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Inside story: मंत्री पद छीना, TMC से भी सस्पेंड... पार्थ चटर्जी से ममता बनर्जी ने इन वजहों से बनाई दूरी

पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) पर ममता बनर्जी ने सख्त एक्शन लिया है. उनको पहले मंत्री पद से हटाया गया. फिर उनको TMC के सभी पदों से भी हटा दिया गया. शिक्षक भर्ती घोटाले में पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी का नाम आया है. दोनों को ईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था.

ममता बनर्जी ने पार्थ चटर्जी पर कड़ा एक्शन लिया है ममता बनर्जी ने पार्थ चटर्जी पर कड़ा एक्शन लिया है
जयंत घोषाल
  • कोलकाता,
  • 28 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST
  • पार्थ चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया गया है
  • पार्टी के सभी पदों से भी उनको हटाया गया

शिक्षक भर्ती घोटाले में आज बंगाल सरकार ने बड़ा एक्शन लिया. इसमें पार्थ चटर्जी को पहले मंत्रीपद और फिर TMC के सभी पदों से हटा दिया गया. पार्थ चटर्जी पर ममता ने उनकी गिरफ्तारी के छह दिन बाद एक्शन लिया है. लेकिन अपने खास नेता और करीबी को हटाना ममता के लिए आसान नहीं था. लेकिन कई चीजें ऐसी थीं जो पार्थ के खिलाफ जा रही थीं जिसका नुकसान TMC के साथ-साथ ममता बनर्जी की इमेज को भी हो रहा था.

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पार्थ चटर्जी बंगाल के शिक्षक घोटाले में फंसे हैं. उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग घरों से करीब 50 करोड़ रुपये कैश और कई किलो सोना मिला है. ईडी के मुताबिक, अर्पिता कबूल कर चुकी हैं कि यह सारा पैसा मंत्री पार्थ चटर्जी का है.

अब पार्थ की गिरफ्तारी के करीब एक हफ्ते बाद उनको पार्टी से निकाला गया है. ममता बनर्जी यह तक कह चुकी हैं कि अगर पार्थ दोषी पाये जाते हैं तो उनको आजीवन कारावास देने पर भी उनको फर्क नहीं पड़ेगा.

खुद को पार्थ से किनारे करने के बाद ममता ने अब उनपर एक्शन क्यों लिया इसकी कई वजह हैं. जिनको यहां समझना होगा.

ईडी ने छापेमारी के बाद भारी मात्रा में बरामद कैश के साथ-साथ अर्पिता और पार्थ की निजी फोटोज भी रिलीज की थीं. इसका बंगाल के लोगों पर काफी असर हुआ. ममता को भी अहसास हो गया था कि यह उनकी ईमानदार, भ्रष्टाचार मुक्त छवि को चोट पहुंचा रहा है. इसलिए उन्होंने एक्शन लिया.

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वैसे पार्थ की गिरफ्तारी के बाद ही एक्शन शुरू हो चुका था. पहले पार्थ को दिया गया सरकारी वाहन छीना गया. फिर 'जागो बांग्ला' मैगजीन के एडिटर के पद से उनको हटाया गया. फिर मंत्री पद छीना गया और आखिर में उनको पार्टी से ही सस्पेंड कर दिया.

एक्शन इसलिए भी जरूरी था क्योंकि बात यहां सिर्फ पार्थ और अर्पिता तक सीमित नहीं थी. बल्कि मामला राज्य के शिक्षा भर्ती घोटाले से जुड़ा था.

पार्थ TMC पार्टी के महासचिव थे. अब उनको इस पद से भी हटा दिया गया है. अगर एक्शन नहीं होता तो पार्टी कार्यकर्ता कंफ्यूजन में रहते. ममता आने वाले दिनों में अपनी कैबिनेट में बदलाव वैसे भी करने वाली थीं. अब पार्थ के जाने से खाली जगह को भी साथ ही भर लिया जाएगा.

एक्शन की एक वजह मिथुन चक्रवर्ती का बयान भी हो सकता है. उन्होंने कहा था कि TMC के 38 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. इस घोटाले के सामने आने के बाद बीजेपी टीएमसी को तोड़ने के लिए आक्रमक रुख अपना सकती थी. लेकिन अब पार्थ को खुद से अलग करके टीएमसी ऐसा होने से रोकना चाहेगी.

पार्थ पर एक्शन से ममता बनर्जी अपनी छवि को दागदार होने से बचाना भी चाहती हैं. वह दिखाना चाहती हैं कि अगर कोई आगे भी ऐसा करेगा तो उसके साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया जाएगा जैसा पार्थ के साथ हुआ. वह कहती रही हैं कि उनको इस घोटाले के बारे में कुछ नहीं पता है. ममता के एक्शन के पीछे TMC से जुड़े युवा भी हैं, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ काफी आक्रमक हैं.

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