

कृषि से जुड़े दो बिल लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गए हैं. लेकिन रविवार को राज्यसभा में बिल पास होने के दौरान सदन के अंदर जो कुछ हुआ उसको लेकर जारी राजनीतिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिसे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ठुकरा दिया. बाद में सदन के अंदर हंगामा करने और संसदीय मर्यादा को तार-तार करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन समेत 8 सांसदों को पूरे मॉनसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया.

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इस फैसले से नाराज सांसदों ने सदन के अंदर हंगामा किया तो राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई. जिसके बाद सभी निलंबित सांसद, संसद परिसर स्थित गांधी मूर्ति के पास धरने पर बैठ गए हैं. 

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला और शिवसेना सांसद संजय राउत बाद में सभी निलंबति सांसदों के समर्थन में गांधी की मूर्ति के पास पहुंचे. फारूक अब्दुल्ला ने आजतक से बात करते हुए कहा कि यह प्रजातंत्र के लिए बहुत गलत चीज है. चर्चा होनी चाहिए कोई लड़ाई नहीं है.

फारूक ने कहा कि सवाल यह है किसानों का जो बिल है वह हमारे किसान के हित में नहीं है. अगर हित में नहीं है तो हम सब को सोचना चाहिए. हम कोई दुश्मन तो है नहीं, हम भी इसी मुल्क से हैं. इसलिए बहुत जरूरी है कि सरकार इसे समझे. फिर से इस पर ध्यान दे. एक तरफ हमलोग कोरोना वायरस से लड़ रहे हैं, दूसरी तरफ मुल्क में एक और आंदोलन हो सकता है. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैंने सदन में कई मुद्दे उठाने की कोशिश की लेकिन अनुमति नहीं दी जाती है. कोई कुछ सुनता ही नहीं है. 

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वहीं संजय राउत ने आजतक से बात करते हुए कहा कि यह सिर्फ 8 सांसदों का मुद्दा नहीं है. रविवार को 90 सांसद इनके साथ थे. जिस तरीके से इन सभी को निलंबित किया गया है वह कानून और नियम के खिलाफ है. जैसा हम हमेशा कहते हैं यह लोकतंत्र की हत्या है. हत्या क्या होती है? कैसे की जाती है? कल भी देखा है और आज भी देखा है. यह देश के लिए ठीक नहीं है. संसद के लिए ठीक नहीं है. हमें डिवीजन मांगने का अधिकार है. सत्ताधारी अगर नियमों का पालन नहीं करेंगे तो विरोध और हंगामा होगा ही. 

वहीं ड्रग्स के मुद्दे पर बात करते हुए संजय राउत नेक कहा कि सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं सभी क्षेत्रों में ड्रग्स का मामला है. एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) एक व्यक्ति के पीछे पड़ी है. पूरे देश से इसके रैकेट को खत्म करें. बॉर्डर स्टेट में जाकर देखें कि क्या चल रहा है. लेकिन एनसीबी फिल्म इंडस्ट्री के दो-चार लोगों के पीछे पड़ी हुई है.

अनुराग कश्यप पर लगे यौन शोषण के आरोप पर बात करते हुए संजय राउत ने कहा कि जो सरकार के खिलाफ जाता है, उसको इसी ढंग से फंसाया जाता है. अगर किसी तरीके से कोई पकड़ में नहीं आ रहा तो उसको दबाने की कोशिश की जाती है. 

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