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गुजरात दंगा: 'तीस्ता सीतलवाड़ के पीछे सोनिया का सपोर्ट', सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर संबित पात्रा बोले

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2002 गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली SIT रिपोर्ट के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया था. फैसले के बाद बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि पीएम मोदी के पीछे लेफ्ट गैंग पड़ा था. कांग्रेस और कुछ पार्टियों की मदद से अपनी दुकान चलाने वालों को आज झटका लगा है, सच देश के सामने है.

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप (फाइल फोटो) बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप (फाइल फोटो)
अमित भारद्वाज
  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2022,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST
  • तीस्ता ने गुलबर्ग सोसायटी के नाम पर मिले पैसे हड़प लिए
  • SIT की क्लीनचिट को चुनौती देने वाली याचिका SC में खारिज

सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की मुंबई में गिरफ्तार के बाद बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. उन्होंने सवाल किया कि तीस्ता सीतलवाड़ के पीछे कौन सी ताकत थी? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि तीस्ता के पीछे सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी थी. तीस्ता सोनिया गांधी (यूपीए के दौरान) द्वारा गठित राष्ट्रीय सलाहकार समिति की सदस्य थीं.

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बीजेपी नेता ने बताया कि सोनिया गांधी के निर्देश पर केंद्र ने शिक्षा के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये मुहैया कराए थे. तीस्ता ने मोदीजी को बदनाम करने के लिए पैम्फलेट छापने के लिए इस राशि का इस्तेमाल किया. अदालत ने भी माना कि जो पैसा गरीबों के पास जाना था, उसका इस्तेमाल व्यक्तिगत और भौतिकवादी उपयोगों के लिए किया गया था. तीस्ता एंड कंपनी ने इन पैसों का निजी इस्तेमाल किया है.

तीस्ता ने रची थी मदीना के रेप की कहानी 

संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुन को कहा कि मामले को जबरन चलाया जा रहा है. ऐसे सभी लोग जिन्होंने साजिश की, उन्हें कटघरे में खड़ा होना पड़ा है. हमें ऐसा लगता है कि असंतुष्ट अधिकारियों और अन्य लोगों ने इस मुद्दे को जबरन चलाने की कोशिश की.

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उन्होंने बताया कि यह झूठ फैलाया गया कि कौसर बानो का गर्भ काट दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में ये सारी बातें गलत साबित हुईं. मदीना के रेप की कहानी तीस्ता ने रची थी. तीस्ता ने ही गवाहों को झूठी कहानी बताने के लिए कहा था.

तीस्ता ने अपने हिसाब से तैयार करवाए हलफनामे

तीस्ता के एनजीओ के पूर्व कर्मचारी रेयाज खान पठान ने अपनी शिकायत में कहा था कि लगभग सभी हलफनामे तीस्ता ने बनाए थे. इस पर गवाहों ने हस्ताक्षर किए थे और गवाहों को हलफनामे की कॉपी भी नहीं दी गई थी.

दंगे के शिकार जाहिद खान ने तीस्ता के एनजीओ पर धर्म के नाम पर निर्दोष पीड़ितों (दंगों के) को गुमराह करने का आरोप लगाया है.

निजी इस्तेमाल में खर्च किया चैरिटी का पैसा

तीस्ता और उनके पति के दो एनजीओ हैं. मुसलमानों की मदद के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसों को जूते, वाइन, हवाई टिकट जैसे निजी इस्तेमाल में खर्च किया जाता था.

संबित पात्रा ने कहा कि तीस्ता व उनके पति जावेद ने गुलबर्ग सोसायटी बनाने के नाम पर वसूले पैसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिए. 

20 साल तक नरेंद्र मोदी से होती रही पूछताछ

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने शनिवार को कहा कि नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन 20 से अधिक वर्षों तक जांच के दायरे में रहा लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं खोई. उन्हें व्यवस्था पर पूरा भरोसा था. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कभी भी हंगामा नहीं करने के लिए कहा. विपक्ष को इससे सीख लेनी चाहिए.

