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हरीश रावत का 'पंज प्यारे' बयान पर प्रायश्चित! गुरुद्वारा साहिब में साफ किए जूते

हरीश रावत ने साफ कहा कि मैंने प्रायश्चित स्वरूप कुछ देर झाड़ू लगाकर सफाई की. मैं, सिख धर्म और उसकी महान परंपराओं के प्रति हमेशा समर्पित भाव और आदर भाव रखता रहा हूं. मैं पुनः आदर सूचक शब्द समझकर उपयोग किये गये अपने शब्द के लिये मैं सबसे क्षमा चाहता हूं.

हरीश रावत ने अपने बयान पर मांगी माफी (फाइल फोटो) हरीश रावत ने अपने बयान पर मांगी माफी (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • चंडीगढ़,
  • 03 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 7:30 AM IST
  • हरीश रावत ने अपने बयान के लिए मांगी माफी
  • प्रायश्चित स्वरुप गुरुद्वारे में साफ किए जूते

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी पर सिद्धू और सीएम अमरिंदर सिंह के बीच विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई थी. लेकिन वो खुद ही विवादों में उलझ गए हैं. दरअसल, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और उनके चार कार्यकारी अध्यक्षों की तुलना सिख धर्म के महान 'पंज प्यारो' से कर दी, जिसपर हंगामा हो गया. जिसके बाद से हरीश रावत लगातार माफी मांग रहे हैं. हरीश रावत ने कहा था कि वह उत्तराखंड के किसी न किसी गुरुद्वारे में जाकर माफी मांगेंगे और वहां जाकर सेवा करेंगे. ऐसे में शुक्रवार को उन्होंने नानकमत्ता के श्री गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेका, जूते साफ किए और झाड़ू लगाई. 

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हरीश रावत ने साफ कहा कि मैंने प्रायश्चित स्वरूप कुछ देर झाड़ू लगाकर सफाई की. मैं, सिख धर्म और उसकी महान परंपराओं के प्रति हमेशा समर्पित भाव और आदर भाव रखता रहा हूं. मैं पुनः आदर सूचक शब्द समझकर उपयोग किये गये अपने शब्द के लिये मैं सबसे क्षमा चाहता हूं.

उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'नानकमत्ता श्री गुरुद्वारा साहब में मैंने प्रायश्चित स्वरूप कुछ देर जूते साफ किये. मैं, सिख धर्म और उसकी महान परंपराओं के प्रति हमेशा समर्पित भाव और आदर भाव रखता रहा हूं. मैं पुनः आदर सूचक शब्द समझकर उपयोग किये गये अपने शब्द के लिये मैं सबसे क्षमा चाहता हूं.'

हलाांकि हरीश रावत ने दो दिन पहले भी अकाली दल की तरफ से सिख धर्म के अनुयायियों को ठेस पहुंचाने के आरोप के कुछ ही घंटों के अंदर माफी मांग ली. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर माफीनामा डालते हुए लिखा, 'कभी आप आदर व्यक्त करते हुए कुछ ऐसे शब्दों का उपयोग कर देते हैं जो आपत्तिजनक होते हैं. मुझसे भी कल अपने माननीय अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए पंज प्यारे शब्द का उपयोग करने की गलती हुई है. मैं देश के इतिहास का विद्यार्थी हूं और पंज प्यारों के अग्रणी स्थान की किसी और से तुलना नहीं की जा सकती है. मुझसे ये गलती हुई है, मैं लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए क्षमा प्रार्थी हूं. मैं प्रायश्चित स्वरूप सबसे क्षमा चाहता हूं. मैं प्रायश्चित स्वरूप अपने राज्य के किसी गुरुद्वारे में कुछ देर झाड़ू लगाकर सफाई करूंगा.'

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और पढ़ें- हरीश रावत एक साथ 2 नाव पर सवार, न पंजाब ऑल इज वेल, न उत्तराखंड में चुनावी रफ्तार

दरअसल, पंजाब कांग्रेस में लगातार जारी सिद्धू बनाम कैप्टन अमरिंदर विवाद को सुलझाने के लिए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंचे थे. हरीश रावत ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और उनके साथ नियुक्त किए गए चार वर्किंग प्रेसिडेंट्स के साथ मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद रावत ने सिद्धू और उनके चार वर्किंग प्रेसिडेंट्स की तुलना 'पंज प्यारो' से कर दी थी.


 बता दें कि सिख धर्म में मान्यता है कि जब गुरु गोविंद सिंह ने सिख धर्म की शुरुआत की थी तो उन्होंने 5 प्यारों यानि 5 लोगों को चुना था. ये लोग गुरु और धर्म के लिए कुछ भी कर सकते थे और धर्म के लिए अपनी जान भी न्यौछावर कर देते थे. इसी के बाद से ये परंपरा रही है कि जब भी सिखों की कोई भी यात्रा, नगर-कीर्तन या धार्मिक कार्यक्रम होता है वहां पर पंज प्यारे उसका नेतृत्व करते हैं जिनको बहुत ही पवित्र माना जाता है.

 

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