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मालूम हो कि गुजरात दंगा मामले में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी को SIT की क्लीनचिट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी. 

सीतलवाड़ और पूर्व IPS आरबी श्रीकुमार अरेस्ट

गुजरात दंगा मामले में झूठी जानकारी देने के आरोप में शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ समेत दो पूर्व आईपीएस अफसर संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया. अहमदाबाद शहर की पुलिस अपराध शाखा के इंस्पेक्टर दर्शनसिंह बी बराड की शिकायत पर तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

गुजरात एटीएस ने मुंबई पहुंचकर तीस्ता सीतलवाड़ को उनके घर से गिरफ्तार किया. वहीं अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार को अरेस्ट कर लिया है. अब दोनों को रविवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने जकिया जाफरी के जरिए कोर्ट में कई याचिकाएं लगाईं और एसआईटी प्रमुख और दूसरे आयोग को गलत जानकारियां दीं.

आईपीसी की इन छह धाराओं में दर्ज हुआ केस

468- धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी करना.

471- जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना.

194- दोष साबित करने के इरादे से झूठे सबूत देना.

212- अपराधी को शरण देना.

218- पब्लिक सर्वेंट द्वारा किसी को सजा या संपत्ति जब्ती से बचाने के इरादे से गलत रिकॉर्ड तैयार करना.

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211- खुद को चोट पहुंचाकर हमले का झूठा आरोप लगाना.

SC ने तीस्ता और पूर्व IPS पर की थी टिप्प्णी

- 24 जून को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे पर एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को रद्द कर दिया था. इस याचिका को जाकिया जाफरी ने दाखिल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका रद्द करते हुए कहा था तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है, क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी.

- कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ इसीलिए इस मामले में लगातार घुसी रहीं, क्योंकि जकिया अहसान जाफरी इस पूरे मामले में असली पीड़ित हैं. तीस्ता अपने हिसाब से उनको इस मुकदमे में मदद करने के बहाने उनको नियंत्रित कर रही थीं, जबकि वो अपने हित साधने की गरज से बदले की भावना रखते हुए इस मुकदमे में न केवल दिलचस्पी ले रही थीं बल्कि अपने मनमुताबिक चीजें भी गढ़ रही थीं. जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने यह फैसला सुनाया था.

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल होने के दावेदारों के बयान मामले को राजनीतिक रूप से सनसनी पैदा करने वाले थे. दरअसल संजीव भट्ट, हिरेन पंड्या और आरबी श्रीकुमार ने SIT के सामने बयान दिया था जो कि निराधार और झूठे साबित हुए, क्योंकि जांच में पता चला कि ये लोग तो लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई गई उस मीटिंग में शामिल ही नहीं हुए थे.

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दिसंबर 2021 से हो रही थी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सात महीने पहले 9 दिसंबर 2021 को जाकिया जाफरी की याचिका पर मैराथन सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. गुजरात दंगों की जांच के लिए बनी एसआईटी ने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे अब के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी थी.

एहसान जाफरी की दंगों में हुई थी मौत

2002 में गुजरात दंगों के दौरान जाकिया जाफरी के पति तब कांग्रेस से विधायक रहे एहसान जाफरी को दंगाई भीड़ ने मार डाला था. गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में एहसान जाफरी भी मारे गए थे. एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने SIT की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी.

एसआईटी की रिपोर्ट में प्रदेश के उच्च पदों पर रहे लोगों को क्लीन चिट दी गई थी. एसआईटी ने राज्य के उच्च पदाधिकारियों की ओर से गोधरा ट्रेन अग्निकांड और उसके बाद हुए दंगे भड़काने में किसी भी साजिश को नकार दिया था. साल 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने SIT की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जाकिया की शिकायत खारिज कर दी थी. 
 

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